चंडीगढ़,(सुनीता शास्त्री)10.09.19- सारागढ़ी के युद्ध के 122 वें वर्ष के उपलक्ष्य में, लाटा प्रोडक्शंस ने पंजाब आर्ट थिएटर के साथ मिलकर जंग-ए-सारागढ़ी नाम से एक अद्वितीय साइट एंड साउंड शो तैयार किया है। शिरोमणि निर्माता पुरस्कार विजेता हरबक्स सिंह लाटा ंने शो को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया है। उनके साथ शो के तकनीकी निदेशक हर्षवीर सिंह लाटा और सहायक निदेशक भूपाल सिंह भी मौजूद थे। शो के कुछ कलाकार भी युद्ध की अपनी पूरी भव्यता में, अपनी क्लासिक हेनरी मार्टिनी बंदूकों और एक हेलियोग्राफ के साथ उपस्थित थे।बटालियन के सेवानिवृत्त एवं बठिंडा में अभी भी सेवारत अधिकारियों व सैनिकों के सामने जब 12 सितंबर को इस शो का मंचन किया जाएगा, तब इतिहास एक बार फिर से जीवंत हो उठेगा। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे।हरबक्स लाटा ने कहा, ‘यह एक किस्म की श्रद्धांजलि होगी, क्योंकि 4 सिख वही &6 वीं सिख रेजिमेंट है, जिसके 21 बहादुरों ने वर्ष 1897 में 10,000 पश्तूनों के हमले का सामना किया था और उत्तर-पश्चिम फ्रंटियर के तिराह क्षेत्र में, जो अब पाकिस्तान में है, एक सिग्नल पोस्ट की सुरक्षा में अपने जीवन का बलिदान कर दिया था। इन साहसी सिख सैनिकों ने 600 से अधिक हमलावरों को मार डाला था।’यह शो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बहुप्रशंसित पुस्तक ‘सारागढ़ी एंड दि डिफेंस ऑफ समाना फोर्ट’ पर आधारित है। जंग-ए-सारागढ़ी एक अद्वितीय साइट एंड साउंड पैनोरमा है, जिसे हरबक्स सिंह लाटा द्वारा प्रोड्यूस और निर्देशित किया गया है, जो साइट एंड साउंड शो की तकनीक के अग्रणी माने जाते हैं। हर्षवीर सिंह लाटा, तकनीकी निदेशक ने कहा, ‘सारागढ़ी के सिग्नल पोस्ट का डिजिटल सेट फिर से बनाया गया है और इसे 50 फीट की एलईडी वॉल पर दिखाया जाएगा। बड़े पैमाने पर सेटअप ढूंढना और बुक करना एक बाधा थी। इतना बड़ा और कस्टम सेटअप अभी तक प्रयोग में नहीं लाया गया था। कई वेंडरों की मदद से &000 वर्गफीट के मंच पर रोशनी के लिए 60 फीट का सेट बनाया गया। कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग एक और उपलब्धि थी। चंडीगढ़, लुधियाना व पटियाला के कपड़ा बाजारों में घूमने के बाद, हमें वर्दी के लिए खाकी सूती कपड़े मिले, जो 100 साल पुरानी पोशाक के समान थे। सबसे कठिन काम था सिखों कीपगड़ी के बैज तैयार करना, क्योंकि कोई भी फैब्रिकेटर कम संख्या में इन्हें बनाने को राजी नहीं था।’जंग-ए-सारागढ़ी के सहायक निदेशक भूपाल सिंह ने कहा, ‘आर्मी ड्रिल्स की प्रेक्टिस की गयी, जिसमें बहुत समय लगा, हालांकि सभी को इनमें महारत हासिल थी। महीनों के पूर्वाभ्यास से कलाकारों के बीच एक पारिवारिक संबंध बन गया, जो उनकी परफॉर्मेंस में साफ दिखायी देता है और उन कैरेक्टर्स को दर्शाता है, जिन्हें हम चित्रित कर रहे हैं।हर्षवीर सिंह लाटा, तकनीकी निदेशक ने कहा, ‘काफी रिसर्च और स्क्रिप्ट के ड्राफ्ट पर ढेर सारा काम करने के बाद बारी आयी 21 सिख अभिनेताओं को कास्ट करने की, जो सारागढ़ी के 21 बहादुरों का रोल करेंगे। हमने शारीरिक फिटनेस, बॉडी लैंग्वेज और तेजी से सीखने पर ध्यान दिया।’जिस चीज को बनाने के लिए सबसे अधिक मेहनत लगी, वो थी 21 हेनरी मार्टिनी बंदूकें। लकड़ी के बट पर नक्काशी करने के लिए प्रॉपर्टी डिजाइनरों के लिए इंटरनेट से मिली तस्वीरें काफी नहीं थीं। सौभाग्य से, पटियाला में किला मुबारक संग्रहालय से मदद मिल गयी। प्रॉपर्टी डिजाइनर की निगाह संग्रहालय में प्रदर्शित बंदूकों पर पड़ गयी। हालांकि, बैरल और ब्रीच लोडिंग लीवर बनाना एक मुश्किल काम था।साइट एंड साउंड शो भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून, अमृतसर के वार मेमोरियल, हेरिटेज फेस्टिवल, पटियाला जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर प्रस्तुत किए जा चुके हैं। पठानकोट कैंट और फिरोजपुर कैंट जैसे सैन्य प्रतिष्ठानों ने भी मेगा एक्ट देखा जा चुका है।हरबक्स सिंह लाटा ने कहा, ‘अपने देश के लिए एक सैनिक का निस्वार्थ बलिदान अतुलनीय होता है और वह अत्यंत सम्मान का हकदार होता है। सारागढ़ी की लड़ाई में &6 वीं सिख रेजिमेंट के इन 21 सैनिकों की बहादुरी को संजो कर रखना जरूरी था, ताकि आने वाली पीढिय़ों को इसके बारे में पता चल सके।