चंडीगढ़,16.02.20- आर्यसमाज सेक्टर 7 चंडीगढ़ में केंद्रीय आर्य सभा चंडीगढ़ के द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी के 196वें जन्मोत्सव के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में तीसरे दिन उद्बोधन देते हुए आचार्य आनंद पुरुषार्थी ने बताया कि वेद विद्या से ही संसार का कल्याण संभव है। संसार में चारों ओर कलह, लड़ाई-झगड़ा, युद्ध चल रहे हैं। ऐसे में भारतीय सभ्यता, संस्कृति वेद विद्या के प्रचार-प्रसार से ही सुख, समृद्धि, वैभव को बढ़ाया जा सकता है। आचार्य जी ने बताया कि बाल्यकाल से ही वेद विद्या पठन-पाठन की व्यवस्थाएं हो तो निश्चित ही संसार में आनंद का वास हो। ऋषि दयानंद ने हजारों वर्षों के बाद वेदों के यथार्थ, व्याकरण के अनुरूप भाष्य किये। उन्होंने आर्य समाज की स्थापना की। आर्य समाज के लोगों का ही प्रभाव था के देश की स्वतंत्रता में भाग लेने वाले सबसे अधिक आर्य समाजी थे। जब असहयोग आंदोलन प्रारंभ हुआ तो आर्यों ने सपरिवार जेलों में जाना स्वीकार किया, भारत छोड़ो आंदोलन में भी आर्य समाजों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। आजादी के पश्चात भारत के पुनर्निर्माण में आज भी आर्य समाज अपनी भूमिका बखुबी निभा रहा है। अब भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए वेद विद्या को, ऋषि दयानंद के मंतव्यों को संसार को बताने की आवश्यकता है। इस अवसर पर विमल देव अग्निहोत्री जी ने भजनों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पुलवामा के शहीदों को भी स्मरण किया और सभी श्रोताओं ने संकल्प लिया कि हम आतंकवाद को भारत से उखाड़ फेंकेंगे।