चंडीगढ़, 18 फरवरी: कृषि विभाग द्वारा जिन किसानों ने धान की पराली व गेहूं के अवशेष जलाए हैं उनको विभाग ब्लैकलिस्ट में डालकर और कृषि संबंधी मिलने वाली तमाम योजनाओं के लाभ से वंचित करेगा। इस बाबत इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा किसानों के हितों की अवहेलना करते हुए ऐसी घोषणा करना सरकार की किसान विरोधी नीति को दर्शाता है क्योंकि देश व प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है और प्रदेश की आर्थिक हालत में किसान व कृषि का विशेष योगदान है।
इनेलो नेता ने कहा कि धान व गेहूं के अवशेष जलाने के केवल किसान जिम्मेदार नहीं इसके लिए सरकार व कृषि विभाग स्वयं भी जिम्मेदार है क्योंकि प्रदेश के कृषि विभाग ने धान व गेहूं की फसल की कटाई से पहले इनके अवशेषों को प्रबंधन करने बारे किसान केंद्रों में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कोई प्रबंधन का रास्ता नहीं दिखाया गया था। किसान तो पहले ही पराली जलाने के दोष में न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं और पराली जलाने के जुर्म में लगभग 1400 किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उच्चतम न्यायालय ने जिन किसानों ने पराली नहीं जलाई थी उनको प्रति क्विंटल 100 रुपए बोनस देने के आदेश दिए थे और सरकार ने न्यायालय के आदेशों के बावजूद भी सभी किसानों को बोनस की राशि की अदायगी नहीं की।
इनेलो नेता ने कहा कि गेहूं व धान के अवशेष जलाना किसानों की मजबूरी है क्योंकि गेहूं की बिजाई निश्चित समयबद्ध की जाती है और खेतों में अवशेष होते हुए बिजाई करना संभव नहीं। सरकार यह दावा कर रही है कि हैप्पी सीड्स द्वारा गेहूं की बिजाई की जा सकती है जबकि यह मशीन लगभग दो लाख रुपए की आती है और इसके खर्च को वहन करना छोटे किसान के बस की बात नहीं। अगर मशीन द्वारा अवशेषों की गांठ बंधाई जाए तो लगभग 2500 रुपए प्रति एकड़ खर्च आता है और मशीन द्वारा बिजाई पर तकरीबन 3000 रुपए अतिरिक्त खर्च आ जाता है। किसान की आर्थिक हालत पहले ही कमजोर होने के कारण इतने बड़े खर्चों का बोझ सहन करना पहुंच से बाहर है। इस प्रणाली द्वारा गेहूं की बिजाई करने से झाड़ भी कम होता है और गेहूं को सुंडी का प्रकोप होने से फसल पर कुप्रभाव पड़ता है।
इनेलो नेता ने कहा कि किसानों को ब्लैकलिस्ट करने से पहले सरकार को चाहिए कि अवशेष प्रबंधन के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी देकर किसानों को ऐसी टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाएं जिसके द्वारा कटाई करने के साथ-साथ अवशेषों की गांठ भी बंधती जाए। सरकार को चाहिए कि छोटे किसानों के लिए सब्सिडी तौर पर सरकारी मशीनों से कम दरों पर फसलों की कटाई व अवशेषों की गांठ बंधाई आदि की मदद सरकार स्वयं उपलब्ध करवाए। किसानों को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय कृषि विभाग के उन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए जो अवशेष प्रबंधन के लिए टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाने में नाकाम रहे और ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई भाजपा-जजपा सरकार की किसान विरोधी नीति को उजागर करता है।