चण्डीगढ़, 12.03.26- : सनातन धर्म में खरमास का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। यह एक ऐसी अवधि होती है जिसे परंपरागत रूप से अशुभ समय माना जाता है, लेकिन इस बार खरमास में ही चैत्र नवरात्र भी पड़ेंगे तो इसलिए इस दौरान शुभ कार्य किए जा सकेंगे। ये कहना है क्षेत्र की जानी मानी ज्योतिषाचार्य पूनम शर्मा का। ज्योतिष प्रांगण, चण्डीगढ की संस्थापक अध्यक्ष पूनम शर्मा ने कहा कि वैसे तो खरमास के दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, परन्तु इस बीच में आने वाले नवरात्रों में मांगलिक कार्य वर्जित नहीं होंगे।
पूनम शर्मा के अनुसार सूर्य देव 14 व 15 मार्च की मध्यरात्रि को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा। खरमास की समाप्ति 14 अप्रैल को होगी।