देश को पूंजीपतियों का गुलाम बनाएगे तीनों अध्यदेश :- गुरनाम सिंह चदूनी

1. एक देश एक मंडी :- केंद्र सरकार की यह योजना केवल पुजीपतियों के लिए कृषि बाजार में जमीन तैयार करना है क्योकि किसानो के लिए सारे देश मे कोई भी फसल कंही भी बेचेने का कानून तो पहले से ही है लेकिन छोटे छोटे किसान जिनके पास 2 एकड़ भूमि या इससे कम है वह अपनी फसल दूसरे स्थानो में ले जाने में असमर्थ होता है इस कानून का सहारा लेकर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी हाथ खिच रही है ।

2. जरूरी खादय वस्तु अधिनियम से पाबंदी हटाना :- खदाय वस्तुओ जैसे अनाज, दालें, आलू, प्याज आदि को इसलिए बाहर किया गया है ताकि सारा कृषि व्यापार बड़े पुजीपतियों के हवाले किया जा सके ओर ओर बड़े पूंजीपतियों की कंपनिया आपस में पूल करके देश के किसानों का भरी शोषण करेगी जिससे किसान मजबूरी वंश खेती छोड़गे ओर ज्यों ज्यों किसान खेती छोड़ेते जाएगे त्यों त्यों ये कंपनिया खेती पर कब्जा करती जाएगी ओर इस प्रकार से एक दिन पूरा किसान खेती से बाहर हो जाएगा।

3. खाद्य वस्तुओ की स्टाक सीमा को समाप्त किया जाना :- खाद्य वस्तुओ की स्टाक सीमा को समाप्त करने से चंद पूंजीपति ही सारे देश का खदयान स्टाक कर लेगे इससे दो प्रकार के नुकसान होने की पूरी संभवना है 1. छोटा व्यापारी ख़त्म हो जाएगा क्योकि बड़ी मछ्ली छोटी मछली को खा जाती है नंबर 2. जब खदयान चंद पुजीपतियों के हाथो में चला जाएगा तब वह देश में किसी भी खदाय वस्तु की कमी के समय अपना माल रोक कर मनमर्ज़ी की कीमते वसूलेगे ओर भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में भुखमरी फैलेगी । इसी प्रकार का उदाहरण कुछ वर्ष पहले भी महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने कुछ पूंजीपतियों को दाल के स्टाक की छूट दी थी ओर जबकि उस वर्ष देश में दालों उपलब्ध्ता उसके पिछले सालों से ज्यादा थी तभी देश में अचानक दाल के भाव 200 रुपए प्रति किलो तक पहुच गया था। जिससे अदानी जैसे पूंजीपति मालामाल हो गए थे मोदी सरकार की लगभग सभी नीतिया देश की खेती व खेती के व्यापार को पूंजीपतियों के हवाले करने वाली है जो देश के लिए घातक सीध होगा क्योकि यह अब भी देश की 65% जनसंख्या का रोजगार खेती है।