CHANDIGARH,10.01.21-आज की कलाकार किसी परिचय की मोहताज नहीं है । इनकी अल्पायु से ही नृत्य में गहरी रूचि थी । डाॅ.समीरा कौसर ने नृत्य की शिक्षा अपने गुरू श्री कन्हैया लाल,डाॅ.शोभा कौसर एवं गुरू ब्रजमोहन गंगानी से प्राप्त की । डाॅ.समीरा कौसर के नृत्य में भावों की सुंदरता,दमदार नृत्य प्रस्तुतिकरण एवं भावपूर्ण भाव पक्ष का खूबसूरत सम्मिश्रण है । समीरा कौसर ने बहुत सी यादगार प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई है ।

कार्यक्रम की शुरूआत डाॅ.समीरा कौसर ने भक्तिमयी प्रस्तुति कृष्ण स्तुति से की जिसके बोल थे ‘‘बलि बलि मोहिनी मूरत की बलि’’ इस नृत्य के माध्यम से इन्होंने भगवान कृष्ण की महिमा का बखान नृत्य के माध्यम से किया । उपरांत डाॅ.समीरा ने शुद्ध कत्थक नृत्य की प्रस्तुति पेश की । जिसमें उन्होंने जयपुर घराने के शुद्ध कत्थक नृत्य तोड़े,टुकड़े,परन,चक्र,लड़ी,उपज उठान,तिहाई,चालें इत्यादि का खूबसूरत प्रदर्शन किया । कत्थक के इस तकनीकी पक्ष मे समीरा का प्रस्तुतिकरण काबिले तारीफ था ।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बहुत खूबसूरत भाव पक्ष पर आधारित झांसी की रानी के जीवन के अनछुए पहलुओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया । सब रानी लक्ष्मीबाई को एक वीरागंना के रूप में जानते हैं लेकिन वीरागंना होने के साथ झांसी की रानी एक मां भी थी । उनके ममतामयी रूप को खूबसूरती से नृत्य के माध्यम से पेश करके समीरा ने मार्मिक प्रदर्शन से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी । इस नृत्य नाटिका में उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई के अपने पुत्र के प्रति ममतामयी रूप को पेश किया । समीरा ने अपनी भाव भंगिमाओं से मातृत्व की अनुभूति से लबालब इस प्रस्तुति को यादगार बना दिया ।
कार्यक्रम में डाॅ. समीरा कौसर के साथ संगत कलाकारों में गायन पर श्री माधो प्रसाद,पढंत पर गुरू ब्रज मोहन गंगानी,तबले पर शकील अहमद और महमूद खां,सितार पर सलीम कुमार,सारंगी पर राजेश एवं वाद्य पर तरूण ने बखूबी संगत की ।