सोलन -दिनांक 11.08.2020
कलीन वार्ड कन्टेनमेंट जोन के दायरे से बाहर

जिला दण्डाधिकारी सोलन के.सी. चमन ने सोलन उपमण्डल में नगर परिषद सोलन के कलीन वार्ड को कन्टेनमेंट जोन की परिधि से बाहर कर दिया है।
यह निर्णय उपमण्डलाधिकारी सोलन द्वारा प्रेेषित उस रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है जिसमें उन्होंने सूचित किया है कि कन्टेनमेंट अवधि में उक्त क्षेत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा फ्लू जैसे रोग के लक्षणों से युक्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग तथा कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आए लोगों की सघन जांच का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
उपमण्डलाधिकारी सोलन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सूचित किया है कि कलीन क्षेत्र में कोविड-19 का कोई नया रोगी नहीं पाया गया है।
जिला दण्डाधिकारी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार कलीन वार्ड में 07 अगस्त, 2020 को जारी आदेशांे के अनुसार घोषित प्रतिबन्धों को हटा दिया गया है। उक्त क्षेत्र में 31 जुलाई, 2020 को जारी आदेश लागू रहेंगे।
यह आदेश तुरन्त प्रभाव से लागूू हो गए हैं।

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टी.जी.टी. टेट पास उम्मीदवार 25 अगस्त तक दर्ज करवायें भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों मे अपना नाम
धर्मशाला, 11 अगस्त: क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी ने आज यहां जानकारी देते हुये बताया जिला कांगड़ा के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति व सामान्य वर्ग के भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित जोकि टी.जी.टी. टेट पास हों के लिये बैच के अनुसार पद आरक्षित किए गए हैं जिसकी अधिसूचना निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग शिमला द्वारा की गयी है। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों से सम्बन्धित उम्मीदवार अपने आवेदन 25 अगस्त 2020 तक भूतपूर्व सैनिकों के आश्रितों की सूची मे अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि टी.जी.टी. आर्टस के भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित जोकि सामान्य श्रेणी के वर्ष 2003 के बैच से, अनुसूचित जाति के वर्ष 2006 और अनुसूचित जनजाति के वर्ष 2011 बैच से हैं वे भूतपूर्व सैनिकों की सूची में दर्ज करवा सकते हैं।
क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी ने बताया कि टी.जी.टी. नॉन मेडिकल के भूतपूर्व सैनिकों के आश्रित जोकि सामान्य श्रेणी के 2004 बैच से, अन्य पिछड़ी जाति के 2006 बैच से, अनुसूचित जाति के वर्ष 2018 बैच से तथा अनुसूचित जनजाति के 2019 बैच के आवेदक, भूतपूर्व सैनिकों की सूची में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि टी.जी.टी. मेडिकल के भूतपूर्व सैनिकों के सामान्य वर्ग के वर्ष 2009 के आश्रित, अनुसूचित जाति के वर्ष 2017 के आश्रित और अनुसूचित जनजाति के वर्ष 2019 बैच के आश्रित भूतपूर्व सैनिकों की सूची में अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सभी पात्र आवेदक 25 अगस्त से पहले अपने निकटतम रोजगार कार्यालय से सम्पर्क कर सकते हैं।

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बगली फीडर में 14 अगस्त को बिजली बंद
धर्मशाला 11 अगस्त: विद्युत उपमण्डल-दो के सहायक कार्यकारी अभियन्ता अमर सिंह कपूर, ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 के.वी. बगली फीडर की विद्युत लाइनों की सामान्य मरम्मत कार्य के चलते इस फीडर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों बगली, चैतड़ू, बनवाला, मस्तपुर, पुराना मटौर, घणा, अंसौली, पटोला, कंदरेहड़, इच्छी, सराह, मनेड, अप्पर और लोअर सकोह, पुलिस लाइन सकोह तथा आस-पास के क्षेत्रों में दिनांक 14 अगस्त, 2020(शुक्रवार) को प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे या कार्य समाप्ति तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी।
उन्होंने बताया कि मौसम खराब होने की स्थिति यह कार्य अगले दिन किया जाएगा।

