CHANDIGARH, 26.05.22-कुमुद दीवान फॉउण्डेशंन दिल्ली , भारत संस्कृति मंत्रालय और प्राचीन कला केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में आज यहाँ एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिस में शहर के इलावा पंजाब और दिल्ली से कई महान इतिहासकारों ने अपने महत्वपूर्ण योगदान और विचारों से दर्शकों को भारत के अनसुने अनकहे रोचक तथ्यों को बहुत खूबसूरती से पेश किया गया।

इस सेमिनार में ग़दर मूवमेंट से लेकर पंजाब के अनकहे अनसुने क्रांतिकारियों के बार्रे में तथ्यों के बारे में अपने विचार पेश किये। इस सेमिनार द्वारा दर्शकों को पंजाब के मार्मिक इतिहास के बारे में जानने का मौका मिला। कई ऐसे अनभिज्ञ तथ्यों को जान कर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस सेमिनार में गणमान्य वक्ताओं ने अपने विचारों और गहरी शोध को दर्शकों के समक्ष पेश किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस कार्यक्रम का आयोजन पंजाब कला भवन के डॉ एम एस रंधावा सभागार में सुबह 10:30 बजे से किया गया , इस कार्यक्रम को भारत में चल रहे आज़ादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत किया गया

इस सेमिनार में श्री जतिंदर पाल मल्होत्रा , चंडीगढ़ इकाई अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

इस सेमिनार के पश्चात् सायं 5:30 से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिस में सबसे पहले प्राचीन कला केंद्र के छात्रों द्वारा गणेश वंदना जिसके बोल थे "मंगल दाता, बुद्धिविधाता शुभ दायक श्री गणेश " की प्रस्तुति पेश की गई , जिस में डॉ शिम्पी कश्यप के निर्देशन में इन छात्रों ने बहुत ख़ूबसूरती से गणेश वंदना पेश की।

इस कार्यक्रम में दूसरी प्रस्तुति ठुमरी गायिका डॉ कुमुद दीवान द्वारा पेश की गई। इस में उन्होंने देश भक्ति पर आधारित गीत पेश किये , जिस में उन्होंने मुझे बुद्धि और ज्ञान दो जोकि क्रांतिकारी कवि सूरजभान द्वारा रचित है पेश की उपरांत कविता जो समर में हो गए अमर, और भारतवालो भूल न जाना अमर शहीदों का अफसाना पेश करके खूब तालिया बटोरी। इनके साथ मंच पर महेंद्र प्रसाद ने तबले पर और ज़ाकिर धोलपुरी ने हारमोनियम पर संगत करके समां बांध दिया।

कार्यक्रम के अंतिम भाग में महान कत्थक गुरु डॉ शोभा कौसर द्वारा देश भक्ति से ओतप्रोत रचनाओं पर आधारित भाव पक्ष पेश किया। सबसे पहले गुरु शोभा कौसर द्वारा भारत देश की सुंदरता को बखान करता एक खूबसूरत गीत जिसके बोल थे "देशों में सबसे अच्छा हिंदुस्तान " पेश किया। इस प्रस्तुति में भारत के खूबसूरती को सुन्दर शब्दों के द्वारा प्रस्तुत किया गया। दूसरी प्रस्तुति में डॉ शोभा कौसर ने वतनवालो ज़माने का चलन सबसे निराला है , जिस में उन्होंने ने आज की युवा पीढ़ी को देश के लिए देश भक्ति की और जुड़ने का आवाहन किया है ताकि देश तरक्की की रह पर अग्रसर होकर विश्व में अपनी अलग छवि बना सके। नृत्य के माध्यम से सुन्दर भाव प्रस्तुत करके डॉ शोभा कौसर ने खूब तालिया बटोरी। कार्यक्रम के अंत में डॉ शोभा कौसर ने बेहद मार्मिक और वीरता से भरी एक प्रस्तुति झाँसी की रानी प्रस्तुत की। जिस में उन्होंने झाँसी की रानी के वीरता से भरे एक किस्से को नृत्य के खूबसूरत भावों द्वारा पेश किया। इस भाव में मार्मिकता और वीरता का अद्भुत समावेश था जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया इनके साथ मंच पर मेहमूद खान ने तबले पर , माधो प्रसाद ने गायन पर और लकी कुमार ने सितार पर बखूबी संगत की

कार्यक्रम का समापन पंजाब की संस्कृति की पहचान भंगड़ा के बिना कैसे हो सकता था , इस लिए जुगनी भंगड़ा अकादमी द्वारा जोरदार भंगड़ा पेश किया गया। दर्शकों ने देश भक्ति की अनोखी भावना अपने आसपास महसूस की। प्राचीन कला केंद्र इसी तरह के अनूठे कार्यक्रमों का हिस्सा सदैव बनता रहेगा।