चंडीगढ़, 21.07.2026: राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-38 (पश्चिम), डीएमसी, चंडीगढ़ को प्रतिष्ठित फुलब्राइट प्रोग्राम – टीचर्स फॉर ग्लोबल क्लासरूम्स के अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी के लिए कठोर राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के बाद चुना गया है।
देशभर से केवल सात संस्थानों का चयन इस कार्यक्रम के लिए किया गया है। इनमें डीपीएस बेंगलुरु, कोटक महिंद्रा एजुकेशन फाउंडेशन (मुंबई), द सिंधिया स्कूल (ग्वालियर), सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल (तिरुवनंतपुरम), एससीईआरटी तेलंगाना, गवर्नमेंट हाई स्कूल (कोलकाता) तथा राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-38 (पश्चिम), डीएमसी, चंडीगढ़ शामिल हैं। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती नीरजा जैन के नेतृत्व में विद्यालय को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम में चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के तीन शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल 17 जुलाई 2026 को विद्यालय पहुंचा और 23 जुलाई 2026 तक यहां रहेगा। सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय और अमेरिकी शिक्षकों के बीच नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों, कक्षा-कक्ष रणनीतियों तथा वैश्विक शैक्षणिक दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान कर शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
अपने प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल विद्यालय में संचालित कौशल आधारित शिक्षा गतिविधियों जैसे ब्यूटी एंड वेलनेस, कला, कलमकारी, पिछवाई, मंडला आर्ट, मूर्तिकला तथा ब्लॉक प्रिंटिंग का अवलोकन कर रहा है। अमेरिकी शिक्षक चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों के 40 शिक्षकों के लिए एक क्षमता संवर्धन कार्यशाला भी आयोजित कर रहे हैं।
आज प्रतिनिधिमंडल ने श्री नितिश सिंगला, निदेशक स्कूल शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन से मुलाकात कर विचार-विमर्श किया। इसके उपरांत उन्हें विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) में भारतीय शिक्षा प्रणाली तथा चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों पर प्रस्तुतियां दी गईं। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों में संचालित कौशल आधारित पाठ्यक्रमों तथा राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-38 (पश्चिम), डीएमसी की अभिनव पहलों की सराहना की।
यह यात्रा भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के शिक्षकों के बीच श्रेष्ठ शैक्षणिक कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान, व्यावसायिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक समझ को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।