शिमला:03.03.26- पंजाब विधान सभा की आश्वासन समिति आज दिनांक 3 मार्च 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे हि0 प्र0 विधान सभा सचिवालय पहुँची तथा हि0 प्र0 विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां से शिष्टाचार भेंट की। गौरतलब है कि पंजाब विधान सभा की आश्वासन समिति सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी दौस की अध्यक्षता में हि0 प्र0 के दो दिवसीय अघ्ययन प्रवास पर पिछले कल शिमला पहुँची थी। समिति में सदस्य डॉ0 जसबीर सिंह संधू,नरेश कटारिया तथा सरदार रनबीर सिंह शामिल है। विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने सभापति तथा सदस्यों को हिमाचली टोपी व शॉल पहनाकर सम्मानित किया । इस अवसर पर विधान सभा सचिव यशपाल शर्मा भी मौजूद थे।
भेटं के दौरान समिति सदस्यों के साथ संवाद करते हुए पठानियां ने कहा कि हिमाचल तथा पंजाब का बहुत पुराना रिश्ता रहा है। पठानियां ने कहा कि एक समय पंजाब विधान सभा के सत्र भी इसी सदन में आयोजित कियें जाते थे जिसकी अपनी एक विशेष पृष्ठ भूमि थी। इस दौरान समिति सभापति सरदार देविन्द्राजीत सिंह लाडी ने विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को पंजाब विधान सभा की आश्वासन समिति की कार्य प्रणाली तथा क्रिया-क्लापों की जानकारी दी तथा पंजाब विधान सभा द्वारा वर्तमान में अपनाई जा रही राष्ट्रीय ई- विधान प्रणाली बारे भी अवगत करवाया।
बैठक उपरान्त विधान सभा अध्यक्ष स्वंय समिति सदस्यों को सदन भी ले गये जहाँ उन्होने कौंसिल चैम्बर तथा सदन की वरिष्ठता व गरिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि कौंसिल चैम्बर भवन हि0 प्र0 का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय धरोहर है जिसका निर्माण कार्य 1920 मे आरम्भ हुआ तथा 1925 में पूर्ण हुआ था। उस समय इसके निर्माण कार्य की लागत 10 लाख रूपये थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में विट्ठल भाई पटेल प्रथम राष्ट्रीय असेम्बली के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे तथा उन्होंने अपने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को 2 मतों से पराजित किया था। पठानियां ने कहा कि विट्ठल भाई पटेल सरदार पटेल के अग्रज तथा बैरिस्टर थे। उन्होने कहा कि उस समय राष्ट्रीय असैम्बली में सदस्यों की संख्या 145 थी जबकि फ्रेडरिक व्हाईट वर्ष 1919 में राष्ट्रीय असैम्बली के प्रथम मनोनित अध्यक्ष बनाये गये थे।
पठानियां ने कहा कि अंग्रेजो भारत छोडो तथा महिलाओ को मताधिकार का अधिकार भी इसी सदन में राष्ट्रीयं असैम्बली द्वारा पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में टिक निर्मित कुर्सी बर्मीज सरकार द्वारा तत्कालीन बर्तानिया सरकार को विट्ठल भाई पटेल के आसन के रूप में उपहार स्वरूप भेंट की गई थी जिसे वे स्वंय भी आज उपयोग कर रहे है।
समिति को अवगत करवाते हुए पठानियां ने कहा कि अब हम भी राष्ट्रीय ई- विधान प्रणाली को अपना चुके है जबकि हि0 प्र0 ई-विधान प्रणाली अपनाने वाला प्रथम राज्य था जिसका अनुसरण लगभग जहाँ 22 राज्य कर रहे थे वहीं अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया संसद के अध्यक्ष भी हिमाचल ई- विधान प्रणाली जानने इसी सदन में पहुँचे थे।