चंडीगड़, 22 जनवरी ( ): मैं जोगिन्द्र कौर संधू 1972 से एन.आर.आई. हूं। फ्रांस की परमानेंट रेजीडैंट हूं तथा लुधियाना में मेरा पैतृक घर है। हर पंजाबी का एक सपना होता है कि पंजाब में उसका एक घर हो। मैंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए लुधियाना के पक्खोवाल रोड पर दो प्लाट खरीदे तथा उस पर कोठियां बनाईं, ताकि मेरे विदेश में रहते परिवार के लिए यहां कोई रहने की जगह हो तथा वह जिंदगी में कभी पंजाब आएं तो यहां रह सकें, पर मुझे क्या पता था कि मेरे अपने पंजाबी ही जो कि भू-माफिया बन चुके हैं, वह इन कोठियों पर बुरी नजर रख रहे हैं तथा उन्होंने इस पर कब्जा करने की कोशिश की। बस मेरी लड़ाई तथा दुख की दास्तां यहां से शुरू होती है। जब मैं उनसे यह कोठियां खाली करवाने की कोशिश की। तो उन्होंने मेरे खिलाफ झूठे पर्चे दर्ज करवाने शुरू कर दिए। एक के बाद एक कुल 13 झूठे पंजाब के अलग-अलग जिलों तथा हरियाणा में करवाए। लेकिन परमात्मा की मेरे पर मेहर बनी रही अब मैं हर पर्चे से बा-इज्जत बरी हुई, पर मेरा यह दुख यहां ही खत्म नहीं हो रहा। यह भू-माफिया के साथ पंजाब पुलिस के बड़े अफसर मिले हुए हैं। अब इन बड़े अफसरों की मेरे खिलाफ की कार्रवाई हमारे सामने आई हैं, जिनकी शहर पर मैंने 16 साल दर्द भरी जिंदगी व्यतीत की।
पंजाब पुलिस का एक बड़ा अफसर मुहम्मद मुस्तफा जो कि उस समय आईजी बार्डर रेंज था। उसने लुधियाना पुलिस की कार्रवाई को रोकते हुए मेरे खिलाफ की कागजी कार्रवाई में साफ लिखा था कि ‘एनआरआई जोगिन्द्र कौर संधू की कोठी की कीमत बढ़ गई है तथा जोगिन्द्र कौर संधू को पकडक़र अंदर कर दो तथा इसकी कोठी छीन लो।’
जब लुधियाना पुलिस मकान मालिक भाव (जोगिन्द्र कौर संधू) पर धारा 452 ना लगाने पर इस बात पर अड़ गई कि यह गैर कानूनी है, तो एडीजीपी क्राइम ने पत्र द्वारा लुधियाना पुलिस को आदेश दिया कि ‘मैं कह रहा हूं कि इसको (जोगिन्द्र कौर संधू) को अरेस्ट कर लो तथा कोठी छीन लो तथा जो पुलिस अफसर नहीं मानता उस पर विभागीय कार्रवाई करो।’
गत दो दशक से पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारियों की शहर पर लुधियाना के एक भू-माफिया से पीडि़त एनआरआई जोगिन्द्र कौर संधू ने अब आर-पार की लड़ाई लडऩे का ऐलान किया है। आज यहां पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए श्रीमती संधू ने कहा कि 16 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लडक़र उसने बेशक भू-माफिया को कानूनी हार दे दी थी, पर अब फिर उक्त भू-माफिया का सरगना जसविंदर सिंह जस्सी अपने चहेते पुलिस अफसरों की मिलीभगत से उसको परेशान करने लगा हुआ है।
लुधियाना के पक्खोवाल रोड की निवासी 71 वर्षीय एन.आर.आई जोगिन्द्र कौर संधू ने बताया कि पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा चुनाव से पहले उसको भरोसा दिलाया था कि वह सत्ता में आते ही उसको इंसाफ दिलाएंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने भी अपने दो ढाई साल के कार्यकाल दौरान उनका साथ नहीं दिया, जबकि उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुखातिब होते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री की एक ऐसे मामले में सहायता की थी, जिसमें कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ झूठा बलात्कार का आरोप लगता था।
उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने फैसला किया कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मौके वह मुख्यमंत्री निवास के सामने मरणव्रत पर बैठेंगे तथा अपने संविधानिक हकों की की रक्षा का जवाब मांगेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक पंजाब सरकार उक्त आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक वह अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
फ्रांस की रहने वाली जोगिन्द्र कौर ने बताया कि 16 साल पहले उक्त गिरोह के सरगना ने पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी लुधियाना स्थित दो कोठियों पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की तो माफिया के सरगना फाइनांसर जसविंदर जस्सी ने थाना प्रमुख राजेश कुमार के इलावा ए.डी.जी.पी. स्तर के अधिकारियों की भगत से उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में झूठे केस दर्ज करवाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि उक्त गिरोह ने उनक खिलाफ किडनेपिंग, लूटपाट, धोखाधड़ी तथा कबूतरबाजी आदि के 13 फर्जी मामले दर्ज करवा दिए थे।
उन्होंने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई उपरांत उन्होंने 2017 में उक्त सभी केसों में से बा-इज्जत बरी होने में सफलता हासिल कर ली। उन्होंने कहा कि कानूनी जीत हासिल करने के बाद उन्होंने डीजीपी पंजाब, लुधियाना के पुलिस कमिश्रर, फाइनांसर जसविंदर जस्सी, उसके रिश्तेदार बिक्रमजीत सिंह तथा जसविंदर पिंकी तथा एनआरआई कमीशन के विरुद्ध माननीय अदालत में मानहानि का मामला दर्ज करवा दिया। उन्होंने कहा कि उक्त मानहानि के केस में खुन को फंसता देखकर पुलिस अधिकारियों तथा उक्त गिरोह को चिंता लग गई तथा उन्होंने दोबारा मेरे ऊपर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उक्त गिरोह द्वारा मार्च 2018 में उनको अगवा करने की कोशिश भी की। इसके अलावा कई बार जानलेवा हमले भी करवाए गए, पर इसके बावजूद पुलिस ने उनको कोई सुरक्षा नहीं दी।
उन्होंने एक पत्र दिखाते हुए बताया कि इस पत्र द्वारा उस समय के ए.डी.जी.पी. क्राइम ने स्पष्ट गैर कानूनी हिदायत की हुई थी, जिसमें कहा गया था कि उनके मामले के प्रति न तो लुधियाना पुलिस कोई कार्रवाई करेगी न ही एन.आर.आई. कमीशन बल्कि इस मामले पर सिर्फ ए.डी.जी.पी. क्राइम ही एक्शन लेंगे। उन्होंने कहा कि उक्त फाइनांसर खुद जनरल कैटागिरी का होने के बावजूद एससीएसटी आयोग के समक्ष उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवा रहा है। इतना ही नहीं उक्त फाइनांसर के जानकार एक पुलिस अफसर ने भी लुधियाना से बाहर मुक्तसर साहिब जाकर उनके खिलाफ धोखाधोड़ी का मामला दर्ज करवा दिया था, जिसमें जरूरी सबूत न होने के कारण मैं बेगुनाह साबित हुई, पर अभी तक उक्त पुलिस अफसर तथा झूठे मामला दर्ज करवाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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