चण्डीगढ़ 16, फरवरी- संत श्री गुरू रविदास जी का भक्तिकाल में दिया हुआ सामाजिक समरसता और सामाजिक सद्भाव का संदेश आज भी प्रासंगिक है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सामाजिक समरसता के संदेश को निरंतर आगे बढ़ा रहे है। यह उद्गार हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने नई दिल्ली स्थित काँस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हाॅल में गुरू रविदास जयन्ती के उपलक्ष में आयोजित गुरू रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय अधिवेशन में व्यक्त किए।
उन्होनें कहा कि प्रधानमंत्री जी ने सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का जो सिद्धांत दिया है वह श्री गुरू रविदास जी की वाणी का ही पे्ररणा स्त्रोत है। उन्होनंे कहा श्री गुरू रविदास जी ने भक्ति काल के समय ही कहा था कि ‘‘ऐसा चाहू राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहे प्रसन्न‘‘।
श्री आर्य ने कहा कि श्री गुरू रविदास जी किसी एक जाति या सम्प्रदाय के गुरू नही थे बल्कि वे पूरी मानव जाति के पथ-प्रदर्शक थे। श्री गुरू रविदास जी का चिंतन भी किसी एक जाति तक सीमित नही था। आज रविदास जी अपने चिंतन-दर्शन और शिक्षाओं के कारण पूरे विश्व में प्रचारित है।
श्री आर्य ने कहा कि श्री गुरू रविदास जी की शिक्षाएं मानव-मात्र के कल्याण के लिए हैं। उनहोनंे कहा कि संत श्री रविदास जी भक्ति आंदोलन के प्रतिपादक थे। उन्होनंे सदैव सत्य, वास्तविकता और कर्म का संदेश दिया। उस समय समाज में फैले ढ़ोंग और आडम्बर का विरोध करते हुए गुरू रविदास जी ने कहा था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा। उनकी शिक्षाओं को हम सब ने अपने जीवन में उतार कर समभाव की और आगे बढ़ना होगा तभी देश को भेदभाव से छुटकारा मिलेगा और देश तरक्की करेगा।
उन्होने कहा कि डा0 भीमराव अम्बेडकर ने अपने जीवन में श्री गुरू रविदास जी के कर्म के संदेश को जीवन में उतारा था और गरीब वर्ग के लोगों के लिए संघर्ष किया था, जिसकी वजह से समाज में एकता और समभाव का संदेश फैला।
श्री आर्य ने रविदासी समाज के लोगों से अपील की है कि वे समाज द्वारा बहादूरी, राष्ट्रभक्ति और एकजुटता के ऐतिहासिक परिचय को न भूले उन्होंने कहा कि रविदासी समाज का बहादुरी का इतिहास रहा है। 1946 में अग्रेंजों द्वारा चमार रेजिमेंट की स्थापना की गई थी। जब चमार रेजिमंेट के लड़ाकों को आजाद हिन्द फौज के खिलाफ लड़ने को कहा गया तो पूरी रेजिमेंट ने तत्कालीन अंगे्रज सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया। सभी लड़ाके आई एन ए में शामिल हुए और अंग्रेजों के खिलाफ लड़े। इस प्रकार से चमार रेजिमेंट की देश को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
श्री आर्य ने कहा कि बाबा साहब डाॅ भीमराव अम्बेडकर ने सदैव श्री कृष्ण जी के गीता के वसुधैव कुटूम्बकम् दर्शन का अनुकरण किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। राज्यपाल ने हैल्थ इज वैल्थ उक्ति का जिक्र करते हुए जनमानस से नशावृति से सदैव दूर रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन श्री गुरू रविदास विश्व महापीठ के राष्ट्रीय महामंत्री श्री सूरजभान कटारिया ने किया। राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सोमप्रकाश, श्री गुरू रविदास विश्व महापीठ के श्री अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दुष्यन्त गौतम, अध्यक्ष रविदासाचार्य श्री सुरेश राठौर, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री श्री संघप्रिय गौतम, डाॅ सिकन्दर कुमार, कुलपति हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय डाॅ अशोक आर्य व पीठ के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।