धर्मशाला, 12 अक्तूबर: भ्रूण की लिंग जांच और कन्या भू्रण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए जनभागीदारी सबसे अधिक जरूरी है। लिंग अनुपात में सुधार लाने और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में आमजन की महत्वपूर्ण भूमिका अहम है। सरकार, स्वास्थ्य विभाग और कानून के स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के साथ-साथ समाज का सहयोग भी बेहद आवश्यक है। यह बात जिला स्वास्थ्य अधिकारी विक्रम कटोच ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय धर्मशाला में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 के तहत गठित जिला सलाहकार समिति और जिला उपयुक्त प्राधिकरण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को समाप्त हुई दूसरी तिमाही के दौरान जिले में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत 19 निरीक्षण किए गए तथा तीन अल्ट्रासाउंड केंद्रों के नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके अतिरिक्त, जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 137 सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को भू्रण की लिंग जांच के दुष्परिणामों, कन्या भू्रण हत्या की रोकथाम और बेटियों के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।
बैठक में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से प्राप्त आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गई। अल्ट्रासाउंड केंद्रों से संबंधित अनुमोदन के लिए कुल नौ मामलों पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि पांच मामलों को पूर्वव्यापी (एक्स-पोस्ट फैक्टो) अनुमोदन प्रदान किया गया। अन्य मामलों में संबंधित संस्थानों को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।
विक्रम कटोच ने बैठक में विशेष रूप से राज्य की सीमाओं से सटे क्षेत्रों में संचालित केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी केंद्रों के लिए पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई आम नागरिक इस प्रकार के उल्लंघन की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करवाता है तो उन्हें उचित रूप से पुरस्कृत करने का भी सरकार द्वारा प्रावधान किया गया है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि भू्रण की लिंग जांच और कन्या भू्रण हत्या को रोकने के लिए सभी संबंधित संस्थानों को अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा। किसी भी स्तर पर नियमों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी संबंधित केंद्रों को ‘यहां भू्रण की लिंग जांच नहीं होती’ संबंधी सूचना-पट्ट स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले स्थान पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में डाॅ. अनुपमा, डाॅ. स्वाति, डाॅ. मनीषा, सुनीता कुमारी, इंदुबाला, कमलेश देवी, नीलम कुमारी और सहायक जिला न्यायवादी गौरव किशन सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।