सरकार द्वारा किसानों पर आंसू गैस के गोले दागने व लाठीचार्ज करने से किसान व व्यापारियों में बड़ी भारी नाराजगी है - बजरंग गर्ग

सरकार को किसानों पर लाठी चार्ज करने की बजाय सरकारी धान की खरीद तुरंत प्रभाव से शुरू करनी चाहिए - बजरंग गर्ग

सरकार सरकारी खरीद करने की बजाय किसानों का उत्पीड़न करने में लगी हुई है - बजरंग गर्ग

केंद्र व प्रदेश सरकार किसान व आढ़तियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है - बजरंग गर्ग

सरकार द्वारा धान की खरीद ना करने पर किसान की धान खुले बाजार में 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल कम में बिक रही है - बजरंग गर्ग

सरकार को अपने वायदे के अनुसार अनाज की हर फसल एमएसपी पर खरीद करनी चाहिए - बजरंग गर्ग

अनाज की सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसान व आढ़तियों पर पड़ता है - बजरंग गर्ग

सरकार को अनाज खरीद, उठान, भंडारण तथा तुरंत भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए - बजरंग गर्ग

सरकार को किसान व आढ़तियों से टकराव करने की बजाय बातचीत करके धान व बाजरे की सरकारी खरीद तुरंत करनी चाहिए - बजरंग गर्ग

हिसार, 23.09.26- - हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व हरियाणा कान्फैड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग ने व्यापारियों से बातचीत करने के उपरांत कहा कि सरकार द्वारा किसानों पर आंसू गैस के गोले दागने व लाठीचार्ज करने से किसान व व्यापारियों में बड़ी भारी नाराजगी है। सरकार को किसानों पर लाठी चार्ज करने की बजाय सरकारी धान की खरीद तुरंत प्रभाव से शुरू करनी चाहिए। सरकार द्वारा धान व बाजरे की सरकारी खरीद करने की बजाय किसानों का उत्पीड़न करने में लगी हुई है जो उचित नहीं है। बजरंग गर्ग ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार किसान व आढ़तियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है। जबकि किसान का धान एमएसपी से लगभग 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल कम में बिक रहा है और इसी प्रकार किसान का बाजरा भी 900 से लेकर 1200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खुले बाजार में बिक रहा है। जिससे किसानों को बड़ा भारी नुकसान हो रहा है। बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार को अपने वायदे के अनुसार अनाज की हर फसल एमएसपी पर खरीद करनी चाहिए। अनाज की सरकारी खरीद में देरी का सीधा असर किसान व आढ़तियों पर पड़ता है। किसान को अपनी फसल रखने, परिवहन और भुगतान की समस्या का बोझ पड़ता है। सरकार को अनाज खरीद, उठान, भंडारण तथा तुरंत भुगतान की व्यवस्था करनी चाहिए। किसान की फसल का उठान में देरी होने से सरकारी एजेंसियों द्वारा नमी के नाम पर आढ़ती व किसानों के पैसे काट लेती है वह सरासर गलत है। नमी के नाम पर किसान व आढ़तियों के पैसे ना काटे जाएं। सरकार को किसान व आढ़तियों से टकराव करने की बजाय बातचीत करके धान व बाजरे की सरकारी खरीद तुरंत प्रभाव से आरंभ करनी चाहिए ताकि किसान व आढ़तियों का सरकार से तालमेल बना रहे।

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