Chandigarh,14.12.19-प्राचीन कला केन्द्र बहुत ही गर्व से सूचित कर रहा है कि केन्द्र में गुरमत संगीत में विभिन्न परीक्षाएं आयोजित की जाएगी और उनके आधार पर केन्द्र के डिप्लोमा प्रदान किए जाएगें । इसमें प्रारम्भिक वर्ग से लेकर स्नातकोतर तक के डिप्लोमा प्रदान किए जाएगें । इस विभाग को आरंभ करने का मकसद पवित्र गुरबानी के उपदेशों और पारम्परिक सिद्धांतो को मानना एवं सिक्ख धर्म के गौरवमयी पारम्परिक कीर्तन,गुरबानी शब्द को गुरमत संगीत की शिक्षा द्वारा प्रचारित एवं प्रसारित करके आम धारणा तक लाना ही मुख्य उदेश्य है । गुरबानी के शब्दों का सही रूप से उच्चारण एवं गायन ही गुरमत संगीत का मुख्य उदेश्य है । केन्द्र गुरबानी गायन में प्रयुक्त होने वाले वाद्यों जैसे रबाब,दिलरूबा,ताउस,सरादां,इसराज के प्रचार एवं प्रसार को बढ़ावा देने में भी प्रतिबद्ध है ।

केन्द्र के गुरमत संगीत विभाग के प्रमुख के लिए मलकियत सिंह जडियाला जी को नियुक्त किया गया है । मलकियत सिंह जी गुरमत संगीत के प्रचार एवं प्रसार में अपनी सेवाएं देकर सिक्ख धर्म एवं गुरबानी की पवित्र सेवा निस्वार्थ भाव से करते आ रहे हैं ।

इस अवसर पर केन्द्र द्वारा गुरमत संगीत की पहली बैठक का आयोजन एम.एल.कौसर सभागार में किया गया जिसमें मलकियत सिंह जडियाला जी ने गुरमत संगीत गायन पेश किया । इनके साथ पंडित काले राम ने तबला एवं भाई करनवीर सिंह एवं भाई बेअंत सिंह ने संगत की । इस कार्यक्रम का आयोजन सायं 7: 00 बजे से किया गया