रूपनगर, 26.10.26- : महिला समन्वय, रूपनगर के तत्वावधान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रोपड़ में महिला सशक्तिकरण विषय पर एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय इतिहास की महान वीरांगना रानी अब्बक्का चौटा के जीवन, अदम्य साहस, त्याग, संघर्ष तथा मातृभूमि और अपने लोगों के प्रति उनके समर्पण से वर्तमान पीढ़ी को परिचित कराना और उनके आदर्शों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश देना रहा।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती तमन्ना, प्रांत सह-संयोजिका, महिला समन्वय रहीं। उन्होंने वीरांगना रानी अब्बक्का चौटा के ऐतिहासिक जीवन और संघर्ष का उल्लेख करते हुए उनके साहस, स्वाभिमान, राष्ट्रनिष्ठा तथा बलिदान को महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने भारतीय इतिहास की वीरांगनाओं के आदर्शों से प्रेरणा लेने और वर्तमान समय में महिलाओं की सामाजिक सहभागिता एवं नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बी.के. अंजनी को भी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया।
प्रो. राजीव आहूजा ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व क्षमता तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

इस अवसर पर रूपनगर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आईं प्रतिष्ठित महिला चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, शिक्षिकाओं, प्राध्यापिकाओं तथा अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़ी प्रबुद्ध महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से महिलाओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया। इस आयोजन में महिलाओं के अनुभवों, विचारों और सामाजिक योगदान को महत्व देते हुए महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर सार्थक संवाद का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्रीमती अराधना शर्मा जी जिला संयोजिका, महिला समन्वय रूपनगर, टोली सदस्य श्रीमती भारती जी, नीरज मोरया, दीपिका ढल व महिला समन्वय विभाग की सभी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों से कार्यक्रम की व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रहीं और आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

महिला समन्वय, रूपनगर की यह पहल भारतीय इतिहास की गौरवशाली विरासत को वर्तमान सामाजिक संदर्भ से जोड़ने तथा महिलाओं में आत्मविश्वास, स्वाभिमान, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रही।