CHANDIGARH,12.06.19-प्राचीन कला केन्द्र के नियमित मासिक बैठकों की श्रृंखला में 259वीं कड़ी में आज 11 जून को एम.एल.कौसर सभागार में दिल्ली से आई वीना मनी ने मंच पर अपनी सुंदर प्रस्तुति देकर एक यादगारी शाम को संजोया ।

छः वर्ष की अल्पायु से ही कुचीपुड़ी नृत्य सीखने वाली वीना ने श्रीमती सीता नागाज्योति से नृत्य की विधिवत शिक्षा ली । इन्होंने देश के विभिन्न शहरों में नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरी ।
कार्यक्रम की शुरूआत से पहले देश की जाने माने थियेटर कलाकार एवं सिनेमा जगत की प्रसिद्ध हस्ती श्री गिरीश कनार्ड की श्रद्धांजलि से किया गया । प्राचीन कला केन्द्र द्वारा इस महान कलाकार को श्रद्धांजलि दी गई जिसमें 1 मिनट का मौन रखा गया ।


उपरांत कार्यक्रम का आरंभ वीना ने वाणी की वंदनम से किया जिसमें मां सरस्वती की वंदना से कार्यक्रम की भक्तिमयी शुरूआत की गई । इसके उपरांत भामा प्रवेश दारूवू प्रस्तुत किया गया जिसमें उन्होंने प्रसिद्ध कवि सिदेधंदरा योगी द्वारा रचित रचना भामाकल्पम प्रस्तुत की गई जो श्री कृष्ण की प्रिय पत्नी सत्याभामा पर आधारित है। वीना ने बहुत खूबसूरती से नृत्य के माध्यम से खूब तालियां बटोरी । उपरांत संचाराधारा अष्टपदी प्रस्तुत की गई । जो उड़ीया कवि जयदेव द्वारा रचित है ।इसमें राधा अपनी सखी से कृष्ण एवं उनकी रासलीला के बारे में बताती है जिसे वीना ने बहुत सुंदरता से प्रस्तुत किया । इसके पश्चात समारासुंदरागुनी प्रस्तुत की गई । इसमें नृत्यांगना ने स्वाधीना पतिका नायिका का खूबसूरत चित्रण नृत्य द्वारा प्रस्तुत किया । कार्यक्रम के अंत में तरंगम प्रस्तुत किया गया । इसमें वीना ने पीतल पलेट में नृत्य प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी बखूबी पकड़ का प्रदर्शन किया ।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के चयैरमैन श्री एस के मोगां रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर,सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।