चंडीगढ़, 03दिसंबर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शनिवार को ब्रह्मसरोवर के पावन तट पर संत सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मलेन में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और संत समाज की महान विभूतियां पहुंची।

अंतराष्टï्रीय गीता महोत्सव-2022 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग से पुरषोतमपुरा बाग ब्रहमसरोवर पर एक संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस संत सम्मेलन में राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय, पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, स्वामी धर्मदेव जी महाराज सहित अन्य संतजनो ने दीपशिखा प्रज्जवलित कर व गीता पूजन करके विधिवत रुप से संत सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान सांसद नायब सिंह सैनी व विधायक सुभाष सुधा ने सभी संत जनों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का संदेश दिया था इसलिए आज के इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा का संदेश दिया था। हमारी धर्म और संस्कृति पर इतने हमले हुए लेकिन इसके बावजूद इसे कोई नष्ट नहीं कर पाया। कर्तव्य का पालन करना ही हमारा धर्म है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्यपालन करने का ही संदेश दिया था। जब हमारे सामने समस्या आती है तो मन दुर्बल हो जाता है। तब हमें गीता के संदेश को याद करना चाहिए और सीख लेनी चाहिए। आज समाज में चरित्र निर्माण की जरुरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत नैतिक मूल्यों को जोडक़र गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। गीता जीवन का मूल है। हमें अपने मन को स्थिर रखना जरुरी है। गीता नित्य नूतन है, जो सारे विश्व में ज्ञान दे रही है।

पंजाब के राज्यपाल बोले- गीता की भूमि कुरुक्षेत्र में पहली बार गीता महोत्सव के अवसर पर आना मेरे लिए सौभाग्यशाली

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा कि गीता की भूमि कुरुक्षेत्र में पहली बार गीता महोत्सव के अवसर पर आना उनके लिए सौभाग्यशाली है। भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश इसी पवित्र भूमि पर दिया था। महाभारत युद्ध से पहले दिन जब अर्जुन विषाद से भर गया था तो भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की महान संस्कृति बहुत पुरानी है। यह हजारों साल पुरानी होने के बाद भी जीवंत है। भगवान श्रीकृष्ण ने भले ही द्वापर युग में गीता का संदेश दिया हो लेकिन वे जानते थे कि यह संदेश कलयुग में काम आएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गीता का कर्म संदेश ही लेकर कार्य कर रह हैं और भ्रष्टाचार, बुराईयों को खत्म कर रह हैं। आज हम अंधाधुंध वृक्षों को काट रहे हैं, इससे पर्यावरण नष्ट हो रहा है। जनसाधारण में जागृति की आवश्यकता है। लोगों को पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों को बचाने के लिए जागृत करना चाहिए।

संतों की वाणी से मिलती है प्रेरणा-अश्विनी चौबे

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि कुरुक्षेत्र गीता की स्थली है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया था। इस स्थान पर आकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं, 3 साल पूर्व भी गीता जयंती के कार्यक्रम में यहां पहुंचा था। आज संत सम्मलेन में पहुंचकर सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं। संतों की वाणी हमें प्रेरणा देती है। संतो की संगत और वाणी जीवन को सहीं दिशा देती है। गीता जयंती के मौके पर साधु संतों का मार्गशर्न प्रकाश पूंज का काम करेगा। साधु संत जगत कल्याण और लोक कल्याण के लिए कार्य करते हैं। यह हर्ष का विषय है कि हरियाणा सरकार गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मना रही है, इससे गीता का प्रचार व प्रसार विदेशों में भी हो रहा है।

संत सम्मेलन में संतों ने रखे अपने विचार

गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता जयंती आस्था का पर्व है। पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा सरकार ने गीता जयंती को विराट स्वरूप दिया है। पहले कुरुक्षेत्र में गीता जयंती आयोजित की जाती थी लेकिन धीरे-धीरे कार्यक्रमों का विस्तार हुआ आज गीता जयंती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है। इस अवसर पर संतों का आगमन कार्यक्रम की प्रासंगिकता को और बढ़ा देता है। उन्होंने संत सम्मेलन में पहुंचे सभी संतों का स्वागत व अभिनंदन किया।
स्थाणेश्वर महादेव मंदिर के श्री बंसीपुरी ने कहा कि कुरुक्षेत्र सरस्वती का उद्गम स्थल है। यहां पर अनेक तीर्थ स्थापित हैं, जहां पर लोग सैकड़ों सालों से अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते आए हैं। इस पुण्य भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया। गीता सभी ग्रंथों का सार है। उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने बागडोर संभाली है प्राचीन तीर्थों का जीर्णोद्धार हो रहा है।
संत देवेंद्रानंद गिरि ने कहा कि भारत विश्वगुरु है और विश्वगुरु ही रहेगा। कुरुक्षेत्र बड़ा पर्यटन स्थल है। कृष्ण के उपदेश को हमें अपने जीवन के आदर्श में धारण करना चाहिए। जीना है तो खुद के लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए जीना चाहिए।
जैन संत विवेकमुनि ने कहा कि गीता का संदेश हताशा, निराशा को दूर करता है। मनुष्य विषमता, तनाव में रहता है, जीवन में सुख व दुख चलते रहते हैं, व्यक्ति अंदर से कमजोर बन जाता है। ऐसे समय में हमें गीता का चिंतन करना चाहिए। यह सभी उलझनों को दूर करता है। हमें हर कर्म को कुशलता पूर्वक करना चाहिए।

संत गुरविंदर सिंह ने कहा कि सनातन मत जागृत करने वाला है। ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि गीता जीवन का आधार है। जो व्यक्ति भगवान या गुरु की शरण में चला जाता है, उसका उद्धार हो जाता है। संस्कृत भाषा हमारी जड़ है। हमें संस्कृत को बचाना चाहिए तभी हम अपनी संस्कृति को बचा सकते हैं। गीता को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी संस्था सदा गीता जयंती जैसे आयोजन के लिए समर्पित है।
धर्मदेव जी महाराज ने कहा कि गीता हमे धर्म का ज्ञान देती है। गीता को अपने जीवन में अनुसरण करना चाहिए। संत देवेंद्र सिंह पटियाला ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि गीता महोत्सव विदेशों में भी मनाया जा रहा है।
ज्ञानेंद्र दास महाराज ने कहा कि सभी संप्रदाय का मूल वेद है। जब तक यह धरती रहेगी गीता रहेगी। गीता के रूप में भगवान श्रीकृष्ण हमारे बीच हैं और सदा रहेंगे। यह हर्ष का विषय है कि गीता जयंती राज्यस्तरीय पर्व है। इस मौके पर अधिकारीगण और बोर्ड के सदस्य मौजूद थे।