चण्डीगढ़ 27 मार्च - मन कोई 10-20 नहीं हर इन्सान में केवल एक ही मन होता है इन्सान चाहे तो इसे संसार में लगा ले या सत्गुरू के चरणों में लगा ले। संसार का स्वभाव परिवर्तनशील है इसमें हर पल बदलाव आते रहते हैं जिस कारण इन्सान का मन स्थिर नहीं होता लेकिन जो इन्सान अपने मन को सत्गुरू के चरणों में आकर परमात्मा की जानकारी प्राप्त करके इसके साथ जोड़ लेता है तो उसके मन में भी स्थिरता आ जाती है क्योंकि सारे ब्राहमण्ड में केवल ब्रहम ही सत्य है जिसमें आज तक कभी भी कोई बदलाव न तो हुआ है और न ही आगे हो सकता है इसलिए परमात्मा के साथ जुडने से इसे अपने मन में बसाने से मन में स्थिरता आ जाती है, दुनियां में और कोई साधन नहीं है जिससे हर परिस्थिति में इन्सान की एक ही मनोस्थिति हो। ये उद्गार आज यहां सैक्टर 30 में सन्त निरंकारी सत्संग भवन में हुए निरंकारी सत्संग में सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए जोधपुर राजस्थान के ज़ोनल इन्चार्ज श्री हरिमोहन गहलोत जी ने व्यक्त किए।
श्री गहलोत जी ने भक्त कबीर जी के एक दोहे का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार दीपक में जब तक तेल होता है तब तक वह जलता है ज्योंही तेल खत्म हो जाए तो दीपक बुझ जाता है और बुझ हुए दीपक को कोई रखने के लिए तैयार नहीं होता इसी प्रकार इन्सान के अन्दर भी एक ही चेतना होती है जितनी देर तक यह चेतना शरीर में होती है इन्सान चल फिर रहा है, खा-पी रहा है बोल-सुन रहा है, सुख-देख का अनुभव कर पा रहा है लेकिन ज्यों ही चेतना शरीर से निकल जाती है तो शरीर के सभी अंग आंख, नाक, कान, मुंह, हाथ, पैर आदि होते हुए भी ये काम करना बन्द कर देते हैं और घर के लोग भी फिर उस शरीर का ज्यादा समय तक घर में रखने के लिए तैयार नहीं होते, सगे-सम्बन्धी और धन दौलत सब यहीं रह जाता है इन्सान को अकेले ही जाना पड़ता है ।
जो वर्तमान सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज की शरण में आकर मन्जिल को प्राप्त कर लेते हैं उनका लोक भी सुखी और परलोक भी सुहेला हो जाता है । मन जो दुखों का कारण बना होता है वही मन फिर सुखों का कारण बन जाता है ।
इससे पूर्व यहां अनेक वक्ताओं ने सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा दिए गए ब्रहमज्ञान से जीवन-यात्रा को सुखमयी तरीके से चलाने बारे अपने अपने भाव व्यक्त किए तथा यहां के संयोजक श्री नवनीत पाठक जी ने एवं श्री एन के गुप्ता जी ने श्री गहलोत जी का यहां आने पर सारी साधसंगत की ओर से धन्यवाद व स्वागत किया ।