डीसी गंधर्वा राठौड़ ने प्रगतिशील किसानों के साथ प्राकृतिक खेती पर की चर्चा
हरनेड़ के ललित कालिया ने 18 मरले खेत मेें बीजा गन्ना, करीब 70 किलोग्राम शक्कर निकली

हमीरपुर 20 अप्रैल। जिला हमीरपुर में कम वर्षा और पथरीली जमीन वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। आम तौर पर यह अविश्वसनीय प्रतीत हो सकता है, लेकिन विकास खंड बमसन के गांव हरनेड़ के प्रगतिशील किसान ललित कालिया ने इसे संभव करके दिखाया है। पूरी तरह प्राकृतिक खेती करने वाले ललित कालिया ने मात्र 18 मरले जमीन पर गन्ना लगाकर पहले ही सीजन में लगभग 70 किलोग्राम शक्कर तैयार की है।
प्राकृतिक खेती में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुके ललित कालिया, गांव चमनेड के किसान पवन कुमार तथा आतमा परियोजना के अधिकारियों ने उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ से भेंट करके उन्हें प्राकृतिक खेती के उत्साहजनक परिणामों से अवगत करवाया।
ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व प्राकृतिक खेती आरंभ की थी। आतमा परियोजना के अधिकारियों की प्रेरणा और प्रदेश सरकार के निरंतर प्रोत्साहन से अब गांव हरनेड़ के लगभग 52 परिवार पूरी तरह से प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। ये किसान परिवार गेहूं और मक्की के अलावा पारंपरिक मोटे अनाज, पारंपरिक दलहनी फसलें तथा अन्य फसलें प्राकृतिक विधि से ही उगा रहे हैं।
ललित कालिया ने बताया कि उनके दादा-परदादा कभी गन्ना भी लगाते थे और खाने में इसी की शक्कर का प्रयोग करते थे, लेकिन वर्तमान दौर में यहां गन्ने की खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। ललित कालिया ने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने अपने 18 मरले खेत में प्राकृतिक खेती से ही गन्ना लगाने का निर्णय लिया तो सभी लोग इसे असंभव ही बता रहे थे। देखते ही देखते गन्ने की फसल तैयार होने लगी और इसकी कटाई के बाद उन्होंने पेराई भी स्वयं करवाई तथा इससे लगभग 70 किलोग्राम शक्कर निकली।
ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत में एक बार भी सिंचाई नहीं की। जंगली सूअर ने आधी फसल उजाड़ दी थी। इसके बावजूद उन्हें अच्छी पैदावार हुई। अगले सीजन के लिए उन्हें दोबारा बिजाई की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि गन्ने का यह बीज 5-7 साल तक खेत में रह जाता है। इसलिए, गन्ने की खेती जिला हमीरपुर के किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ललित कालिया ने बताया कि वह भारत के प्राचीन पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। ये पारंपरिक किस्में काफी पौष्टिक होती हैं और मौसम की विपरीत परिस्थितियों को भी सहन करने में सक्षम होती हैं।
उपायुक्त से मिलने पहुंचे गांव चमनेड के पवन कुमार ने बताया कि वह प्राकृतिक खेती के साथ-साथ अपना पुश्तैनी घराट भी चला रहे हैं। इस घराट में वह रोजाना लगभग एक क्विंटल आटा पीसते हैं। घराट का पीसा हुआ आटा काफी गुणकारी होता है और बाजार में इसकी काफी डिमांड रहती है।
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प्राकृतिक खेती से उगाई फसलों और घराट के आटे की मार्केटिंग में करेंगे मदद: गंधर्वा राठौड़
ललित कालिया, पवन कुमार और आतमा परियोजना के अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा के दौरान उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से तैयार खाद्यान्नों और घराट के आटे की बेहतर मार्केंटिंग के लिए जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। इस अवसर पर आतमा परियोजना के परियोजना निदेशक राकेश धीमान और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
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नक्शे रेगुलराइज करवाने के लिए दें आखिरी मौका
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने जिला में टीसीपी एक्ट की अक्षरशः अनुपालना के दिए निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों में भी 1000 वर्गमीटर से अधिक प्लॉट पर निर्माण के लिए अनुमति अनिवार्य

