बिलासपुर, 21 अक्तूबर: हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति की बैठक समिति के सभापति संजय रत्न की अध्यक्षता में आज बचत भवन बिलासपुर में आयोजित हुई। बैठक में समिति के सदस्य एवं विधायक डॉ. हंसराज, इंद्रदत्त लखनपाल, मलेंद्र राजन, कुलदीप राठौर और विवेक शर्मा उपस्थित रहे। उपायुक्त राहुल कुमार ने समिति का स्वागत किया।
बैठक में राज्य लेखा परीक्षा विभाग द्वारा विभिन्न विभागों से संबंधित अब तक के लंबित ऑडिट पैरों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों के आय-व्यय के अनुमानों तथा इस अवधि में करवाए गए विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। समिति ने पंचायती राज तथा शहरी विकास विभाग से संबंधित ऑडिट पैरों पर भी विस्तार से चर्चा की।
इस अवसर पर सभापति संजय रत्तन ने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की विभिन्न परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हों। उन्होंने कहा कि परियोजनाएं शहरी निकायों, पंचायती राज संस्थाओं या अन्य विभागों से संबंधित हों, सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण होने चाहिए। साथ ही कहा कि सरकारी धन का उचित एवं प्रभावी सदुपयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सरकारी धन के उपयोग का नियमित एवं उचित ऑडिट होना आवश्यक है। कई मामलों में वर्षों तक समिति को संबंधित विभागों से जवाब प्राप्त नहीं होते हैं, जिसके कारण ऑडिट पैरे लम्बे समय तक लंबित रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई अधिकारी स्थानांतरित हो जाते हैं या सेवानिवृत्त हो जाते हैं, लेकिन लंबित पैरों का निपटारा समयबद्ध नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा करना समिति की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सभापति संजय रत्तन ने कहा कि ऑडिट पैरों से संबंधित जवाब प्राप्त करने में अनावश्यक देरी होने के कारण लंबित मामलों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि कई बार फील्ड स्तर से जवाब मांगे जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई जाती, जिससे सचिवालय स्तर पर भी जवाब लंबित रहते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए समिति ने फील्ड में जाकर अधिकारियों से सीधे संवाद करने और लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति के समक्ष पूछे जाने वाले प्रश्नों के सही एवं तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत किए जाने चाहिए। जाएं। उन्होंने कहा कि गलत तथ्य प्रस्तुत करना सदन की अवमानना का मामला बन सकता है और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विशेषाधिकार के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
सभापति ने स्पष्ट किया कि जवाब देने के लिए निर्धारित समय का पालन करना आवश्यक है तथा इसके लिए समय सीमा तय की जा सकती है, लेकिन जवाब देने में वर्षों तक देरी स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह समिति के समक्ष मामलों की सही स्थिति प्रस्तुत करें, ताकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की सुविधा के लिए विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित करती हैं, जिन्हें आमजन तक पहुंचाने में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वह अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निर्वहन सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह कार्यालयीन कार्यों को केवल औपचारिकता न समझें बल्कि इसे अपना व्यक्तिगत दायित्व समझकर विकास कार्यों को गति दें।
बैठक में उपायुक्त राहुल कुमार, पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान, अतिरिक्त उपायुक्त रूपिंदर कौर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।