दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय थियेटर महोत्सव ‘भारंगम’ डीएलसीसुपवा में
- रोहतक में 9 से 12 फरवरी 2026 तक प्रस्तुति देंगी देश-विदेश की टीमें
- पोस्टर लॉन्चिंग के दौरान साझा की चार दिनी महोत्सव की जानकारी
ROHTAK,04 फरवरी 2026, दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव, भारत रंग महोत्सव (भारंगम) का 25वां संस्करण 9 से 12 फरवरी तक दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विज़ुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में कराया जाएगा। डीएलसीसुपवा स्थित एफटीवी विभाग के मिनी ऑडिटोरियम में चलने वाले इस महोत्सव में देश-विदेश की टीमें विभिन्न शैलियों और प्रदर्शन रूपों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशंसित रंगमंच प्रस्तुतियां देंगी। यह महोत्सव डीएलसीसुपवा के सहयोग से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) नई दिल्ली द्वारा कराया जा रहा है।
बुधवार को डीएलसीसुपवा के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से खचाखच भरे हाल में 25वें भारत रंग महोत्सव का पोस्टर लॉन्च किया गया। इस दौरान डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य, रजिस्ट्रार डॉ गुंजन मलिक मनोचा, ‘भारंगम’ के समन्वयक व एनएसडी से सीनियर एक्टिंग एक्सपर्ट प्रोफेसर सुमन वैद्य, एलपीएस बोसार्ड के एमडी राजेश जैन, डीएलसीसुपवा से महेश टीपी, केशव, डॉ अजय कौशिक आदि मौजूद रहे।
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने बताया कि 9 फरवरी को प्रज्ञा आर्ट्स थिएटर ग्रुप दिल्ली 'उम्मीद–मनुष्य जिंदा है' प्रस्तुत करेगा। इसके लेखक सच्चिदानंद जोशी व निर्देशक लक्ष्मी रावत हैं। 10 फरवरी को मंच रंगमंच अमृतसर, पंजाब 'संदल बार' का मंचन करेगा। इसके लेखक हरजीत सिंह व निर्देशक राहुल मालीवाल हैं। 11 फरवरी को केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, बठिंडा के प्रदर्शन और सुंदर कला विभाग द्वारा 'उमर का परवाना' की प्रस्तुति रहेगी। इसके लेखक विजयदान देथा व निर्देशक आदिश कुमार वर्मा हैं। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को अपूर्वा थिएटर ग्रुप श्रीलंका 'कोलंबा हाथे थोरना' प्रस्तुत करेगा, जिससे महोत्सव में अंतरराष्ट्रीय रंग जुड़ जाएगा। इसके लेखक और निर्देशक चामिका हाथ्लाबथ्थुवा रहेंगे।
हरियाणा में रंगमंच प्रेमियों को अपने संदेश में डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने कहा कि हाल ही के विकास ने रोहतक व हरियाणा के रंगमंच और सांस्कृतिक परिदृश्य को भारत के सांस्कृतिक सर्किट में एक विशेष स्थान दिया है। रोहतक में ‘भारंगम’ की मेजबानी करना भारत में कला रूप के व्यापक कल्याण के लिए एक सार्थक प्रयास है और शहर के लिए गर्व का क्षण है। डीएलसीसुपवा राज्य की कला और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इस महोत्सव के माध्यम से गुणवत्ता और समावेशी रंगमंच को बढ़ावा देने में सुपवा को साथ जोड़ने पर हम एनएसडी का आभार प्रकट करते हैं।
डॉ अमित आर्य ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सव ‘भारंगम’ ने देश भर में अपनी सांस्कृतिक छाप छोड़ी है। नागांव, रांची, रायपुर, गंगटोक, पारादीप, वाराणसी, बेंगलुरु, पटना, इटानगर, कोलकाता, इंफाल, साखालिन और दीमापुर में मंचन एक साथ आयोजित किए गए, जिससे थिएटर को विकेंद्रीकृत करके विश्व स्तरीय नाटकों को ज्यादा से ज्यादा कला प्रेमियों तक पहुंचाया गया। यह महोत्सव सभी राज्यों में 41 स्थानों पर मनाया जा रहा है, जिसमें हरियाणा से सिर्फ रोहतक का डीएलसीसुपवा शामिल है।
