मंत्री राजेश धर्माणी ने राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार के विद्यार्थियों से किया संवाद

घुमारवीं (बिलासपुर), 18 अगस्त: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, डंगार में विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम में भाग लेते हुए उनके शैक्षणिक, बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों की मांग पर महाविद्यालय परिसर में पांच सोलर स्ट्रीट लाइटें स्थापित करने तथा ई-लाइब्रेरी के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक अध्ययन सुविधाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने महाविद्यालय के नाम के साथ श्री सरस्वती शब्द जोड़ने संबंधी मांग पर प्रस्ताव भेजने का कहा, ताकि मामले को प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जा सके।
उन्होंने महाविद्यालय में संगीत वाद्ययंत्र उपलब्ध करवाने तथा पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए परिसर में हैंडपंप स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर कौशल प्रशिक्षण (कंप्यूटर स्किल ट्रेनिंग) का विशेष पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा, जिससे वह आधुनिक तकनीकी दक्षता प्राप्त कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कैरियर काउंसलिंग की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि कॉलेज के जीर्णोद्धार कार्यों के लिए प्रदेश सरकार ने 25 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है जिसका लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए एफआरए का मामला संबंधित विभाग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के दृष्टिगत काॅलेज में एनसीसी, एनएसएस तथा स्काउट्स एंड गाईड की युनिट स्थापित करने के लिए मामले को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने अपनी ओर से प्रति वर्ष प्रतिमाह तीन जरूरतमंद विद्यार्थियों को जिसमें दो छात्राएं शामिल हो, को स्काॅरशिप प्रदान करने की भी घोषणा की।
राजेश धर्माणी ने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन एवं ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध भाषा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि आधुनिक युग में उत्कृष्ट संस्कृत विद्वान बनने के लिए संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा एवं कंप्यूटर तकनीक का भी ज्ञान अर्जित करें, ताकि वे विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति और संस्कृत के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने कहा कि संस्कृत के विद्यार्थी भारतीय संस्कृति के सशक्त ब्रांड एम्बेसडर बन सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से गर्व की भावना के साथ संस्कृत का अध्ययन करने तथा व्यक्तित्व विकास और प्रभावी संवाद कौशल पर विशेष ध्यान केंद्रित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जन और सीखने के प्रभावी माध्यम के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत शिक्षा में संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए धार्मिक गुरुओं एवं महान विभूतियों की जीवनियों का अध्ययन करने की भी प्रेरणा दी।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि अध्यात्म समाज को जोड़ने का कार्य करता है तथा घृणा, द्वेष और वैमनस्य जैसी नकारात्मक भावनाओं को समाप्त कर समाज में सद्भाव, दया और करुणा की भावना को सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शारीरिक स्वास्थ्य, उत्तम साहित्य के अध्ययन तथा प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने पर विशेष ध्यान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विषय का गहन ज्ञान अर्जित कर स्वयं को कुशल एवं सक्षम बनाना चाहिए।
राजेश धर्माणी ने कहा कि जिला स्तरीय सीर उत्सव में संस्कृत विद्यार्थियों को मंत्रोच्चारण प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाएगा तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मंत्री से उनके जीवन, राजनीतिक सफर तथा संवाद कार्यक्रम प्रारंभ करने की प्रेरणा से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सहज एवं प्रेरणादायी ढंग से उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं तथा उनके माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
संवाद सत्र के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को आज से पांच वर्ष बाद अथवा दस वर्ष बाद स्वयं को किस स्थान पर देखना चाहते हैं विषय पर आगामी 25 सितंबर तक निबंध लिखने तथा सर्वश्रेष्ठ दस निबंधों का चयन कर उन्हें आगामी जिला स्तरीय सीर उत्सव में पुरस्कृत भी किया जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों को नशा मुक्त हिमाचल के तहत शपथ भी दिलाई।
इससे पूर्व महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप शर्मा ने मंत्री राजेश धर्माणी का स्वागत किया।
इस अवसर कॉलेज के अध्यापक भी उपस्थित रहे।

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तकनीकी शिक्षा मंत्री ने संस्कृत कॉलेज डंगार में ई-लर्निंग स्टेशन का किया शुभारंभ

घुमारवीं (बिलासपुर), 18 अगस्त: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, डंगार में ई-लर्निंग स्टेशन का शुभारंभ किया।

रोटरी इंटरनेशनल तथा रोटरी क्लब घुमारवीं के सौजन्य से लगभग 1.5 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस ई-लर्निंग स्टेशन में विद्यार्थियों को प्रोजेक्टर स्क्रीन तथा मल्टीमीडिया के साथ कंप्यूटर की सुविधा प्राप्त हुई है।

इस अवसर पर रोटरी क्लब घुमारवीं के संस्थापक अध्यक्ष अनिल शर्मा, वर्तमान अध्यक्ष देवराज चंदेल, सचिव शशि कांत शर्मा, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संदीप शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।