साइबर सुरक्षा और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को लेकर बहु-हितधारक परामर्श बैठक आयोजित
बिलासपुर, 06 मार्च: जिला प्रशासन तथा इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला बिलासपुर द्वारा प्रस्तावित साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से एक बहु-हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, बाल संरक्षण तंत्र, विद्यार्थियों, विद्यालयों के प्रतिनिधियों, अभिभावकों, नागरिक समाज संगठनों तथा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों सहित कुल 23 प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
उपायुक्त एवं अध्यक्ष इंडियन रेडक्राॅस सोसाइटी बिलासपुर राहुल कुमार ने कहा कि किशोरों की डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किशोरों के लिए साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश एवं मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) विकसित करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने इस प्रक्रिया में तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाले मातृसुधा तथा इंडिपेंडेंट थॉट नई दिल्ली की सराहना की।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर विभिन्न हितधारकों से संवाद के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली तकनीकों को ध्यान में रखते हुए भी दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए। इस संदर्भ में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मंडी, राष्टीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर तथा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ऊना जैसे तकनीकी संस्थानों से भी सुझाव लेने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले दस वर्षों में विकसित होने वाली नई तकनीकों और उनके संभावित दुष्प्रभावों को भी इन दिशानिर्देशों में शामिल किया जा सके ताकि किशोरों का भविष्य सुरक्षित और सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
अतिरिक्त उपायुक्त एवं साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष ओम कांत ठाकुर ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल न केवल जिला बिलासपुर के किशोरों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी एक मॉडल पहल के रूप में सामने आ सकती है। डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल उपयोग को बढ़ावा देगा।
उन्होंने बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार किए जा रहे दिशानिर्देशों और एसओपी में विद्यालयों, अभिभावकों, पुलिस प्रशासन तथा अन्य संबंधित संस्थाओं की स्पष्ट भूमिकाएं और जिम्मेदारियां निर्धारित की जाएंगी, ताकि किशोरों को सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
परामर्श बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने किशोरों के सामने उभर रही डिजिटल चुनौतियों जैसे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, फर्जी प्रोफाइल, साइबर धोखाधड़ी तथा असुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
इस परामर्श बैठक में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा नरेश चंदेल, सचिव रेड क्रॉस शाखा बिलासपुर अमित कुमार, जिला लोक संपर्क अधिकारी राजेश जसवाल, निदेशक मातृसुधा अरविंद सिंह, निदेशक इंडिपेंडेंट थॉट डाॅ. विक्रम श्रीवास्तव, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डाॅ. ज्योति गौतम, अध्यक्ष, मानव सेवा ट्रस्ट सुंदरनगर प्रकाश बंसल, एएसआई, साइबर सेल अश्वनी कुमार, सहायक प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर अंकित चंदेल, प्रतिनिधि यूको एलडीएम विजय कुमार धीमान, पीटीए प्रधान नेम मोहम्मद, स्कूल प्राध्यापक अनिल कुमार, स्कूल प्रधानाचार्य प्रिया पोसवाल, वीना देवी, पुष्पा देवी, विनोद कुमार, ठाकुर दास, सुनील ठाकुर, मन्सा राम, रेडक्राॅस स्वयंसेवक जगमोहन नेगी, विद्यार्थी शिवांश शर्मा, दीपशिखा, पिं्रस चंदेल, सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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बिलासपुर में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
मोटर वाहन चालानों सहित विभिन्न मामलों का होगा आपसी समझौते से त्वरित निपटारा
बिलासपुर, 06 मार्च: जिला बिलासपुर के विभिन्न न्यायालय परिसरों में 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी प्रतीक गुप्ता, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर ने दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर बिलासपुर, घुमारवीं तथा झंडुता न्यायालय परिसर में किया जाएगा। इस लोक अदालत के माध्यम से पूर्व मुकदमेबाजी के मामलों के साथ-साथ न्यायालयों में लंबित वादों का भी आपसी समझौते के आधार पर त्वरित एवं सरल निपटारा किया जाएगा। लोक अदालत में बैंक से संबंधित विवाद, श्रम विवाद, बिजली एवं पानी के बिलों से जुड़े मामले, वैवाहिक विवाद सहित अन्य सुलह योग्य मामलों को लिया जाएगा। जिन व्यक्तियों के उपरोक्त श्रेणियों में मामले न्यायालयों में लंबित हैं, वे अपने प्रकरण को लोक अदालत में सूचीबद्ध करवा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, जिन व्यक्तियों का मामला वर्तमान में किसी न्यायालय में विचाराधीन नहीं है, यदि वे आपसी सहमति के आधार पर अपने विवाद का समाधान लोक अदालत के माध्यम से कराना चाहते हैं, तो वे भी निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं और शीघ्र निर्णय प्राप्त कर सकते हैं।
मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत चालानों से संबंधित मामलों के निपटारे की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ऐसे मामलों को ऑनलाइन माध्यम से ई-पे के जरिए अथवा न्यायालय में उपस्थित होकर लोक अदालत से पूर्व भी निपटाया जा सकता है, जिससे नागरिकों को समय और संसाधनों की बचत होगी।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की निःशुल्क कानूनी सहायता या परामर्श के लिए नागरिक टोल फ्री नंबर 15100 (हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, शिमला), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-221452, उपमंडलीय विधिक सेवा समिति बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-224887 तथा उपमंडलीय विधिक सेवा समिति घुमारवीं के दूरभाष नंबर 01978-254080 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, अपनी समस्या ईमेल के माध्यम से Secy-dlsa-bil-hp@gov.in पर भी भेजी जा सकती है।
ऑनलाइन आवेदन की सुविधा के लिए इच्छुक व्यक्ति राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर भी आवेदन कर सकते हैं। राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-221452 पर संपर्क किया जा सकता है अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से भी आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।