हमीरपुर की पंचायतीराज संस्थाओं के लिए कुल 4849 उम्मीदवार मैदान में
सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित, तीन चरणों में होगा मतदान
हमीरपुर 16 मई। जिला परिषद हमीरपुर के 19 वार्डों, जिला की सभी 6 पंचायत समितियों के कुल 119 वार्डों और जिला की कुल 242 ग्राम पंचायतों के प्रधान, उपप्रधान तथा वार्ड सदस्यों सहित कुल 1860 पदों हेतु तीन चरणों में होने वाले चुनावों के लिए अब कुल 4849 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं।
उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) गंधर्वा राठौड़ ने बताया कि जिला की सभी पंचायतीराज संस्थाओं के लिए कुल 5369 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें से 36 नामांकन पत्र रद्द हो गए हैं। 484 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए हैं। शुक्रवार को नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद कुल 4849 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं। इन्हें चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि जिला परिषद के 19 वार्डों के लिए अब 59 उम्मीदवार मैदान में हैं। जिला के 6 विकास खंडों की बीडीसी के 119 वार्डाें के लिए कुल उम्मीदवारों की संख्या 448 है। 242 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के उम्मीदवारों की संख्या 948, उपप्रधान की 992 और पंचायत सदस्यों के उम्मीदवारों की संख्या 2402 रह गई है।
उन्होंने बताया कि 26 मई को 83 पंचायतों में, 28 मई को 82 पंचायतों में और 30 मई को 77 पंचायतों में सुबह 7 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक मतदान होगा। पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों के चुनाव परिणाम उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे। जबकि, पंचायत समिति और जिला परिषद के मतों की गिनती 31 मई को सुबह 9 बजे सभी ब्लॉक मुख्यालयों में आरंभ होगी।
उन्होंने बताया कि जिला में कुल मतदाताओं की संख्या 3,63,699 है। इनमें 1,83,851 महिलाएं और 1,79,846 पुरुष हैं। थर्ड जेंडर के 2 लोगों के नाम भी मतदाता सूचियों में दर्ज हैं।
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घर में पुरानी पांडुलिपि पड़ी है तो करवाएं उसका पंजीकरण
संरक्षण, दस्तावेजीकरण और अभिलेखीकरण के लिए चलाया गया है विशेष अभियान
पांडुलिपियों के पंजीकरण के लिए जिला भाषा अधिकारी कार्यालय में करें संपर्क
हमीरपुर 16 मई। संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत देश की अमूल्य पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण एवं अभिलेखीकरण का कार्य किया जा रहा है।
जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल ने बताया कि हमारे देश में आज भी अनेक प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियां आम घरों, मंदिरों, मठों, निजी परिवारों, संस्थाओं तथा विभिन्न समुदायों के पास सुरक्षित हैं, किन्तु उनका अभी तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया है। अब संस्कृति मंत्रालय ने इन अमूल्य सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए ‘ज्ञान भारतम’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान आरंभ किया है।
संतोष कुमार पटियाल ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, संस्था अथवा समुदाय के पास किसी भी प्रकार की पांडुलिपियां, हस्तलिखित ग्रंथ, पुराने दस्तावेज अथवा ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध हैं और अभी तक सूचीबद्ध या पंजीकृत नहीं हुए हैं, तो वे इसकी सूचना जिला भाषा अधिकारी कार्यालय हमीरपुर को उपलब्ध करवाएं। इनके पंजीकरण के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
जिला भाषा अधिकारी ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी लोग ऑनलाइन सर्वेक्षण में भाग लेकर पांडुलिपियों का पंजीकरण करवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस अभियान में जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की समृद्ध पांडुलिपि परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने जिला के सभी नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और साहित्य प्रेमियों से इस अभियान में सहयोग की अपील की है।