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‘एक जिला-एक उत्पाद’ की अवधारणा को प्रोत्साहित करते हुये बनाये जायेंगे कृषक उत्पादक संगठनः राघव
धर्मशाला 11 अगस्त: विपणन, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ‘‘वन डिस्ट्रिक-वन प्रॉडक्ट’’ (एक जिला-एक उत्पाद) की अवधारणा को प्रोत्साहित करते हुए कृषक उत्पादक संगठनों का गठन किया जाएगा। कम से कम 100 सदस्यों के साथ कृषक उत्पादक संगठन बनाये जाएंगे। प्रत्येक विकास खंड में औसतन 2 कृषक उत्पादक संगठन बनाए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
यह जानकारी एडीसी राघव शर्मा ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित नाबार्ड की कृषक उत्पादक संगठन निर्माण एवं संवर्द्धन योजना की जिला स्तरीय अनुप्रवर्तन समिति की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।
एडीसी ने बताया कि जिला स्तरीय अनुप्रवर्तन समिति का मुख्य उद्देश्य कृषक उत्पादक संगठनों के विकास की प्रक्रिया और प्रगति को मॉनिटर करना तथा इस प्रक्रिया में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए सभी संभव प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कृषक उत्पाद संगठन की द्वारा व्यापक स्तर पर सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं और गतिविधियां थोक दरों पर गुणवत्ता उत्पादन के लिये बीज उर्वरक, कीटनाशक आदि इनपुट की आपूर्ति करना रहता है। संगठन आवश्यकतानुसार प्रॉडक्शन और पोस्ट प्रॉडक्शन मशीनरी और उपकरण जैसे टिल्लर, कल्टीवेटर, स्प्रिंक्लेर सेट, कम्बाइन हार्वेस्टर आदि, कस्टम हाइरिंग माध्यम से उपलब्ध करवाते हैं और मूल्यवर्धन गतिविधियों जैसे सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग में भी सहयोग देते हैं।
शर्मा ने बताया की इसके अतिरिक्त कृषक उत्पाद संगठन उत्पाद के बारे में बाजार की जानकारी की सुविधा उपलब्ध करवाने, साझा लागत के आधार पर लोजिस्टिक सेवाएं उपलब्ध करना जैसे भंडारण, परिवहन, लोडिंग/अनलोडिंग और बाजार में उत्पाद के लिए बेहतर तरीके से मोल-भाव कर उसे बेहतर कीमत देने वाले मार्केटिंग चैनल को बेचने की सुविधा प्रदान करते हैं। वर्तमान कृषक उत्पादक संगठन जिन्होंने भारत सरकार की किसी अन्य योजना में अभी तक लाभ प्राप्त नहीं किया है वे भी इस योजना के अन्तर्गत लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रारभिक रूप से देश भर में 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठन आने वाले 5 वर्षों में बनाने के लिए तीन कार्यान्वयन एजेन्सियों की पहचान की गई हैं जिनमें नाबार्ड, एसएफएसी व एनसीडीसी प्रमुख हैं।
शर्मा ने बताया की इस योजना के अन्तर्गत 10000 कृषक उत्पादक संगठनों के निर्माण एवं संवर्धन पर कुल 6866 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। कम्युनिटी बेस्ड बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन-प्रोडयूस क्लस्टर की पहचान, कम्यूनिटी मोबिलाइजेशन, बेसलाइन सर्वे, एफपीओ के रजिस्ट्रेशन, टेªनिग कैपेसिटी बिल्डिग इत्यादि से लेकर इक्किटी ग्रांट और क्रेडिट गारंटी फैसिलिटी इत्यादि प्राप्त करने में कृषक उत्पादक संगठन की मदद करेगा। कम्युनिटी बेस्ड व्यापार ऑर्गेनाइजेशन और इन्क्यूबेशन की लागत अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति एफपीओ होगी जोकि 5 वर्ष की अवधि के लिए होगी।
प्रत्येक कृषक उत्पादक संगठन को वित्तिय सहायता अधिकतम 18 लाख रुपये होगी जोकि उत्पादक संगठन के निर्माण से 3 वर्ष की अवधि के लिए रहेगी।
उन्होंने बताया कि कृषक उत्पादक संगठनों को इस योजना के अंतर्गत मैचिंग इक्किटी ग्रांट स्पोेर्ट का भी प्रावधान किया गया है जोकि 2000 रुपये प्रत्येक सदस्य होगी और अधिकतम 15 लाख प्रति कृषक उत्पादक संगठन रहेगी।
शर्मा ने बताया कि नाबार्ड के पास एक हजार करोड़ रुपये तथा एनसीडीसी के पास पांच सौ करोड़ रुपये की निधि से क्रेडिट गारेंटी फंड (सीजीएफ) स्थापित किया गया है ताकि एलिजिबल लैंडिंग इंस्टिटयूशन (ईएलआई) पात्र कृष उत्पाादक संगठनों को बिना कॉलेटराल के ऋण प्रदान कर सके। राज्यों के सहकारी समितियों अधिनियम के तहत पंजीकृत कृषक उत्पादक संगठनों को एनसीडीसी और नाबार्ड के सीजीएफ से क्रडिट गारंटी सुविधा प्राप्त हो सकेगी। कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत कृषक उत्पादक संगठनों को नाबार्ड के सीजीएफ से क्रडिट गारंटी सुविधा प्राप्त हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि कृषक उत्पादक संगठनों को एग्री इनपुट हेतु आवश्यक लाइसंेस जारी कर उनकी स्थिति को मजबूत बनाया जा सकता है। कुषि विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा अपनी विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत वित्तिय तथा गैर वित्तिय सहायता प्रदान करने हेतु कृषक उत्पादक संगठनों को वरीयता प्रदान करना है।
शर्मा ने बताया की दुग्ध संघ द्वारा कृषक उत्पादक संगठनों को मिल्क पार्लर प्रदान करना, कृषक उत्पाादक संगठनों के वित्तपोषण को जिला अग्रणी बैंक द्वारा जिले की वार्षिक ऋण योजना में शामिल करना और बैंको को इसके लिए लक्ष्य प्रदान करना है।
जिला विकास प्रबंधक (नाबार्ड) अरूण खन्ना ने बैठक का संचालन किया तथा योजना की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर पीएनबी एलडीएम कुलदीप कौशल, उपनिदेशक कृषि पीसी सैनी, उपनिदेशक पशु पालन संजीव धीमान, डॉ. कुलदीप कुमार, निदेशक आतमा डॉ.डीआर अवस्थी, जिला पंचायत अधिकारी अश्वनी शर्मा, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिका के पद के साक्षात्कार 31 अगस्त को

