धर्मशाला, 16 अक्तूबर: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयूजीकेवाई) के तहत ग्रामीण युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक अभाव के कारण तकनीकी शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण से वंचित रहने वाले युवाओं के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी है। उन्होंने परियोजना कार्यान्वयन समितियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ युवाओं को नियमित रोजगार उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट स्टेडियम, धर्मशाला में आयोजित डीडीयूजीकेवाई की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश सहित जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड तथा मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव सांझा करने तथा आपसी संवाद के माध्यम से योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपयोगी सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां विकास कार्यों एवं आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है और देश में पेपरलेस विधानसभा की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रदेश के युवाओं में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा एवं क्षमता के बल पर आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण के साथ युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना समय की आवश्यकता है।
ग्रामीण विकास मंत्री ने विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों का हिमाचल प्रदेश में स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिनिधियों से प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन करने तथा यहां के मनोरम पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने का भी आह्वान किया और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की नियमित जारी रखने का आग्रह किया।
इस अवसर पर निदेशक, कौशल, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार पवन कुमार व अवर सचिव घनश्याम मीणा, निदेशक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज राघव शर्मा, सीईओ एचपीएमआरएलएम सुरेन्द्र मोहन तथा डीडीओ ग्रामीण विकास, कांगड़ा अभिनीत कात्यायन ने भी अपने विचार रखे।