चंडीगढ़, 17 फरवरी: इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने भाजपा-जजपा सरकार द्वारा बुलाई गई प्री-बजट बैठकों के बारे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि सरकार ने अगर बजट के बारे में विधायकों के विचार आदि जानने थे और सार्थक योजनाओं के बारे में ब्यौरा प्राप्त करना था तो कम से कम दो या तीन महीने पहले ऐसी बैठकें बुलानी चाहिए थी। इन बैठकों में सभी से विवरण सहित विचार प्राप्त करने उपरांत जो अच्छे सुझाव होते उनको बजट-2020-21 में सम्मिलित कर लेते और जो उपयुक्त न होते उन्हें छोड़ दिया जाता। परंतु सोमवार की बैठक में भाग लेने के बाद महसूस हुआ कि ऐन वक्त पर प्री-बजट बैठक का आयोजन करना केवलमात्र खानापूर्ति है जबकि बजट के संबंधित तमाम रिकार्ड पहले ही छप चुका है। सरकार तो केवल केंद्र सरकार द्वारा जो प्री-बजट बैठकें की गई थी बस उसी की नकल करके आम आदमी को ये सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि मौजूदा बजट सभी उद्योगपतियों, किसानों एवं विधायक आदि के विचार लेेने उपरांत आम आदमी के अनुरूप तैयार किया गया है।
इनेलो नेता ने बताया कि बजट का अर्थ है कि वर्षभर की आय-व्यय का संतुलन स्थापित करने के लिए विस्तृत ब्यौरे सहित तमाम मदों पर विचार उपरांत जो मसौदा तैयार होता है उसको बजट कहा जाता है। इसमें उद्योगपति, किसानों व मजदूरों के नुमाइंदे, विभिन्न संगठनों से विचारविमर्श करने के उपरांत प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किस तरह सुधार लाया जाए, रोजगार के साधन कैसे विस्तृत किए जाएं, किसान की आर्थिक हालत में कैसे सुधार लाया जाए, शिक्षा में किस तरह गुणवत्ता लाई जाए और किन मदों में कितनी राशि प्रस्तावित की जाए, पीने के पानी की समस्या को किस तरह किन योजनाओं के तहत सुधारा जाए और कितना रुपया इसके लिए प्रस्तावित किया जाए, जल-संरक्षण योजनाओं में कैसे और कितनी राशि प्रस्तावित की जाए, गिरते भू-जल में सुधार लाने के लिए किन योजनाओं पर कितना पैसा व्यय के लिए प्रस्तावित किया जाए, फसलचक्र को कामयाब करने के लिए किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए और कम पानी से होने वाली फसलों को कैसे प्रोत्साहित किया जाए आदि ये सारी योजनाएं बजट तैयार होने से पहले ही समाज के प्रत्येक वर्ग से बातचीत व सुझाव लेने उपरांत ही बजट का मसौदा तैयार किया जाए तो सही मायने में वह आम आदमी का बजट होता है।
इनेलो नेता ने कहा कि सोमवार की बैठक में एक विधायक पांच मिनट में क्या सुझाव दे सकता है और क्या उन सुझावों का बजट पर प्रभाव पड़ सकता है जबकि बजट संबंधी तमाम कागजात लगभग पहले ही छप चुके हैं और मौजूदा बैठकें तो विधायकों एवं सरकार का समय और पैसे की बर्बादी है। उन्होंने कहा कि धान की जगह बागवानी को उत्साहित करने के लिए मैंने सुझाव देने की कोशिश की परंतु इतने कम समय में क्या तो कोई सुझाव दे सकेगा और क्या सरकार उन सुझावों को बजट में शामिल करने की दोबारा से प्रक्रिया में बदलाव करेगी, ये समझ से बाहर है। ये बैठक सिवाय पैसे की बर्बादी के और कुछ भी नहीं।
इनेलो नेता ने कहा कि संगठित सरकार को बजट के लिए सकारात्मक विचार प्राप्त करने के लिए कम से कम दो-तीन माह पहले विधायकों से मौखिक या लिखित रूप में सुझाव प्राप्त करने चाहिए थे। इससे पहले पिछले वर्ष के बजट में प्रत्येक मद में कुल कितनी राशि प्रस्तावित की गई थी और उसमें कितनी राशि खर्च की गई, इसकी सूची प्रत्येक विधायक को बैठक से पहले देनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि संगठित सरकार का तो एक ही ध्येय है कि आम आदमी के खूनपसीने की कमाई से टैक्स के रूप में जमा किए गए पैसे को किस तरह अपनी मौज-मस्ती के लिए खर्च किया जाए क्योंकि इससे पहले भी तीन दिन के विधायकों के प्रशिक्षण-शिविर में लाखों रुपए खर्च करके अनावश्यक तौर पर सरकारी खजाने पर बोझ डाला गया और विधायकों के समय की बर्बादी की गई।