हमीरपुर 20 अप्रैल। जिला में अवैध निर्माण कार्यों को नियंत्रित करने के लिए गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक सोमवार को उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ की अध्यक्षता आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। जिले की विभिन्न शहरी निकायों और विशेष योजना क्षेत्रों में अवैध निर्माण कार्यों पर कार्रवाई के संबंध में बैठक में व्यापक चर्चा की गई।
इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को जिला में नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के सभी प्रावधानों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्हांेने कहा कि नए भवनों को बिजली-पानी के कनेक्शन और अन्य सुविधाएं नगर एवं ग्राम नियोजन (टीसीपी) विभाग या शहरी निकायों की एनओसी के बाद ही जारी होने चाहिए। नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम के तहत अधिसूचित योजना क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों में किसी भी निर्माण कार्य के लिए टीसीपी विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। अब इन क्षेत्रों से बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 वर्गमीटर से अधिक के एरिया वाले प्लॉट पर निर्माण के लिए भी टीसीपी विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। इन क्षेत्रों में 1000 वर्गमीटर से अधिक जमीन की रजिस्ट्री के लिए भी एनओसी अनिवार्य है।
उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इस संशोधित नियम की जानकारी हर पंचायत तक पहुंचाने के लिए टीसीपी विभाग के अधिकारी सभी बीडीओ से समन्वय स्थापित करें। उन्होंने कहा कि शहरी और विशेष योजना क्षेत्रों में अनुमति के बगैर निर्माण कार्य कर चुके लोगों को अपने भवनों के नक्शे रेगुलराइज करवाने के लिए एक आखिरी मौका दें और इसके बाद भी कोई भवन मालिक नक्शे को रेगुलराइज नहीं करवाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें।
बैठक में टीसीपी विभाग के योजनाकार हरजिंद्र सिंह और सहायक योजनाकार मनीषा रांगड़ा ने जिला के विशेष क्षेत्रों और अधिसूचित योजना क्षेत्रों के बारे में विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया तथा टीसीपी एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी।
इस अवसर पर एएसपी राजेश कुमार, नगर निगम के आयुक्त राकेश शर्मा, एसडीएम हमीरपुर संजीत सिंह, एसडीएम बड़सर स्वाति डोगरा और विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे।

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हमीरपुर में पशु मित्र भर्ती का ग्राउंड टेस्ट 27 को

हमीरपुर 20 अप्रैल। उपमंडल हमीरपुर के विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में भरे जाने वाले पशु मित्र के पदों के आवेदकों का ग्राउंड टेस्ट 27 अप्रैल को सुबह साढे आठ बजे अणु के सिंथेटिक ट्रैक ग्राउंड में होगा।
एसडीएम हमीरपुर संजीत सिंह ने बताया कि पशु मित्र भर्ती की प्रक्रिया को पूर्ण करवाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। एसडीएम हमीरपुर की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में हमीरपुर के वरिष्ठ पशुपालन अधिकारी और टौणी देवी के पशुपालन अधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

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टीजीटी नॉन मेडिकल का फाइनल परिणाम घोषित, 333 उम्मीदवारों का चयन

हमीरपुर 20 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने प्रारंभिक शिक्षा विभाग में टीजीटी (नॉन मेडिकल) के पदों को भरने के लिए पोस्ट कोड-25002 के तहत आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है।
आयोग के सचिव डॉ. विक्रम महाजन ने बताया कि इन पदों के लिए कुल 15,983 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें से 14,380 उम्मीदवारों ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा दी थी और इस परीक्षा में 999 उम्मीदवारों का चयन दस्तावेजों की जांच के लिए किया गया था। 16 मार्च से एक अप्रैल तक दस्तावेजों की जांच के बाद 333 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। पात्र उम्मीदवार न मिलने के कारण ओबीसी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) के 6 और एससी (स्वतंत्रता सेनानी परिजन) के 4 पद खाली रह गए हैं। सचिव ने बताया कि यह अंतिम परिणाम सभी उम्मीदवारों के नाम, रोल नंबर और अंकों सहित आयोग की वेबसाइट एचपीआरसीए.एचपी.जीओवी.इन hprca.hp.gov.in पर उपलब्ध करवा दिया गया है।
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केसों के त्वरित निपटारे के लिए 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत
हमीरपुर, बड़सर और नादौन के न्यायिक परिसरों में निपटारे के लिए करें आवेदन

हमीरपुर 20 अप्रैल। अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 9 मई को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर हमीरपुर और उपमंडल स्तर के न्यायिक परिसरों नादौन तथा बड़सर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न मामलों का निपटारा समझौते के आधार पर किया जाएगा। इस दौरान आपराधिक कंपाउंडेबल अपराध, एन. आई. एक्ट के मामले, धन वसूली के मामले और भूमि विवाद आदि पर सुनवाई करके निपटारा किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सड़क दुर्घटना क्लेम के मामले, मोटर व्हीकल अधिनियम, श्रम विवाद के मामले, बिजली, पानी और टेलीफोन के बिल, वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण के मामले, वेतन और भत्तों और सेवानिवृत्ति से संबधित मामलों का भी निपटारा होगा।
कुलदीप शर्मा ने बताया कि लोक अदालत में उन मामलों का निपटारा भी करवाया जा सकता है जो अभी तक न्यायालय में दायर नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि अपने मामलों का निपटारा करवाने के इच्छुक लोग जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण कार्यालय हमीरपुर या संबंधित न्यायालय में सादे कागज पर आवेदन कर सकते हैं। लोक अदालत से पहले प्री-लोक अदालत सीटिंग में भी इन मामलों का निपटारा आपसी सहमति के आधार पर करवाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए दूरभाष नंबर 01972-224399 पर संपर्क किया जा सकता है।