CHANDIGARH,01.01.21-समीरा कौसर के कत्थक की झंकार से प्राचीन कला केन्द्र की 29वीं वैबबैठक में नववर्ष का शुभारंभ प्राचीन कला केन्द्र ने कोविड के बुरे दौर में भी संगीत एवं कला को अपने अनथक प्रयासों द्वारा निरंतर संगीत प्रेमियों तक पहुंचाने का अद्भुत कार्य कर रहा है । कला की सेवा में प्रतिज्ञाबद्ध प्राचीन कला केन्द्र द्वारा इसी संदर्भ में वैबबैठकों का आयोजन पिछले सात महीनों से किया जा रहा है । इसी कड़ी में नववर्ष के आगमन पर केन्द्र की 29वीं वैबबैठक में डाॅ.समीरा कौसर ने कत्थक नृत्य की प्रस्तुति से नववर्ष का स्वागत किया ।कार्यक्रम का आयोजन केन्द्र के सोशल मीडिया माध्यम जैसे यूट्यूब चैनल,फेसबुक एवं टविटर पेज पर किया गया ।

डाॅ.समीरा कौसर किसी पहचान की मोहताज नहीं है। उन्होंने अल्पायु से ही नृत्य की शिक्षा लेनी आरंभ की । समीरा सुंदर भाव,दमदार नृत्य एवं भावपूर्ण प्रस्तुति का सुंदर सम्मिश्रण है । कत्थक की प्रारंभिक शिक्षा गुरू कन्हैया लाल जी से प्राप्त करने के बाद डाॅ. समीरा ने जयपुर घराने की महान कत्थक गुरू डाॅ.शोभा कौसर से नृत्य की विधिवत शिक्षा प्राप्त की । कत्थक में तकनीकी एवं भावपक्ष पर मज़बूत पकड़ होने के कारण आज डाॅ.समीरा ने संगीत जगत में एक विशेष स्थान बनाया है ।
कार्यक्रम की शुरूआत डाॅ.समीरा ने एक श्लोक ‘‘प्रथम वंदन करूं ध्यायूॅं श्री गणेश’’ से की । इस श्लोक में उन्होंने ब्रह्मा,विष्णु,गुरू का वंदन किया । इसके पश्चात डाॅ.समीरा ने कत्थक का तकनीकी पक्ष पेश किया । जिसमें उन्होंने थाट, उपज, उठान, तोड़े, टुकड़े, परन,तिहाई,चालें,लड़ी,कायदे,त्रिपल्ली परन एवं लम्बछार परन का खूबसूरत प्रदर्शन किया ।
कार्यक्रम के अंतिम भाग में डाॅ.समीरा ने महान कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘‘किसान’’ पर एक भावपूर्ण प्रस्तुति पेश की । जिसके बोल थे ‘‘बरसा रहा है रवि अनल भूतल तवा सा जल रहा’’ । इस कविता के माध्यम से डाॅ.समीरा ने भाव पक्ष पर अपनी मज़बूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । किसानों के प्रति कवि के मन के भावों को नृत्य के माध्यम से पेश करके समीरा ने अपनी प्रतिभा को बखूबी प्रदर्शित किया ।