CHANDIGARH,26.02.21-प्राचीन कला केन्द्र की 35 वीं वैबबैठक में डाॅ.आभा डाॅ.विभा चैरसिया का मधुर गायन पेश किया गया । केन्द्र द्वारा पिछले आठ महीनों से केन्द्र निरंतर संगीत प्रेमियों तक लगातार संगीत पहुंचाता आ रहा है । इसी कड़ी में आज इंदौर की दो बहनों आभा विभा चैरसिया के गायन से सजी केन्द्र की 35 वीं वैबबैठक आयोजित की गई ।

आभा विभा चैरसिया ग्वालियर घराने से सम्बंधित है । दोनों बहनों ने बहुत से प्रसिद्ध गुरूओं डॉ। शशिकांत तांबे, डॉ। लीलावती अडसुले , डॉ। सुवर्णा वाड , स्वर्गीय पं बाला साहेब पुछवाले, कल्पना जोकरकर, पं। कमल कमले, डॉ। प्रभाकर गोहदकर जैसे कई प्रसिद्ध और सम्मानित संगीतकारों और गायकों के मार्गदर्शन में संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत इन्होंने राग कलावती से की जिसमें पारम्परिक आलाप के पश्चात बड़े ख्याल में निबद्ध रचना ‘‘महारे मन लगी थारी सूरतीया’’ पेश की । उपरांत छोटे ख्याल की रचना जो कि तीन ताल मध्य लय से निबद्ध थी पेश की इस रचना के बोल थे ‘‘ बोलन लागी कोयलिया’’ । इसके पश्चात द्रुत एकताल की रचना ‘‘ तारो न तारो थारी मर्जी’’ पेश की । कार्यक्रम के अंत में एक नानक भजन जिसके बोल थे ‘‘साधो रचना राम बनाई’’ पेश की ।

इनके साथ हारमोनियम पर मोहन शुक्ला और तबले पर संजय मंडलोई ने बखूबी संगत की ।