सफलता की कहानी-रिटायर्ड टीचर शीला देवी ने प्राकृतिक खेती से उगाया कई क्विंटल आलू

हमीरपुर 26 फरवरी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप कई किसान रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों को छोड़कर अपने खेतों में केवल गोबर या घर में ही तैयार की जाने वाली सामग्री का उपयोग करके न केवल अपने लिए सुरक्षित खाद्यान्न पैदा कर रहे हैं, बल्कि अपनी आय में भी अच्छी-खासी वृद्धि कर रहे हैं।

भोरंज उपमंडल की ग्राम पंचायत भुक्कड़ के गांव बैरी ब्राहम्णा की एक रिटायर्ड टीचर शीला देवी और उनके परिजनों ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। शीला देवी और उनका परिवार अपनी जमीन पर पारंपरिक रूप से गेहूं, मक्की और धान की खेती ही कर रहा था। इससे उन्हें बहुत कम पैदावार हो रही थी। रासायनिक खाद के प्रयोग से उनका खर्चा भी ज्यादा हो रहा था।

इसको देखते हुए शीला देवी ने प्राकृतिक विधि से आलू की खेती करने का निर्णय लिया। पहली बार उन्होंने 5 किलोग्राम आलू बीजा। उन्होंने केवल गोबर की खाद का इस्तेमाल किया और इससे उन्हें लगभग साढे चार क्विंटल पैदावार हुई। इससे उत्साहित होकर शीला देवी ने बड़े पैमाने पर आलू की खेती करने का निर्णय लिया और इसके लिए कुछ श्रमिक भी काम पर रख लिए।

पिछले सीजन में ही उन्हें एक लगभग एक बीघा जमीन से ही कई क्विंटल आलू की पैदावार हुई। शीला देवी ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में किसी भी तरह की रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया तथा सिंचाई की सुविधा के बगैर ही अच्छी पैदावार हासिल की।

शीला देवी का कहना है कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है जोकि बहुत ही सराहनीय है। इस खेती के माध्यम से जहां हमें सुरक्षित खाद्यान्न मिलते हैं, वहीं खेती पर ज्यादा खर्चा भी नहीं होता है। इस तरह की खेती में किसान का फायदा ही फायदा है।

उन्होंने बताया कि पहले उनके इलाके में आलू की खेती नहीं होती थी, लेकिन उनके परिवार की कामयाबी को देखते हुए गांव के अन्य किसान भी इस तरह की खेती के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को कर रही है प्रोत्साहित

प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित कर रही है। प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की, गेहूं और हल्दी के लिए प्रदेश सरकार ने अलग से उच्च दाम निर्धारित किए हैं। प्रदेश सरकार इस विधि से उगाई गई मक्की को 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं को 60 रुपये और कच्ची हल्दी को 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रही है।

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कंजयाण के कालेज में लगाया रक्तदान शिविर, 48 लोगों ने किया रक्तदान
रैडक्रॉस सोसाइटी ने रैड रिबन क्लब और एनसीसी इकाई के सहयोग से किया आयोजन

भोरंज 26 फरवरी। रैडक्रॉस सोसाइटी की उपमंडलीय इकाई ने वीरवार को राजकीय डिग्री कालेज कंजयाण में रक्तदान शिविर आयोजित किया। कालेज के रैड रिबन क्लब और एनसीसी इकाई तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित इस रक्तदान शिविर में कुल 48 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया।
शिविर का शुभारंभ करते हुए एसडीएम एवं उपमंडलीय रैडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष शशिपाल शर्मा ने कहा कि रक्तदान न केवल एक महान दान है, बल्कि यह मानवता की सेवा का सर्वाेत्तम माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि रक्तदान के माध्यम से किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें तथा नियमित रूप से रक्तदान कर समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करें।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शिविर समाज में जागरुकता फैलाने के साथ-साथ युवाओं में सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना को भी मजबूत करते हैं। शशिपाल शर्मा ने कहा कि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके।
रक्तदान शिविर में महाविद्यालय के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों सहित स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर के दौरान रक्तदाताओं का स्वास्थ्य परीक्षण विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में किया गया तथा सभी आवश्यक मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण में रक्त संग्रह की प्रक्रिया संपन्न की गई।
शिविर में रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और इस सराहनीय योगदान के लिए उनका उत्साहवर्धन भी किया गया। महाविद्यालय प्रशासन ने इस सफल आयोजन के लिए रैडक्रॉस सोसाइटी, चिकित्सा दल तथा सभी स्वयंसेवियों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जनहित से जुड़े कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।