प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना के तहत दो परियोजनाओं को मंजूरी
जिला बिलासपुर में अब तक 11 परियोजनाएं स्वीकृत, 60 परियोजनाओं का लक्ष्य
बिलासपुर, 26 अगस्त: बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने तथा स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना के तहत जिला स्तरीय समिति की बैठक आज बचत भवन में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में योजना के अंतर्गत प्राप्त परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा के बाद समिति ने राकेश कुमार धीमान की दुग्ध आधारित उत्पाद निर्माण परियोजना तथा सविता देवी की मसाला आधारित परियोजना को मंजूरी प्रदान की। दोनों लाभार्थियों को योजना के तहत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक, अधिकतम 10 लाख रुपये प्रति इकाई पूंजीगत अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। इन दो परियोजनाओं की स्वीकृति के साथ जिला बिलासपुर में अब तक योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या 11 हो गई है।
उन्होंने बताया कि इन दो परियोजनाओं से पूर्व जिले में 9 लाभार्थियों की परियोजनाओं को इस योजना के तहत स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें लहसुन आधारित उत्पाद, दूध आधारित उत्पाद, बेकरी उत्पाद, अदरक एवं लहसुन आधारित उत्पाद, पशु आहार तथा दाल आधारित उत्पादों से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा जिला बिलासपुर के लिए योजना के तहत 60 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उपायुक्त राहुल कुमार ने जिले के सभी बैंकों की शाखाओं को योजना के तहत कम से कम एक-एक परियोजना को स्वीकृति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने तथा स्वरोजगार से जुड़े ऐसे प्रकरणों में आवश्यक सहयोग प्रदान करने को कहा।
जिला महाप्रबंधक उद्योग मनोज कुमार ने बताया कि योजना के तहत नए सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के साथ-साथ पहले से संचालित इकाइयों के उन्नयन के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। लाभार्थी का न्यूनतम अंशदान 10 प्रतिशत होता है, जबकि शेष राशि बैंक ऋण के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाती है। योजना का उद्देश्य स्थानीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन कर रोजगार और आय के नए अवसर सृजित करना है।
इच्छुक लाभार्थियों को योजना के तहत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, बैंक ऋण से जोड़ने, प्रशिक्षण तथा अन्य आवश्यक मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं प्रशासन द्वारा निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। योजना का लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति अधिक जानकारी एवं आवेदन संबंधी सहायता के लिए महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर के दूरभाष नंबर 01978-224248 अथवा जिला संसाधन व्यक्ति राकेश कुमार के मोबाइल नंबर 9882145591 पर संपर्क कर सकते हैं। इच्छुक आवेदक पोर्टल माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
योजना के अंतर्गत पात्र उद्योगों की सूची
योजना के तहत पापड़, चिप्स, विभिन्न प्रकार के नमकीन एवं स्नैक्स, मसाला, मिर्ची एवं हल्दी पाउडर, लहसुन एवं अदरक प्रसंस्करण, अचार, चटनी एवं केचप, जैम एवं जेली, फलों के जूस, दूध एवं दूध से बने उत्पाद, पनीर एवं घी, दाल एवं आटा प्रसंस्करण, बेकरी, ब्रेड, बिस्कुट एवं केक, नूडल्स, पास्ता एवं सेवई, मिठाई, मशरूम, मखाना, खाद्य तेल, पशु आहार एवं मुर्गी आहार, मछली आहार, सेब की ग्रेडिंग एवं प्रसंस्करण, गुड़, चना तथा अन्य कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण सहित विभिन्न सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शामिल हैं।
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विद्यालयों तक पहुंचे नवाचारी शिक्षण के तरीके, उपायुक्त ने किया डाइट जुखाला का निरीक्षण
बिलासपुर, 26 अगस्त 2026। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने आज जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) जुखाला का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में विज्ञान, तकनीक, नवाचार एवं शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया।
उपायुक्त ने विद्यार्थियों के लिए विज्ञान विषय को रुचिकर, व्यावहारिक एवं अनुभव आधारित बनाने के लिए डाइट द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों तक नवाचारी शिक्षण विधियों को पहुंचाना विद्यार्थियों में जिज्ञासा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, गतिविधियों, तकनीक एवं अनुभव आधारित सीखने के अवसर उपलब्ध करवाए जाने चाहिए। उन्होंने डाइट के माध्यम से विकसित की जा रही नवाचारी शिक्षण विधियों एवं गतिविधियों को अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने डाइट के प्रशिक्षुओं से संवाद कर उनके प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक अनुभवों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करवाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, समस्याओं के समाधान खोजने तथा नई चीजें सीखने की जिज्ञासा विकसित करना भी है। उन्होंने भावी शिक्षकों को संस्थान में सीखी जा रही नवाचारी एवं अनुभवात्मक शिक्षण विधियों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित किया।
उपायुक्त ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए डाइट द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान एवं तकनीक आधारित गतिविधियों को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने से विद्यार्थियों की सीखने में रुचि, रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक सोच को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों एवं प्रशिक्षुओं को नवाचारी शिक्षण के इन प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर संस्थान के प्रधानाचार्य रमेश मनकोटिया ने उपायुक्त को अवगत करवाया कि पिछले वर्ष प्रदेश के विभिन्न जिलों से करीब 1,200 विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बिलासपुर की रोबोटिक्स एवं ड्रोन प्रयोगशाला, विज्ञान केंद्र तथा आभासी वास्तविकता प्रयोगशाला का भ्रमण किया।
इस अवसर पर जिला उपनिदेशक एवं जिला परियोजना अधिकारी निशा गुप्ता, मीडिया समन्वयक विजय शर्मा, शजुनैद खान, अतुल शर्मा, नरेश चंद, चंद्रकांत भारद्वाज, डॉ. नीलम, श्रीमती रीता कुमारी, सतीश कुमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।