*एलपीजी वितरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए आपसी समन्वय से कार्य करें- अपूर्व देवगन*
*• उपायुक्त ने की व्यवसायिक गैस वितरण पर गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता*
*मंडी, 23 मार्च।* व्यावसायिक रसोई गैस (एलपीजी) के वितरण को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गठित जिला स्तरीय कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन आज सोमवार को उपायुक्त कार्यालय के वीसी कक्ष में किया गया, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने की। इसमें एलपीजी सिलेण्डरों की आपूर्ति, वितरण प्रणाली में आ रही समस्याओं तथा उनके त्वरित समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिक्षण तथा स्वास्थ्य संस्थानों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं को समय पर सिलेण्डर उपलब्ध करवाने के लिए सभी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने कहा कि वितरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल बनाए रखें। उपभोक्ताओं की विभिन्न शिकायतों एवं समस्याओं के त्वरित एवं सर्वमान्य हल के लिए सभी पूरी जिम्मेवारी के साथ कार्य करें। उन्होंने उपभोक्ताओं का भी आह्वान किया कि वे आवश्यकता पड़ने पर ही गैस की बुकिंग करें। आम जनता से अपील की गई कि वे अनावश्यक पैनिक बुकिंग या गैस सिलेंडर का भंडारण न करें।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि एलपीजी के अनाधिकृत भंडारण या अधिक मूल्य लेने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए, जिला के विभिन्न स्थानों में छापेमारी की जा रही है। हाल ही में सरकाघाट में 13 तथा ढलवान में दो घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
बैठक का संचालन जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक बृजेंद्र पठानिया ने किया। उन्होंने बताया कि जिला में 24 गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को घरेलू और व्यावसायिक गैस उपलब्ध करवाई जा रही है।
बैठक में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक गौरव जौहर तथा भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एरिया मैनेजर नवीन कुमार ने बताया कि जिला में घरेलू रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। गैस एजेंसियों द्वारा निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी दीपाली शर्मा, जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा, उपनिदेशक उच्च शिक्षा यशवीर कुमार, प्रारंभिक शिक्षा हरि चंद, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंधक गौरव जौहर, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी पवन कुमार सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एरिया मैनेजर नवीन कुमार वीसी के माध्यम से जुड़े।
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अनुसूचित जाति युवाओं के लिए कृत्रिम मेधा व ऑफिस ऑटोमेशन का निःशुल्क प्रशिक्षण, 31 मार्च तक करें आवेदन*
*मंडी, 23 मार्च।* सरकार द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं के लिए कौशल विकास के नए अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट), शिमला के साथ समझौता कर दो महत्वपूर्ण प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
विभागीय प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि इन पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा ऑफिस ऑटोमेशन, अकाउंटिंग एवं पब्लिशिंग असिस्टेंट शामिल हैं, जिनका संचालन अप्रैल, 2026 से मंडी स्थित केंद्र में किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी अनुसूचित जाति वर्ग के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के अभ्यर्थी इन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन 10+2 कक्षा और स्नातक में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट के अनुसार किया जाएगा। इसमें बीपीएल वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखी गई हैं।
उन्होंने बताया कि इच्छुक अभ्यर्थी 31 मार्च, 2026 तक जिला कल्याण अधिकारी, मंडी अथवा संबंधित तहसील कल्याण कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को दो हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा, जो प्रशिक्षण पूर्ण होने पर सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। न्यूनतम 85 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत प्रदत इस प्रशिक्षण का मूल्यांकन नाइलिट केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा और सफल अभ्यर्थियों को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अभ्यर्थियों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने में भी सहायता दी जाएगी।
