चंडीगढ़, 15 जून: आज बीरबल दास ढालिया ने औपचारिक रूप से इनेलो की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष का पद सम्भाला। इनेलो के राज्य प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला और निवर्तमान राज्याध्यक्ष अशोक अरोड़ा, राष्ट्रीय इकाई के प्रधान महासचिव आरएस चौधरी और राज्य इकाई के नीति एवं कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष एमएस मलिक ने उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रेसवार्ता में अभय सिंह चौटाला ने कहा कि पार्टी के पुनर्गठन की कार्रवाई लगभग पूर्ण हो चुकी है और अब पार्टी आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए तैयार है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा चुनावों में जनता के समक्ष केवल एक मुद्दा था कि वह प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुनना चाहती है या राहुल गांधी को। इसका निर्णय अब जनता कर चुकी है और अब उसके समक्ष राज्य की समस्याएं, उसके मुद्दे और उनका समाधान है।
उन्होंने कहा कि पुनर्गठन की कवायद के बाद पहली जुलाई से हररोज तीन-तीन हलकों में पार्टी द्वारा जनसंपर्क अभियान प्रारंभ कर दिया जाएगा और राज्याध्यक्ष बीरबल दास ढालिया सहित अशोक अरोड़ा और वे स्वयं सभी जिलों, हलकों और बड़े गांवों में जाकर जनता से अपना संपर्क स्थापित करेंगे। इस अभियान में पार्टी लोगों का ध्यान उन विषयों पर भी देगा जिनमें सरकार की करनी या अनदेखी के कारण जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने पे्रसवार्ता में इस बात पर भी बल दिया कि भले ही सरकार का यह दावा हो कि लोगों को रोजगार देने में ‘पर्ची और खर्ची’ की प्रथा समाप्त हो चुकी है परंतु सच यह है कि ऊंचे पदों पर विराजमान लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं और अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों के कर्मचारी जेल में भी ‘पर्ची और खर्ची’ के आरोप में बंद रह चुके हैं।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि इस बात को अनदेखा नहंीं किया जा सकता कि अभी हाल में जब भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ तो राज्य कैबिनेट के एक सदस्य ने जनता की उस मांग का समर्थन किया जिसमें ओवरलोडेड ट्रकों के भारी घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि जनता सहित सरकार के अपने मंत्रियों को उस विभाग की कार्यकुशलता, ईमानदारी और नीयत पर शक है जो स्वयं मुख्यमंत्री की देखरेख में काम करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुनर्गठन के पश्चात इनेलो अपने नए रूप में एकजुट भी है और अनुशासन में रहकर एक विशेष दिशा की ओर बढऩे के लिए तैयार भी है जिस कारण विधानसभा चुनावों के परिणाम लोकसभा चुनावों से भिन्न होंगे।