‘भारंगम’ के समन्वयक व एनएसडी से सीनियर एक्टिंग एक्सपर्ट प्रोफेसर सुमन वैद्य ने कहा कि 25वां भारत रंग महोत्सव, जिसे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा कराया जा रहा है, दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय नाट्य उत्सव है। 25वां संस्करण ‘भारंगम’ 27 जनवरी से 20 फरवरी तक 25 दिनों तक चलेगा, जिसमें 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रस्तुतियों का प्रदर्शन होगा, जिसमें कई अल्पप्रतिनिधित्व वाली भाषाएं भी शामिल हैं। यह महोत्सव राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रस्तुतियों का मिश्रण है, जिसमें 9 देशों व प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र की थिएटर समूहों की भागीदारी है।
प्रो सुमन वैद्य ने कहा कि भारत की रंगमंचीय विविधता का जश्न मनाते हुए ‘भारंगम’ में बच्चों के समूहों, आदिवासी समुदायों और वंचित वर्गों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जो एनएसडी की समावेशिता और रंगमंच के सार्वभौमिकरण की प्रतिबद्धता को साबित करता है।
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‘भारंगम’ के साथ चलेगा ‘सारंग’ महोत्सव
- चार दिन तक एफटीवी डिपार्टमेंट के कोर्टयार्ड में सजेगा मंच
रोहतक-04 फरवरी 2026, -दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विज़ुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में ‘भारंगम’ के साथ ही चार दिवसीय ‘सारंग’ महोत्सव भी चलेगा। ‘सारंग’ महोत्सव डीएलसीसुपवा का अपना आयोजन है, जिसका मंच अलग से एफटीवी डिपार्टमेंट के कोर्टयार्ड में सजेगा। इसका पोस्टर भी ‘भारंगम’ के साथ ही लॉन्च किया गया।
डीएलसीसुपवा के कुलगुरु डॉ अमित आर्य ने बताया कि ‘भारंगम’ में सिर्फ देश-विदेश की टीमों द्वारा नाटकों का मंचन किया जाएगा, जबकि सारंग कलात्मक अभिव्यक्तियों के इंद्रधनुष की भांति है, जहां विभिन्न कला रूप एक ही मंच पर नजर आएंगे। ‘सारंग’ महोत्सव रंगों, विचारों, आवाजों और परंपराओं के मेल का उत्सव है, जो कला के माध्यम से सौहार्द, रचनात्मकता और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देगा। विभिन्न रचनात्मक विधाओं को एक छत्र के नीचे लाकर ‘सारंग’ प्रदर्शनियों, संवादों, स्क्रीनिंग, कार्यशालाओं और दृश्य कथाकथन के लिए एक जीवंत स्थान है। चार दिनों तक यह महोत्सव कलाकारों, छात्रों, विद्वानों और दर्शकों के लिए एक गतिशील समागम स्थल के रूप में नजर आएगा।
डॉ आर्य ने कहा कि ‘सारंग’ के मंच पर कथक, ओडिसी, छऊ, सत्त्रिया, भांगड़ा भी नजर आएगा। लोक और पारंपरिक प्रदर्शन जैसे पेन नदाई कूथु (तमिल लोक रंगमंच) और असमिया लोक कला भी प्रसिद्ध टीमों द्वारा प्रदर्शित की जाएंगी। संगीतमय और काव्यात्मक कथाएं, कव्वाली और गजल, छात्र बैंड प्रदर्शन और समकालीन लाइव संगीत कार्यक्रम भी ‘सारंग’ के मंच पर नजर आएंगे। डॉ आर्य ने कहा कि निर्देशकों की बैठकें, मास्टर क्लासेस, विशेषज्ञ वार्ता और प्रख्यात रंगमंच और प्रदर्शन कला हस्तियों के साथ इंटरैक्टिव सेशन भी इसी मंच का हिस्सा होंगे।