मैसूर: 12.05.26- कर्नाटक के मैसूर स्थित साईलेंट शोर्ज रिजॉर्ट में कर्नाटक विधान सभा द्वारा आयोजित राज्यों के पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक को सम्बोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा कि विधान मण्डलों के कार्य-संचालन तथा प्रक्रिया नियमों में राष्ट्र स्तर पर एक समानता लाने के लोक सभा के प्रयास सराहनीय है जिस से संसद तथा विधान मण्डलों में समानता आना राष्ट्र हित में होगा तथा राज्य तथा केन्द्र एक जैसी प्रणाली का अनुसरण करते नजर आएंगे। गौरतलब है कि लोक सभा द्वारा गठित 6 विधान मण्डलों की पीठासीन अधिकारियों की समिति के सभापति उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना बनाए गए हैं तथा उन्होने बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां, कर्नाटक विधान सभा अध्यक्ष यू0टी0 खादर फरीद, दिल्ली विधान सभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता तथा नागालैंड विधान सभा अध्यक्ष शेरिंगेन लोंगकुमेर बतौर सदस्य मौजूद थे जबकि महाराष्ट्र विधान सभा अध्यक्ष राहुल नारवेकर किन्ही अपरिहार्य कारणों से इस बैठक में शामिल नहीं हो सके। बैठक का शुभारम्भ माननीय सदस्यों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

इस अवसर पर सभापति सहित सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे तथा अपने- अपने विधान मण्डलों मे मौजूद नियमों, कार्य-संचालन और प्रक्रिया नियमों का तुलनात्मक विशेषण किया। अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान समिति अध्यक्ष सतीश महाना ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वह आज संसदीय प्रणाली के विशेषज्ञ के रूप में आज पूरे भारत में प्रसिद्व हैं। उनका संसदीय प्रणाली में ज्ञान बेहतरीन है जो सभी सदस्यों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष ने वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विधान सभा में प्रचलित कार्य-संचालन पद्वति तथा नियमावली का विस्तृत विवरण दिया। अपने सम्बोधन में जहाँ उन्होने प्रश्नकाल, शून्यकाल तथा विधान सभा की कार्यवाही के समय बारे विवरण दिया वहीं नियम 61, नियम 62, नियम 63, नियम 67, नियम 101, नियम 130 तथा नियम 324 पर विशेष टिप्पणी की। पठानियां ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा में नियमानुसार एक कैलेण्डर वर्ष में 35 बैठकें निर्धारित की गई हैं यदि किसी कारणवश यह बैठकें पूरी नहीं हो पाती हैं तब भी विधान सभा द्वारा नियम स्थगन का प्रस्ताव लाया जाता है तथा उन्होने इस अवसर पर सदन की कार्यवाही की कार्य उत्पादकता पर भी अपने विचार सांझा किए।

बैठक को सम्बोधित करते हुए पठानियां ने कहा कि कार्य-संचालन और प्रक्रिया नियम हर विधान सभा की रीढ़ होते है, यह नियम सदन के काम – काज को नियन्त्रित करते हैं, अनुशासन बनाए रखते हैं, लोकतान्त्रिक जिम्मेवारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में मदद करते हैं। भारत जैसे संसदीय लोकतन्त्र में अलग-अलग विधान सभाओं में अपने अलग-अलग नियम होते हैं, जो उनकी परम्पराओं, राजनीतिक प्रथाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं पर आधारित होते हैं। हालांकि एकरूपता की कमी अकसर विधायी कामकाज में विसंगति पैदा करती है। इसलिए हालांकि हाल के वर्ष में विधान सभा निकायों के लिए कार्य-संचालन और प्रक्रिया नियमों में एकसमानता मॉडल के विचार को महत्व मिला है।

नियमों की एकसमानता की जोरदार वकालत करते हुए पठानियां ने कहा कि एकसमान मॉडल विधायी कामकाज की कार्यक्षमता को भी बेहतर बना सकता है। कई विधान सभाओं को व्यवधानों, बार-बार स्थगन, अनुशासन की कमी और सदस्यों की कम उपस्थिती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मर्यादा, समय प्रबन्धन, बोलने की समय सीमा और अनुशासनात्मक उपायों से जुड़े स्पष्ट और साझा नियम विधान सभाओं को अधिक उत्पादक ढंग से काम करने में मदद कर सकते हैं। उन्होने कहा कि विधायी समय बहुत कीमती होता है और मनकीकृत प्रक्रियाएं अनावश्यक देरी और राजनीतिक गतिरोध को रोकने में सहायक हो जाती हैं इससे अव्यवस्थित आचरण के बजाए रचनात्मक बहसों को बढ़ावा मिलेगा। समिति प्रणाली जिसे अकसर “ लघु विधायिका” कहा जाता है भी एक समान प्रक्रियाओं के माध्यम से अधिक सशक्त बन सकती है।

अपने सम्बोधन के अन्त में पठानियां ने कहा कि विधान सभा निकायों के लिए कार्य-प्रणाली और कार्य- संचालन नियमों का एकसमान मॉडल भारत में लोकतान्त्रिक शासन को काफी मजबूत कर सकता है। यह एकरूपता, कार्यकुशलता, पारदर्शिता, नैतिक आचरण और बेहतर विधायी उत्पादकता सुनिश्चित कर सकता है। उन्होने कहा कि इक्कसवीं सदी के तेजी से बदलते राजनीतिक और तकनीकी माहौल में विधान सभाओं में नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को विकसित करना होगा जो एक संतुलित और सुविचारित समान प्रक्रियात्मक मॉडल अधिक मजबूत, जबावदेह और नागरिक- केन्द्रित लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन सकता है। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिव यशपाल शर्मा सहित सभी 6 विधान सभाओं के सचिव भी मौजूद थे।