बच्चों के समुचित विकास के लिए सही उम्र में सही पोषण जरूरी: राहुल कुमार
कहा..स्थानीय एवं पौष्टिक आहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम संभव
आंगनवाड़ी केंद्र लखनपुर में आयोजित पोषण माह अभियान कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बोले उपायुक्त
मिशन दृष्टि के तहत लखनपुर प्राथमिक विद्यालय का किया दौरा, बच्चों की आंखों की जांच संबंधित जानकारी हासिल की

बिलासपुर, 14 सितम्बर: पोषण माह अभियान के तहत जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के सौजन्य से आंगनवाड़ी केंद्र लखनपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र का बारीकी से निरीक्षण किया तथा बच्चों को उपलब्ध करवाई जा रही विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी प्राप्त की। इस बीच उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में अध्ययनरत छोटे बच्चों एवं उनके अभिभावकों, आंगनबाड़ी, कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों से संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने गोद भराई की रस्म को भी निभाया।
इस अवसर पर बोलते हुए उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह मनाने का उद्देश्य केवल लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करना नहीं, बल्कि उनके खान-पान और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना भी है, ताकि कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं की प्रभावी रोकथाम की जा सके। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को दिये जा रहे भोजन में पोषक तत्वों की कितनी मात्रा है इस पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। ऐसे में भोजन की मात्रा के साथ-साथ उसकी पोषण गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक खान-पान पद्धति में अनेक ऐसे स्थानीय खाद्य पदार्थ शामिल रहे हैं, जो पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बदलती जीवनशैली के कारण लोग धीरे-धीरे इन स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों से दूर होते जा रहे हैं तथा बाहर के भोजन पर निर्भरता बढ़ रही है। उन्होंने स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार का अहम हिस्सा बनाने तथा भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, स्थानीय अनाज, दालें, मौसमी फल, दूध तथा अन्य पोषण युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।
राहुल कुमार ने महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने संतुलित आहार, पर्याप्त आयरन सहित आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता और समय पर स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के प्रारंभिक चरण में बच्चे के शारीरिक विकास के साथ-साथ मस्तिष्क का विकास भी तेजी से होता है। ऐसे में बच्चों को पोषक एवं प्रोटीन युक्त आहार देना आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान देने का भी आग्रह किया। उन्होंने बच्चे के विकास की प्रारंभिक अवस्था को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह ऐसा महत्वपूर्ण समय है, जब उचित पोषण, देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बच्चे के समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
उन्होंने सभी अभिभावकों, माताओं और परिवारों से आह्वान किया कि वे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के आहार में पोषण की गुणवत्ता को प्राथमिकता दें तथा स्थानीय एवं पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि सही उम्र में सही पोषण ही स्वस्थ बचपन, बेहतर शिक्षा और मजबूत भविष्य की आधारशिला है। समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से ही कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ प्रभावी जन-जागरूकता अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
इससे पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी नरेंद्र कुमार ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा पोषण माह अभियान से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।
*मिशन दृष्टि के तहत लखनपुर प्राथमिक विद्यालय का किया दौरा, बच्चों की आंखों की जांच संबंधित जानकारी हासिल की
इसके उपरांत उपायुक्त ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला लखनपुर का भी दौरा किया तथा मिशन दृष्टि के तहत की जा रही बच्चों की आंखों की जांच संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
उपायुक्त ने कहा कि मिशन दृष्टि के अंतर्गत आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों की दृष्टि की जांच कर प्रारंभिक स्तर पर आंखों से संबंधित समस्याओं की पहचान करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को कक्षा में पढ़ने, बोर्ड देखने, ध्यान केंद्रित करने अथवा बार-बार सिरदर्द जैसी समस्याएं आती हैं, तो अभिभावकों और शिक्षकों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और समय पर नेत्र जांच करवानी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में मोबाइल फोन, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव उनकी आंखों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज किए गए निरीक्षण के दौरान भी कई बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं के संकेत पाए गए, जिनमें मायोपिया और हाइपरमेट्रोपिया जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों और शिक्षकों को विस्तृत जांच एवं आवश्यक उपचार के लिए फॉलो-अप सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।
उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वह बच्चों को मोबाईल फोन से दूर रखें, शारीरिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाएं तथा मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की आंखों की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान बच्चों में आंखों से संबंधित किसी प्रकार की दिक्कत पाई जाती है तो उसे समय रहते ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कम उम्र के बच्चे अपनी दृष्टि संबंधी समस्या को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं कर पाते। ऐसे में समय पर स्क्रीनिंग से समस्या की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव है और आवश्यक उपचार उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई, एकाग्रता और समग्र स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस मौके पर स्कूल का स्टाफ भी मौजूद रहा।