मंडी-भराड़ी में विकसित होगा स्काई वॉक ग्लास ब्रिज, साहसिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
उपायुक्त राहुल कुमार ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित परियोजना स्थल का किया निरीक्षण
कहा..... स्काई वॉक ग्लास ब्रिज की तकनीकी व्यवहार्यता और टेंडर प्रक्रिया जल्द होगी पूरी

बिलासपुर, 16 सितंबर: जिला प्रशासन बिलासपुर ने पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग (फोरलेन) पर मंडी-भराड़ी में अत्याधुनिक स्काई वॉक (ग्लास बॉटम ब्रिज) सहित विभिन्न साहसिक पर्यटन सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। उपायुक्त राहुल कुमार ने आज विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मंडी-भराड़ी का दौरा कर प्रस्तावित परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एसडीएम बिलासपुर राज कुमार, जिला पर्यटन एवं विकास अधिकारी रजनीश शर्मा, तहसीलदार बाल कृष्ण, बीडीओ सदर सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के तहत मंडी-भराड़ी में स्थित मौजूदा भारी-भरकम क्रेन संरचना के ऊपर पर्यटकों एवं पैदल यात्रियों के लिए आकर्षक स्काई वॉक ग्लास ब्रिज विकसित किया जाएगा। क्रेन संरचना की सुरक्षा एवं तकनीकी उपयुक्तता की जांच राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), हमीरपुर की विशेषज्ञ टीम से करवाई गई है। तकनीकी जांच के उपरांत संरचना को सुरक्षित एवं प्रस्तावित परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया है।
उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत गोविंद सागर जलाशय के ऊपर आधुनिक 3 एस केबल कार विकसित करने का भी प्रस्ताव है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के पुल एवं प्रस्तावित प्लेटफॉर्म के बीच पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके अतिरिक्त गोबिंद सागर जलाशय के आर-पार जिप लाइन/रिवर क्रॉसिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को विकसित करने तथा क्रेन के ड्राइवर केबिन क्षेत्र में पर्यटकों के लिए फ्लोटिंग रेस्टोरेंट संचालित करने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागादारी (पीपीपी मॉडल) के तहत डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) के आधार पर विकसित करने के लिए ई-निविदाएं/आरएफपी आमंत्रित की जा रही हैं।
राहुल कुमार ने कहा कि प्रस्तावित ग्लास ब्रिज तथा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट मंडी-भराड़ी में एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में विकसित होगा। इससे गोबिंद सागर जलाशय में वाटर स्पोर्ट्स के लिए आने वाले पर्यटकों को एक नया अनुभव मिलेगा और क्षेत्र की पर्यटन गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा। ग्लास ब्रिज के माध्यम से पर्यटक जलाशय के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे, जबकि फ्लोटिंग रेस्टोरेंट एक अतिरिक्त आकर्षण के रूप में विकसित होगा।
उपायुक्त ने कहा कि जिला बिलासपुर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और प्रशासन का प्रयास है कि उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यटन गतिविधियों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि मंडी-भराड़ी में इस परियोजना के साकार होने से स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ेंगे तथा जिले में पर्यटकों की आवाजाही को भी बल मिलेगा।

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आवश्यक वस्तुओं पर अधिकतम लाभ मार्जिन निर्धारित, जिला दंडाधिकारी ने जारी की अधिसूचना
थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के लिए अलग-अलग लाभ सीमा तय, उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर वस्तुएं उपलब्ध करवाने के निर्देश

बिलासपुर, 16 सितम्बर: जिला दंडाधिकारी बिलासपुर राहुल कुमार ने ‘हिमाचल प्रदेश जमाखोरी और मुनाफाखोरी निवारण आदेश, 1977’ के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला बिलासपुर में आवश्यक वस्तुओं के लिए अधिकतम लाभ मार्जिन निर्धारित करने संबंधी अधिसूचना जारी की है। इस आदेश के तहत थोक एवं खुदरा विक्रेताओं द्वारा अर्जित किए जाने वाले अधिकतम लाभ की सीमाएं निर्धारित की गई हैं, ताकि उपभोक्ताओं को वस्तुएं उचित दरों पर उपलब्ध हो सकें तथा अनावश्यक मुनाफाखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
अधिसूचना के अनुसार खाद्यान्न (गेहूं, चना, जौ एवं चावल), गुड़, शक्कर, खांडसारी, चीनी, दालें, कागज, मोटे ऊनी कपड़े तथा चाय पत्ती पर थोक बिक्री में अधिकतम 2.5 प्रतिशत तथा खुदरा बिक्री में अधिकतम 5.5 प्रतिशत लाभ मार्जिन निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार कॉपियों एवं अभ्यास पुस्तिकाओं पर थोक मार्जिन 4 प्रतिशत तथा खुदरा मार्जिन 7.5 प्रतिशत, अंडों पर थोक मार्जिन 5 प्रतिशत तथा खुदरा मार्जिन 7.5 प्रतिशत और ब्रेड पर थोक मार्जिन 7.5 प्रतिशत तथा खुदरा मार्जिन 8.5 प्रतिशत अथवा अंकित मूल्य, जो भी लागू हो, निर्धारित किया गया है।
फल एवं जल्द खराब न होने वाली सब्जियों, जिनमें प्याज, आलू, लहसुन, अदरक, अरबी एवं जिमीकंद शामिल हैं, के लिए थोक विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इसमें लागू होने पर 1 प्रतिशत बाजार शुल्क भी शामिल होगा। खुदरा विक्रेताओं के लिए इन वस्तुओं पर भाड़ा, लोडिंग-अनलोडिंग एवं नुकसान सहित 24 प्रतिशत लाभ मार्जिन निर्धारित किया गया है। अन्य जल्द खराब होने वाली सब्जियों के लिए खुदरा लाभ मार्जिन 39 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त एलपीजी, केरोसिन, मांस/चिकन/मछली, दूध, दही, पनीर और पके हुए भोजन की दरें जिला मजिस्ट्रेट द्वारा समय-समय पर निर्धारित दरों के अनुसार ही वसूल की जाएंगी।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि थोक एवं खुदरा दोनों प्रकार के व्यवसाय में संलग्न व्यापारी एक ही वस्तु पर केवल एक ही स्थान एवं एक ही स्तर पर निर्धारित लाभ मार्जिन वसूल कर सकेंगे। सचिव एपीएमसी ‘फॉर्म-आर’ तथा ‘फॉर्म-क्यू’ भी जारी करवाना सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त, सभी खुदरा विक्रेताओं को अपने व्यावसायिक परिसर में मूल्य सूची इस प्रकार प्रदर्शित करनी होगी कि ग्राहक उसे आसानी से देख सकें।
जिला दंडाधिकारी ने जिला बिलासपुर के सभी उपमंडल अधिकारियों (एसडीएम), उप-पुलिस अधीक्षकों, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निरीक्षकों तथा एपीएमसी सचिव को अधिसूचना के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।