धर्मशाला, 11 अगस्त: बाल विकास परियोजना अधिकारी, बैजनाथ वंदना कटोच ने जानकारी देते हुए बताया कि बैजनाथ के अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के पदों के लिए साक्षात्कार की तिथि 31 अगस्त, 2020 निर्धारित की गई है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में साक्षात्कार की तिथि 10 अगस्त रखी गई थी लेकिन किन्ही प्रशासनिक कारणों के कारण इसकी तिथि में बदलाव किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके सम्बन्ध में कार्यालय से कोई भी अलग से बुलावा पत्र नहीं भेजे जाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए इस कार्यालय के दूरभाष नम्बर 01894-263429 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

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प्रोजेक्ट समीक्षा’ से विकास कार्यों ने पकड़ी रफ्तार
-रैत ब्लाक में एक माह में 135 लंबित कार्य पूर्ण
-पंचायत स्तर पर की जा रही कार्यों की समीक्षा: बीडीओ

धर्मशाला, 11 अगस्त: रैत ब्लॉक में ‘प्रोजेक्ट समीक्षा’ आरंभ होने से विकास कार्यों में तेजी आई है, 14 जुलाई, 2020 से शुरू किए गये इस प्रोजेक्ट में प्रत्येक पंचायत की लंबित कार्यों की समीक्षा की जा रही है । इसके पहले चरण में विधायक निधि, सांसद निधि, विकास में जन सहयोग, मुख्य मंत्री ग्राम पथ योजना आदि योजनाओं का पंचायत स्तर पर खाका तैयार कर पिछले एक माह में ही 135 कार्य पूर्ण करवा दिये गये हैं। इन कार्यों को पूरा करवा कर 2.16 करोड़ रुपए के समापन प्रमाण पत्र उपायुक्त कार्यालय में जमा करवाए जा रहे हैं ।
रैत ब्लॉक में मनरेगा के अंतर्गत पिछले एक माह में 2017-18 एवं 2018-19 के कई वर्षों से लंबित पड़े 50 कार्य पूर्ण करवाए जा चुके हैं और 103 लम्बित कार्यों के सामग्री बिल अदायगी के लिए आनलाइन चढ़ाए जा चुके है । आगामी माह में मनरेगा के तहत 200 कार्य पूर्ण करवाने का लक्ष्य रखा गया है ।
विकास खंड रैत में 14वां वित्तायोग के अंतर्गत 76 प्रतिशत पैसा व्यय किया जा चुका है जिससे जिला काँगड़ा में 14वें वित्तायोग के अंतर्गत सबसे अधिक खर्चा करने वाला विकास खंड रैत बन गया है । प्रोजेक्ट समीक्षा के अंतर्गत जन भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया योजनाओं का खाका हर पंचायत घर में उपलब्ध करवाया जाएगा । इस पूरे डाटा को सितंबर माह से पंचायत बैठक एवं आगामी ग्राम सभा में भी रखा जाएगा तथा हर पखवाड़े में इस पर पंचायतों द्वारा कार्यवाही रिपोर्ट ली जाएगी, जिससे की इस प्रक्रिया का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके ।
खंड विकास अधिकारी रैत लतिका सेहजपाल ने बताया कि पंचायतों में लम्बित पड़े विकास कार्यों को शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण करने के लिये ‘प्रोजेक्ट समीक्षा’ के माध्यम से पंचायतों की कार्यक्षमता को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन कल्याण के कार्यों में जन भागीदारी को बढ़ावा देना ही गुड गवर्नन्स कहलाता है जिसे विकास खंड रैत में लागू करने के लिए शुरू किया गया है।
बीडीओ ने बताया कि पंचायतों में कई प्रकार से और कई योजनाओं के तहत जन कल्याण के लिए पैसा आता है। इस राशि को समयबद्ध तरीके से खर्च ना कर पाने का एक महत्वपूर्ण कारण होता है पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव जिससे की पंचायत की विकास दर घीमी पड़ जाती है । इसी कमी को दूर करने के लिए एवं पंचायतो की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विकास खंड रैत में प्रोजेक्ट समीक्षा की शुरुआत की जा रही है । जिसके अंतर्गत सभी पंचायतों में लंबित पड़े कार्यों को समयबद्ध तौर पर करवाने के लिए पंचायत स्तर पर विभिन्न स्कीमों जैसे की मनरेगा, 14वां वित्तायोग, सांसद निधि , विधायक निधि, स्वच्छ भारत मिशन व अन्य किसी भी मद के अन्तर्गत मिले पैसों का खाका तैयार किया जा रहा है ।