आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत चम्बा में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर

चम्बा, 18 सितंबर-उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल की अध्यक्षता में आज जिला में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को लेकर स्वास्थ्य एवं योजना विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में आकांक्षी जिला कार्यक्रम के अंतर्गत जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद, आवश्यक सुविधाओं के विस्तार तथा स्वास्थ्य सेवाओं में गुणात्मक सुधार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यकताओं, उपकरणों की उपलब्धता तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किए जाने वाले कार्यों की भी समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आधुनिक स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद सहित प्रस्तावित कार्यों से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूर्ण की जाएं ताकि निर्धारित प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके और इसका लाभ आमजन को शीघ्र मिल सके। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने पर भी बल दिया।
बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कविता महाजन, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ. पंकज गुप्ता तथा जिला योजना अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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प्रदेश सरकार द्वारा 8000 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य की बदौलत जौ की खेती पांगी घाटी के किसानों की पहली पसंद,
घाटी के 152 किसानों ने 362 क्विंटल जौ को सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए कृषि विभाग के पास किया पंजीकृत,
वर्ष 2025 में घाटी के 34 किसानों ने बेची 99.74 क्विंटल प्राकृतिक जौ की पैदावार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को उनके उत्पाद का उचित एवं लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस कड़ी में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सूक्‍खु ने 15 अप्रैल 2025 में जिला चंबा के जनजातीय उप मंडल पांगी को राज्य का प्रथम प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया है तथा घाटी में प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ को 60 रूपए प्रति किलोग्राम की दर से खरीदने का निर्णय लिया गया, जिसे वर्तमान में बढाकर 80 रूपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया । राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार कृषि उत्पादों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित करने से पांगी घाटी के किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिल रहा है।
राज्य सरकार के इस प्रशंसनीय पहल का ही परिणाम है कि वर्ष 2025 में पांगी घाटी के 34 किसानों ने प्रदेश सरकार के निर्धारित समर्थन मूल्य 6000 रूपए प्रति क्विंटल की दर से 99.74 क्विंटल जौ की उपज बेची जिसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें 598440 का भुगतान किया गया। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित जौ को 8000 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का निर्णय लिया है जिसके परिणाम स्वरूप घाटी में इस वर्ष बडी मात्रा में किसानों ने अन्य नकदी फसलों को छोडकर जौ को नगदी फसल के रूप में उगाया है। घाटी में वर्ष 2026 के दौरान अब तक लगभग 152 किसानों ने 362 क्विंटल जौ को सरकारी समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए कृषि विभाग के पास अपना पंजीकरण करवा दिया है जो कि पंजीकरण के अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2026 तक लगभग 400 क्विंटल तक पहुंचने की संभावना है. सरकार के इस निर्णय से पांगी घाटी में किसानों को न केवल अपनी कृषि उपज का सही दाम मिल रहा है बल्कि उनकी आर्थीकि भी लगातार मजबूत हो रही है, यही कारण है कि पांगी घाटी में वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 के दौरान लगभग चार गुना जौ की सरकारी खरीद होने की संभावना है।
पांगी घाटी के किसानों ने हिमाचल प्रदेश सरकार की इस पहल का स्वागत किया है तथा विशेष रूप से राज्य के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। घाटी की ग्राम पंचायत सुराल के किसान राम कुमार व राकेश कुमार, ग्राम पंचायत हुड़ान के किसान शेर सिंह तथा गांव चस्क भटोरी के किसान चैन सिंह का कहना है कि इससे पहले उन्हें अपनी नकदी फसल जौ को बेहद कम दाम पर बेचना पड़ता था तथा कई बार उन्हें अपनी मेहनत व खर्च भी पूरे करने मुश्किल हो जाते थे, लेकिन जब से राज्य सरकार ने पांगी घाटी को प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित किया है तब से उन्हें सरकार के कृषि विभाग के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिल रहा है तथा अब अधिकतर किसान मटर व आलू इत्यादि की नकदी फसलों की बजाय जौ की फसल को उगाने के लिए आकर्षित हो रहे हैं।
प्राकृतिक खेती की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को सफल बनाने के लिए पांगी घाटी में कृषि विभाग भी पूर्णतया सक्रिय है। विभाग द्वारा पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में पांगी घाटी की सभी 19 ग्राम पंचायतो में अनेक जागरूकता शिवरों का आयोजन किया गया है इन एक दिवसीय शिवरों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले घटकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। इन शिविरों में प्राकृतिक विधि से तैयार फसलों को होने वाले रोगों व उनकी रोकथाम बारे किसानों को प्रशिक्षित किया गया है। यही नहीं कृषि की लागत को कम करने के उद्देश्य से घाटी के किसानों को कृषि विभाग द्वारा 50% अनुदान पर कृषि यंत्र प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त घाटी में प्राकृतिक विधि से तैयार सेब की पैदावार को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा 50% अनुदान पर पांगी एप्पल लिखित सेब की पेटियां भी उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि घाटी के प्राकृतिक सेब को विशेष पहचान व मूल्य प्राप्त हो सके।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्राकृतिक खेती से उत्पादित मक्की के लिए 50 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को बाजार में उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें बिचौलियों पर निर्भरता से राहत प्रदान करना है। समर्थन मूल्य से किसानों को अपने उत्पाद की लागत और मेहनत का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
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