NEW DELHI,07.08.20 श्री पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने अपनी एक छवि बनाई, वो एक ऐसे प्रखर वक्ता की छवि थी, जो 2014 से पहले देश की सीमाओं को लेकर या अन्य मुद्दों को लेकर दहाड़ते थे, एक ऐसी छवि बनाई कि वो दहाड़ते हैं।

इस छवि को बनाने में जाहिर सी बात है कि कई कंपनियां शामिल हुई, करोड़ों का खर्चा हुआ, करोड़ों का निवेश करना पड़ता है ऐसी छवि बनाने के लिए।

किसी की छवि बिगाड़नी हो तब भी निवेश करना पड़ता है, किसी की छवि बनानी हो तब भी निवेश करना पड़ता है, इस निवेश में भारतीय जनता पार्टी बड़ी काबिल है और इस छवि का लाभ भी हुआ, चुनाव में विजय हासिल हुई, कई बार इनको विजय हासिल हुई, राज्यों में हुई, केन्द्र में हुई। तो जो व्यक्ति इस छवि की वजह से प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो, जब वो व्यक्ति चीन के मामले पर चुप्पी साध जाता है, तो सवाल उठते हैं, अत्यंत गंभीर सवाल उठते हैं।

या तो चुप रहते हैं और या जब बोलते हैं चीन के मुद्दे पर तो गुमराह करते हैं देश को, गलत बयानी करते हैं देश के सामने, कहते हैं ना कोई घुसा, ना कोई घुसा हुआ है और उस बयान को संभालने के लिए फिर तमाम तरह के मंत्री, विभाग सब जुट जाते हैं कि नहीं ये बोला, नहीं ये नहीं कुछ और बोला, लेकिन क्लीन चिट तो क्लीन चिट होती है।

सबके सामने विश्व के सामने प्रधानमंत्री जी ने चीन को क्लीन चिट दी। कल क्या हुआ, आपने देखा कि रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से एक डॉक्यूमेंट, एक कागज, एक नोट जिसमें कि चीन किस तरह से घुसपैठ कर रहा है हमारी सीमाओं में लद्दाख में, उसका वर्णन किया गया था। वो डॉक्य़ूमेंट रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से गायब कर दिया जाता है, हटा दिया जाता है, उड़ा दिया जाता है। ये भी हमने देखा। हमने यह भी देखा कि कैसे PM CARES Fund में चीन की विवादित कंपनियों द्वारा जो पैसा आया है उन सवालों पर भी प्रधानमंत्री चुप रहते हैं।

पूरा देश तब हैरान हो जाता है जब मोदी जी एवं उनके सहयोगी उन लोगों को लाल आंख दिखाते हैं जो मोदी जी को अपना राजधर्म याद दिलाने की कोशिश करते हैं और उनसे निवेदन करते हैं कि मोदी जी देश की सीमाओं की रक्षा कीजिए चीन को लाल आंख दिखाइए। आपकी ऐसी क्या मजबूरी है, ऐसी कौन सी कमजोरी है कि आप चीन के सामने नतमस्तक हो जाते हैं, आंखे मूंद लेते हैं एवं चुप हो जाते हैं।

हिन्दुस्तान ने सोचा था कि एक मज़बूत प्रधानमंत्री चुना जा रहा है, हिन्दुस्तान हैरान है यह देखकर कि इनसे ज्यादा मजबूर प्रधानमंत्री इतिहास ने नहीं देखा। मोदी जी, हम यह जानना चाहते है कि आप की मजबूरी क्या है ? कुछ लोग आप की इस रहस्यमयी चुप्पी के पीछे आपका गुजरात के मुख्यमंत्री का कार्यकाल बताते हैं, जब आप बार-बार चीन चले जाया करते थे, जब आप गुजरात के स्कूलों में चीनी (mandarin) भाषा सिखाए जाने की पुरजोर वकालत करते थे, जब आप चीन की कंपनियों के लिए गुजरात में गर्मजोशी से स्वागत करते थे।

कुछ लोग बताते हैं कि जब से आप प्रधानमंत्री बने हैं तब से आपकी चीनपरस्त नीतियां और अधिक उबाल पर रही। जब आप चीन जाने के बहाने ढूंढते रहे, जब आपने हर क्षेत्र में चीनी निवेश के लिए दरवाजे खोल दिए। और अब यह जानकारी सामने आती है कि 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने चीन की सहायता ली। चीन की जिन कंपनियों का सीधा-सीधा संबंध PLA से है ऐसा आपकी सरकार ने अभी जुलाई में बताया, उन्ही कंपनियों की सहायता से आपने चुनाव लड़ा। जब यह जानकारी सामने आती है, तब देश को तमाम सवालों के जवाब मिलने लग जाते हैं। वो सवाल, जो आपकी चुप्पी से जन्म लेते हैं, उनका जवाब इन तथ्यों से उजागर हो जाता है UC Web Mobile नामक कंपनी जिस पर जुलाई में आपने पाबंदी लगाई, 2019 में इसी कंपनी की सेवाएं आपकी अपनी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी ने ली। यह तथ्य आपके अपने चुनाव व्यय रिपोर्ट में उजागर होता है।(संलग्न1)

जिस UC Web Browser पर 2017 में आप ही की सरकार ने हिन्दुस्तानियों का डाटा चुराकर चीन भेजने का आरोप लगाया था(संलग्न2), आखिर आपकी क्या मजबूरी थी कि उसी कंपनी को 2 साल बाद 2019 में चुनाव में अपने प्रचार के लिए लाया गया ?

दूसरी कंपनी, Gamma Gaana Limited (Tencent of China) नामक इस कंपनी के एक निदेशक का नाम है Po ShuYueng. यह व्यक्ति 10c India Private Limited के भी निदेशक हैं। Gamma Gaana Limited का वित्त पोषण Gamma Gaana Limited द्वारा किया जाता है(संलग्न3)। अभी जुलाई में मोदी सरकार ने देश को यह सूचित किया कि अली बाबा एवं Tencent चीन की People Liberation Army से सीधे-सीधे संबंधित हैं।

ऐसी ही एक और कंपनी ShareIT Technology इस कंपनी पर भी भारत सरकार ने जुलाई में पाबंदी लगा थी, यह कहते हुए कि यह कंपनी भारत की एकता एवं संप्रभुता के लिए खतरा है। हैरानी की बात यह है कि जो कंपनी भारत सरकार के अनुसार भारत की एकता एवं संप्रभुता के लिए खतरा है, वही कंपनी भारत के चुनाव में भाजपा की पाटर्नर बनकर चुनाव पर प्रभाव डालती है। हम प्रधानमंत्री जी से यह जानना चाहते हैं कि ऐसी कंपनी को भारतीय चुनाव जैसे संवेदनशील काम में क्यों इस्तेमाल किया गया ?

आरएसएस के निरंतर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ आदान प्रदान होते रहे, चलिए मान लेते हैं कि एक गैर-राजनीतिक संगठन को चीन से मधुर संबंध स्थापित करने की कोई आवश्यकता रही होगी। इंडिया फाउंडेशन के चीन से रिश्ते भी किसी से छिपे नहीं हैं। विवेकानंद फाउंडेशन जो मोदी सरकार की नीतिगत रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, उसके चीन से अंतरंग संबंध जग जाहिर हैं।