हिसार, 21.03.26-- प्रयाग गिरी शिवालय मंदिर ट्रस्ट में चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा जी के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-पाठ शिवालय ट्रस्ट के प्रधान बजरंग गर्ग ने की। जिसमें भारी संख्या में धर्म प्रेमियों ने भाग लिया। शिवालय ट्रस्ट के प्रधान बजरंग गर्ग ने कहा कि मां दुर्गा जी के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक है। माता के मस्तक पर चंद्र के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण होने चंद्रघंटा कहा जाता है। माता जी की आराधना से भक्तों में निर्भयता, बल और तेज का संचार होता है। माता अन्याय के विनाश और भक्तों के निर्भयता सुख शांति प्रदान करती है। बजरंग गर्ग ने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नाम के एक राक्षस ने देवराज इंद्र का सिंहासन हड़प लिया था। महिषासुर स्वर्गलोक पर राज करना चाहता था उनकी यह इच्छा जानकर देवता चिंतित हो गए। जिसके बाद वे अपनी इस परेशानी के लिए त्रिदेवी यानी ब्रह्म, विष्णु और शंकर भगवान के पास पहुंचे। तब माता पार्वती ने दुष्टों का सहारा के लिए यह रूप धारण किया और महिषासुर का वध करने के लिए माता ने दस भुजाओं वाला सिहवाहिनी स्वरूप लिया।
उसके बाद असुरों का नाश किया।इस अवसर पर ओमप्रकाश असीजा , रमेश पटवारी, जगत नारायण, सुरेंद्र सिंगला, नारायण दास बंसल, जय गोपाल गेरा,जगदीश असीजा, संजय वलेचा, प्रवीण कुकरेजा, जवाहर नारंग, सुनील शर्मा, प्रदीप रुपेला ,अमर वर्मा, उमेश गर्ग, ऋषि बब्बर,युवान वर्मा, श्रीमती अंगूरी देवी, अनीता गर्ग, चंद्रकांता, सुनीता देवी, कीर्ति सिंगला, रीटा रानी, ज्योति रानी, सरोज वर्मा, सीमा गोयल, मीनू शर्मा, आदि भक्त भारी संख्या में मौजूद रहे।