CHANDIGARH,07.02.21-प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित किये जा रहे कत्थक उत्सव के अंतिम दिन कत्थक के लखनऊ घराने की नयी खूबसूरत उम्मीद शिंजिनी कुलकर्णी ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभिन घरानो के युवा एवं चमकते सितारों की खूबसूरत प्रस्तुतियों से सजा इस तीन दिवसीय कत्थक उत्सव का आज यहाँ समापन हो गया। इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के ऍम एल कौसर इंडोर सभागार में किया गया। लाइव दर्शकों के साथ साथ इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे केंद्र के अधिकृत यूट्यूब चैनल एवं फेसबुक तथा इंस्टा पेज पर भी किया गया। केंद्र के इस कार्यक्रम में कोविड सम्बन्धी सभी जरुरी नियमो का बखूबी पालन किया गया।

आज की कलाकार शिंजिनी कुलकर्णी कत्थक के लखनऊ घराने की खूबसूरत एवं युवा प्रतिभा हैं। शिंजिनी कालका बिंदादीन घरनै की नौवीं वंशज है। सुप्रसिद्ध कत्थक पितामह बिरजू महाराज की दोहित्री शिंजिनी ने अल्पायु से ही अपने नाना बिरजू महाराज जी से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की। अपने कठिन रियाज़ और मेहनत के बलबूते पर शिंजिनी आज देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय है। संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बना चुकी शिंजिनी ने अपने परिवार के गौरवमयी स्थान को बरकरार रखते हुए आगे बढ़ रही है।

आज के कार्यक्रम में शिंजिनी ने भगवन राम के खूबसूरत भजन " श्री राम चरण" से कार्यक्रम की भक्तिमयी शुरुआत की। इसके उपरांत उपरांत इन्होने लखनऊ घराने के शुद्ध कत्थक को प्रस्तुतु किया जिस में तेरह मात्रा से सजे कत्थक में तिहाई , परन, टुकड़े , चक्कर , लड़ी एवं पैरों की चालें इत्यादि का खूबसूरत प्रदर्शन किया। उपरांत लखनऊ घराने की कुछ खास रचनाओं एवं बंदिशों का उत्कृष्ट प्रदर्शन करके शिंजिनी ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। शिंजिनी की खूबसूरती एवं भावों के प्रदर्शन प्रशंसनीय हैं।

कार्यक्रम के अंतिम भाग में भाव पक्ष पर आधारित प्रस्तुति में शिंजिनी ने भावपूर्ण प्रसंग पेश किया ,जिस में उन्होंने ने चौदह बरस के बनवास के बाद उर्मिला और लक्ष्मण के अनसुने अनकहे खूबसूरत एवं भावपूर्ण पलों का नृत्य के माध्यम से खूबसूरत प्रदर्शन करके अपनी लाज़वाब अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के अंत में केंद्र की रजिस्ट्रार एवं प्रसिद्द कत्थक नृत्य गुरु डा शोभा कौसर ने कलाकारों को पुष्प एवं स्क्रॉल देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे।