चंडीगढ़ ( DR. VINOD )13.08.19 वेद हमारा आधार है। वेद का सर्वोच्च स्थान है। यह सर्वज्ञानमय वस्तु है। वेद में सत्य है। संसार के अन्य शास्त्रों की रचना किसी मनुष्य ने की है। परंतु वेद की रचना ईश्वर ने ही की है। उपरोक्त शब्द आर्य समाज सेक्टर 7 बी चंडीगढ़ में आयोजित श्रावणी पर्व के शुभ अवसर पर आध्यात्मिक एवं वैदिक व्याख्यान के दौरान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने कहे। उन्होंने बताया कि वेद के मंत्रों के बीच भरा ज्ञान भगवान का ही दिया गया है। वेद का अर्थ ज्ञान भी है। स्वाभाविक ज्ञान वह है जो मनुष्य को जन्म से प्राप्त होता है। इसे किसी से सीखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह तो परमात्मा की व्यवस्था से मिला होता हैैै जैसे पक्षी ने घोंसला बनाना किसी से भी नहीं सीखा बल्कि उसे स्वभाविक रूप से ज्ञान मिला है। मन और जीवन को सफल जीने के चार सोपान धर्म अर्थ काम और मोक्ष हैं। नैमित्तिक ज्ञान वह जान है जो हमें कारण से प्राप्त होता है। यह ज्ञान माता पिता और गुरु से मिलता है। स्वाभाविक ज्ञान ना तो घटता है और न ही बढ़ता है। वेद ज्ञान ऋषियों का नहीं बल्कि परमात्मा का दिया हुआ ज्ञान है। वेद ज्ञान दृश्यों का नहीं बल्कि परमात्मा का है ब्रह्मा से जैमिनी पर्यंत ज्ञान ही परमात्मा का ज्ञान है। इसी ज्ञान को मानना चाहिए। महर्षि दयानंद सरस्वती ने बताया है कि वेदों में इतिहास नहीं है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं होता। यह तीनों कालों वर्तमान, भूतकाल और भविष्य काल में अपरिवर्तनीय है। कार्यक्रम से पूर्व भजनोपदेशक पंडित कुलदीप आर्य ने मधुर भजनों से उपस्थित लोगों को आत्म विभोर कर दिया। आर्य समाज के प्रधान रविंद्र तलवाड़ ने बताया कि इस श्रावणी पर्व पर आयोजित आध्यात्मिक एवं वैदिक व्याख्यान तथा भजनों का आयोजन 15 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने सभी लोगों को इस कार्यक्रम में परिवार एवं इष्ट मित्रों सहित सादर आमंत्रित किया है। इस मौके पर न्यायमूर्ति एएल बाहरीी, न्यायमूर्ति प्रीतम पाल, प्रकाशचंद्र शर्मा, डॉ. विनोद कुमार आनंदशील शर्मा, रघुनाथराय आर्य आदि गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।