उपायुक्त मुकेश रेपसवाल की अध्यक्षता में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर न्यास की बैठक आयोजित

मंदिर के विकास, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
चंबा, 30 अक्तूबर-उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने कहा कि श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर चंबा लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है। मंदिर की विशिष्ट स्थापत्य कला, समृद्ध इतिहास एवं धार्मिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मंदिर के संरक्षण, विकास एवं बेहतर प्रबंधन के लिए न्यास के सभी सदस्यों को आपसी सहयोग एवं समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए।
उपायुक्त आज बचत भवन चंबा में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर न्यास के नवनियुक्त गैर-सरकारी सदस्यों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
उपायुक्त ने कहा कि चंबा शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में स्थित अन्य प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं बेहतर प्रबंधन की संभावनाएं भी तलाशी जानी चाहिए। जिन मंदिरों की अपनी प्रबंधन समितियां नहीं हैं, उन्हें श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर न्यास के साथ जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल किसी न्यास अथवा समिति की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे जिले एवं प्रदेश की साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं संवर्धन में जनभागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
बैठक के दौरान न्यास के नवनियुक्त गैर-सरकारी सदस्यों ने मंदिर के विकास, सौंदर्यीकरण, रखरखाव, धार्मिक गतिविधियों के विस्तार, दुकानों के मूल्यांकन तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। उपायुक्त ने सभी सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें चरणबद्ध तरीके से अमलीजामा पहनाने का आह्वान किया।
बैठक में मंदिर न्यास की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन एवं आय के स्रोतों को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि मंदिर न्यास की दुकानों के साथ-साथ न्यास की भूमि एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं का भी विस्तृत आकलन (असेसमेंट) सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जो संबंधित संपत्तियों का निरीक्षण कर उनका विस्तृत विवरण तैयार करेगी तथा आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करेगी। इसके अतिरिक्त न्यास की दुकानों, स्टोर, भूमि एवं अन्य अचल संपत्तियों से प्राप्त किराये और आय की समीक्षा करने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर में स्थित शौचालयों के निर्माण के अलावा अन्य महत्वपूर्ण कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के माध्यम से करवाये जायेंगे ताकि ऐतिहासिक मंदिर की मूल स्थापत्य शैली एवं विरासत को सुरक्षित रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा सके।
इसके अतिरिक्त मंदिर में कार्यरत बजंत्री का मासिक मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये करने तथा मंदिर परिसर में धाम एवं भंडारे के आयोजन के लिए निर्धारित शुल्क 7000 रुपये से बढ़ाकर 11000 रुपये करने का निर्णय लिया गया।
बैठक की कार्यवाही का संचालन एसडीएम चंबा चिराग शर्मा ने किया।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक बलदेव दत्त, जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा, अधिशासी अभियंता विद्युत बोर्ड हंसराज चौहान, तहसीलदार भूपेंद्र कश्यप, सहायक अभियंता दिनेश कुमार, कनिष्ठ अभियंता नीतिका ठाकुर तथा मंदिर न्यास के गैर-सरकारी सदस्य उपस्थित रहे।