शिमला: 15.09.26- हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिहं पठानियां आज दक्षिण अफ्रीका की विधायी राजधानी केपटाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में शामिल हुए। गौरतलब है कि यह सम्मेलन 13 सितम्बर से 17 सितम्बर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का प्रमुख विषय “ बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना : राष्ट्रमण्डल नेतृत्व” तय किया गया है जिस पर गहन चर्चा के लिए अलग-अलग कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। इन कार्यशालाओं में छ: अलग-अलग विषयों पर मंथन किया जायेगा। ये विषय है:- "विविध अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी निष्पक्ष व्यापार के लिए अंतर –संसदीय बातचीत को बढावा देना, राष्ट्रमण्डल और उससे आगे असमानता और पिछड़ेपन को दूर करना ” यह मेजबान का विषय रहेगा। जबकि अन्य विषयो में “सुलभ संसद:दिव्यांग लोगो के लिए समावेशन , “जलवायु अनुकूलन और लचीलेपन को बढ़ावा देने में संसदीय नेतृत्व”, “संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: (कृत्रिम बुद्विमता) वंर्तमान उपयोग संभावनाएं और कार्यान्वयन रणनीतियां”, “मानवाधिकारों की रक्षा और शांति को बढावा देना: संसद की भूमिका” तथा “ कानून बनने के बाद समीक्षा: संसद को जनता से जोड़ना” शामिल है।

विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिहं पठानियां 16 सितम्बर को मुख्य वक्ता के रूप में “ कानून बनने के बाद समीक्षा : संसद को जनता से जोड़ना ” विषय पर अफ्रीकी संसद में अपना उदबोधन देंगे। इस कार्यशाला में अन्य प्रमुख वक्ता के रूप में अनके साथ उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना तथा हरियाण विधान सभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण भी उपस्थित रहेंगे तथा कार्यशाला को सम्बोधित करेंगे।

राष्ट्रमण्डल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने से पूर्व विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिहं पठानियां ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध ऐतिहासिक मित्रता, सांझा लोकतात्रिक मुल्यों,आर्थिक हितों तथा वैश्विक दक्षिण के प्रति समान प्रतिबद्धता पर आधारित एक व्यापक राजनैतिक साझेदारी का स्वरूप ले चुके है। यह संबंध केवल दो देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता, समानता, मानव गरिमा, लोकतंत्र और रंगभेद-विरोध के सांझा इतिहास से गहराई से जुड़े है। वर्तमान समय में दोनों देश राजनीति, व्यापार, संस्कृति, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी , स्वास्थ्य और पर्यावरण सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग कर रहे है भारत- दक्षिण अफ्रीका संबधो की यात्रा गांधी के सत्याग्रह से शुरू होकर मंडेला के रंगभेद- विरोधी संधर्ष, 1993 के राजनितिक संबंधो, 1997 की रणनीतिक साझेदारी और आज के ब्रिक्स, G20,व्यापार, रक्षा, विज्ञान, संस्कृति तथा पर्यावरण सहयोग तक पहुँच चुकी है। भारत रत्न से सम्मानित नेल्सन मंडेला की विरासत और दक्षिण अफ्रीका में गांधी की स्मृति इस साझेदारी की विशिष्ट नैतिक आधार प्रदान करती है। वही लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक वस्तु, लगभाग 17 लाख भारतीय मूल के लोगों की उपस्थिति,बढ़ता रक्षा सहयोग और वैश्विक दक्षिण के मुद्दो पर साझा द्दष्टिकोण इस संबंधं को 21वीं सदी में विशेष महत्व प्रदान करते है।

सम्मेलन में भाग लेने से पूर्व दक्षिण अफ्रीका गणयाज्य की संसद के प्रांगण में देश तथा विश्व के अन्य प्रतिनिधियों के साथ कुलदीप पठानियां एक सामूहिक चित्र में शामिल हुए। इस अवसर पर विदेश के विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारी भी मौजूद थे।