HISAR, 06.12.22-हरियाणा के लोककलाकार नर्तक महावीर गुड्डू को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी सम्मान के लिए इस वर्ष सम्मान के लिए चुने जाने की घोषणा हुई है । आज फरीदाबाद के निकट एल आर महाविद्यालय में शुरू हुए युवा महोत्सव में हमारी मुलाकात हुई जब वे मंच पर राजा नाहर सिंह के बलिदान की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर आये । वैसे मेरे पूराने मित्र हैं और आजकल हिसार क्षेत्र में सांस्कृतिक समन्वयक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं । इससे पहले वे सफीदो के गवर्नमेंट स्कूल से प्रिंसिपल के तौर पर सेवानिवृत्त हुए ।
-मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं आप ?
-जींद के निकट गागोली गांव से ।
-पहली बार कब प्रस्तुति दी ?
-सन् 1972 में 14 अगस्त ।
-लोकगीत अंर लोकनृत्य की हरियाणा में आज स्थिति क्या है ?
-सच कहूं तो यह मंचों तक सट कर रह गये हैं और सरकार के रहमोकरम पर ही सीमित हैं । या फिर युवा महोत्सव इन्हें बचाये हुए हैं ।
-पहला पुरस्कार कब मिला ?
-जयपुर में पनिहारिन 80 और इसके बाद तो पीछे मुड़कर नहीं देखा ।
-और कौन कौन से ?
-सन् 1985 में निर्गुट उत्सव में दिल्ली में । पंडित लखमी चंद पुरस्कार । लंदन में भारत गौरव , सितम्बर में नार्वे में लोककला आइकॉन और अभी अमेरिका में 11नवम्बर को मानद पीएचडी की उपाधि ।
-कैसा लगा देश का प्रतिष्ठित सम्मान की घोषणा पर ?
-खुशी यह कि बहुत सालों बाद हरियाणा को यह सम्मान मिला और मेरी तपस्या फल लाई ।
हमारी शुभकामनाएं महावीर गुड्डू को । आप इस नम्बर पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं : 9416502202