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*हैम रेडियो- आपातकालीन स्थितियों व आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संचार विषय पर कार्यशाला शुरू*
*मंडी, 23 मार्च।* हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के संयुक्त तत्वावधान में जल शक्ति विभाग के राज्य प्रशिक्षण केंद्र, मंडी में “हैम (HAM) रेडियो – आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संचार” विषय पर छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज से शुरू हुआ। शुभारंभ सत्र में उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष अपूर्व देवगन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
23 मार्च से 28 मार्च, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में स्रोत व्यक्ति के रूप में केंद्रीय संचार विभाग के सेवानिवृत्त डीडीजी वी.के. आर्य एवं दिल्ली हैम रेडियो संस्थान की सचिव कुसुम उपस्थित रहीं।
उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को हैम रेडियो में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हुए उनके परिचालन कौशल में निखार लाना और आपातकालीन संचार प्रणालियों को मज़बूत करना है। हैम रेडियो आपदाओं के दौरान पारंपरिक नेटवर्क के विफल होने पर एक विश्वसनीय वैकल्पिक संचार प्रणाली के रूप में कार्य करता है। आपातकालीन स्थिति एवं आपदाओं के दौरान संचार माध्यमों को सक्रिय रखना बड़ी चुनौती रहती है। विशेषतौर पर पारपंरिक संचार माध्यमों में व्यावधान इत्यादि की स्थिति में हैम रेडियो जैसे माध्यम सूचना सम्प्रेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंडी, लाहौल-स्पिति, बिलासपुर, कुल्लू और हमीरपुर इत्यादि जिलों से ज़िला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह रक्षक वाहिनी, अग्निशमन सेवाएँ, पुलिस (सीटीएस), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, जिला शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों, राजस्व विभाग, सामुदायिक रेडियो ऑपरेटर, डीआईएजी और आपदा मित्र स्वयं सेवकों सहित विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लगभग 70 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
प्रारंभिक सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण समन्वयक नरेंद्र कैथ भी उपस्थित रहे।
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स्टार्टअप इको सिस्टम पर कार्यशाला आयोजित, युवाओं ने प्रस्तुत किए नवाचार
मंडी, 23 मार्च। जिला उद्योग केंद्र मंडी में आज स्टार्टअप इको सिस्टम पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप के दृष्टिगत विभिन्न विभागों के समक्ष आ रही समस्याओं की पहचान कर उन्हें संकलित करना एवं उद्योग विभाग के माध्यम से उनका निराकरण करना रहा। साथ ही स्टार्टअप्स को अपने नवाचार प्रस्तुत करने तथा विभागों के साथ संभावित सहयोग के अवसर तलाशने के लिए मंच भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्टार्टअप्स ने अपने विचार प्रस्तुत किए। आईओटीएस द्वारा भूस्खलन निगरानी एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली पर प्रस्तुति दी गई, जिसे लूनर टेक्नोलॉजी एवं आईआईटी मद्रास के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली आसपास के लोगों एवं जिला आपदा प्रबंधन को समय रहते सचेत करने में सक्षम है। सुकेई फिल्म्ज़ ने वाहनों के लिए एक ओटीटी आधारित एप्लिकेशन प्रस्तुत की, जिसके माध्यम से यात्रियों को उनके आसपास के पर्यटन स्थलों एवं स्थानीय सामग्री की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
पीएमईजीपी के अंतर्गत सफल लाभार्थी कंचन शर्मा ने कीड़ा जड़ी (औषधीय उत्पाद) के उत्पादन में अपनी उद्यमिता यात्रा साझा की। बॉट डिजिट के प्रियंशु एवं प्रिक्षित भाटिया द्वारा वेब डिजाइनिंग सेवाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया, जबकि क्रिएटिव मैकेनिक्स के शिवांश गुलेरिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग के क्षेत्र में अपनी सेवाओं के बारे में जानकारी दी।
इस कार्यशाला में अग्रणी बैंक प्रबंधक व मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, सेरीकल्चर, हिमक्राफ्ट, बागवानी, पशुपालन, कृषि, खनन, नगर निगम सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ आईआईटी मंडी इन्क्यूबेशन सेंटर के स्टार्टअप्स तथा डीआईसी मंडी के अधिकारियों ने भाग लिया।