उत्तर प्रदेश से सस्ता गेहूं खरीद कर मंडियों में एमएसपी पर बेचकर हजारों करोड़ रुपए का किया घोटाला: चौधरी अभय सिंह चौटाला
उत्तर प्रदेश से सीधा किसानों से एमएसपी कीमतों से 600-800 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर खरीदा गया गेहूं
राज्य मंडी मार्केटिंग बोर्ड द्वारा साफ तौर पर निर्देशित किया गया है कि एमएसपी पर फसल की खरीद पर किसान से मजदूरी शुल्क नहीं लेना है, बावजूद इसके किसानों से लिया जा रहा है मजदूरी शुल्क
चंडीगढ़, 11 मई। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने भाजपा सरकार द्वारा गेहूं की फसल का भुगतान 72 घंटे में करने के दावे को हवा हवाई बताते हुए कहा कि अभी भी बहुत बड़ी संख्या में किसानों को भुगतान नहीं किया गया है। साथ ही 80 प्रतिशत भुगतान करने के दावे को झूठा बताते हुए कहा कि अभी तक मंडियों में गेहूं की फसल का पूरा उठान ही नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि किसानों का अभी भी लगभग 30 प्रतिशत बकाया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक मंडियों में 84.76 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है जिसमें से लगभग 83 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ही एमएसपी पर खरीद हुई है। यह खरीद पिछले साल के मुकाबले 15 लाख मीट्रिक टन अधिक है। पिछले साल गेहूं की खरीद केवल 70 लाख मीट्रिक टन थी। ये जो 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ज्यादा खरीद दिखाई गई है वो उत्तर प्रदेश से किसानों से सीधा एमएसपी कीमतों से 600-800 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर खरीदा गया और आपस की मिलीभगत करके हरियाणा की मंडियों में एमएसपी कीमतों के हिसाब से समायोजित कर दिया गया। जिससे केंद्र सरकार के फंड में 2000 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ। बड़ी बात यह है कि इस घोटाले को छुपाने के लिए अभी तक ई खरीद पोर्टल पर यह जानकारी अपलोड नहीं की है। किसानों के साथ सरेआम लूट का उदाहरण है कि 30 सितंबर 2021 को हरियाणा सरकार के राज्य मंडी मार्केटिंग बोर्ड के एक सर्कुलर में साफ तौर निर्देशित किया गया है कि एमएसपी पर फसल की खरीद में बिचौलियों को किसान से मजदूरी शुल्क नहीं लेना है सिवाय 10 पैसे प्रति 100 रूपए के। बावजूद इसके किसानों से मजदूरी शुल्क लिया जा रहा है। किसानों से अवैध मजदूरी शुल्क वसूलने को रोकने के लिए सरकार अपने 30 सितंबर 2021 के दिशानिर्देश को सभी बिचौलियों पर सख्ती से लागू करे।