* सरंगपुर बॉटनिकल गार्डन में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर यूटी-स्तरीय कार्यशाला आयोजित
* पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशों के अनुपालन में कार्यशाला
* महापौर हरप्रीत कौर बबला ने समन्वित, मानवीय एवं वैज्ञानिक समाधान पर बल दिया
* मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने वन आच्छादन में वृद्धि तथा एक दशक में 15,000 वन्यजीव रेस्क्यू का उल्लेख किया
* चंडीगढ़ में शहरी विकास और संरक्षण के संतुलन पर विशेष जोर
* जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों एवं गैर-सरकारी संगठनों ने शमन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया
* प्रमुख निष्कर्षों में हॉटस्पॉट की पहचान, क्षमता निर्माण एवं आवास सुधार शामिल

चंडीगढ़, 12 जनवरी, 2026:पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के निर्देशों के अनुपालन में, चंडीगढ़ प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा आज पर यूटी-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

यह कार्यशाला MoEF&CC की संसदीय परामर्शदात्री समिति की 18 दिसंबर, 2025 को माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसरण में आयोजित की गई। समिति ने यह निर्णय लिया था कि प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश में सभी हितधारकों एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से मानव–वन्यजीव संघर्ष पर कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँ।

माननीय सांसद, चंडीगढ़, श्री मनीष तिवारी, यद्यपि कार्यशाला में उपस्थित नहीं हो सके, तथापि उन्होंने अपने संदेश में इस बात पर बल दिया कि शमन रणनीतियाँ स्थानीय परिस्थितियों एवं स्थल-विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने दीर्घकालिक समाधान के लिए आवास सुधार एवं सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

चंडीगढ़ की माननीय महापौर, श्रीमती हरप्रीत कौर बबला, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मानव–वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक चुनौती के रूप में उभर रहा है, विशेषकर चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहर के लिए, जो सुखना वन्यजीव अभयारण्य एवं शिवालिक की तराइयों जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों से घिरा हुआ है। बंदरों, मोरों, नीलगाय तथा शहर की परिधि में कभी-कभार तेंदुए की आवाजाही से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने नगर निगम, वन एवं वन्यजीव विभाग, जिला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नियंत्रित शहरी विकास, प्रारंभिक चेतावनी एवं त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, जन-जागरूकता तथा समुदाय-आधारित, मानवीय एवं वैज्ञानिक समाधानों के महत्व को रेखांकित किया। महापौर ने कार्यशाला के आयोजन के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि चंडीगढ़ विकास और संरक्षण को साथ लेकर चलने वाला एक आदर्श शहर बन सकता है।

मुख्य भाषण देते हुए श्री सौरभ कुमार, मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने बताया कि वन एवं वन्यजीव विभाग वन परिदृश्यों एवं वन्यजीव आवासों में गुणात्मक एवं मात्रात्मक सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने भारत राज्य वन रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि चंडीगढ़ में वन एवं वृक्ष आच्छादन में वृद्धि हुई है। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि, भूमि उपयोग में परिवर्तन तथा वन्यजीव आवासों का विखंडन संघर्ष के मूल कारण हैं। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में चंडीगढ़ में 15,000 से अधिक वन्यजीव बचाव (रेस्क्यू) अभियान संचालित किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मानव–वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने हेतु उपायुक्त, यूटी, की अध्यक्षता में एक मुआवजा समिति कार्यरत है। विभाग द्वारा क्षमता निर्माण, वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना, संघर्ष हॉटस्पॉट की पहचान, प्रतिक्रिया समय में कमी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सामुदायिक जागरूकता तथा साझा जिम्मेदारी जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

श्री अमित कुमार, आयुक्त, नगर निगम चंडीगढ़ ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे शहर का विकास संरक्षण के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व, प्रकृति में संतुलन, खाद्य श्रृंखला के संरक्षण तथा सतत विकास के महत्व पर बल दिया।
पार्षद श्री सतिंदर सिंह सिद्धू एवं श्री गुरजीत संधू ने पटियाला की राव चोए तथा आसपास के क्षेत्रों के समुचित सीमांकन, तथा दीर्घकालिक पारिस्थितिक संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित वनों एवं इको-सेंसिटिव जोन के विकास का सुझाव दिया।
छत्तबीड़ चिड़ियाघर से विशेषज्ञ श्री हरपाल सिंह ने शहरी क्षेत्रों में बंदर समस्या एवं सांप दिखने की घटनाओं के प्रबंधन हेतु व्यावहारिक शमन उपाय एवं समाधान साझा किए।

कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्षों में मानव–वन्यजीव संघर्ष हॉटस्पॉट की पहचान, मानव व्यवहार संबंधी उपयुक्त जागरूकता, वन क्षेत्र के अग्रिम पंक्ति कर्मचारियों एवं संबंधित विभागों का प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, वन्यजीव बचाव अवसंरचना का आधुनिकीकरण, भोजन एवं जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु वन्यजीव आवासों में सुधार तथा संघर्ष की स्थितियों से निपटने के लिए अंतर-विभागीय टीम का गठन शामिल रहा।

कार्यशाला में श्री अनुप कुमार सोनी, मुख्य वन संरक्षक, चंडीगढ़; श्री नवनीत श्रीवास्तव, उप वन संरक्षक, चंडीगढ़; श्री नवीन रत्तू, एसडीएम; राजस्व, पुलिस, नगर निगम, पशुपालन, वन एवं वन्यजीव विभागों के अधिकारी; शिक्षाविद, शोधकर्ता; युवसत्ता, यूथ इनोवेटिव सोसाइटी, ग्लोबल यूथ फेडरेशन इंडिया, पर्यावरण सोसाइटी ऑफ इंडिया (श्री एन.के. झिंगन के नेतृत्व में) सहित प्रमुख गैर-सरकारी संगठनों; पार्षदों; रेजिडेंट वेलफेयर संगठनों; तितली विशेषज्ञों तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।