Chandigarh,10.02.19-Sh.Ravinder Sharma said in an interaction "भावुक होकर बोला गया शब्द भी मंत्र बन जाता है” वर्कशॉप बाल भवन सेक्टर 23 में 30 दिवसीय विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल में आयोजित रू- ब- रु में सीनियर आर्टिस्ट रविंदर शर्मा ने अपनेअनुभवों को बांटते हुए उपस्थित कला प्रेमियों को विसुअल आर्ट के विभिन्नपहलुओं से अवगत करवाया.

हिमाचल प्रदेश के उना में जन्में और पूरा जीवन कला को समर्पित करने वाले रविंदर शर्मा जी मानते है की कला आपको अपने अहम् और अहंकार से जुदा करती है. शाकाहारी परिवार से होने के कारण मेडिकल कॉलेज छोड़कर कलाक्षेत्र की बुलंदियों छूने वाले रविन्द्र जी अपनी प्रकृति और शिव को लेकर की गयो पेंटिंग्स के लिए विश्वविख्यात है.

अपने स्कूल टीचर की कला के प्रति लगन देखकर कला की ओर आकर्षित होने वाले रविंदर जी खुद भी अपने छात्रों के प्रिय अध्यापक है. इसका राज़ पूछे जाने पर रविंदर जी बड़ी विनम्रता से जवाब देते हुए कहते है कि अच्छे अध्यापक का निर्माण बिना अच्छे छात्रों के नहीं हो सकता.अपनी मां में शक्ति का रूप देखने वाले रविंदर जी ने अपने संघर्ष के दिनों में अपना खर्च चलाने के पुरानी मैगज़ीन्स से तस्वीरे काटकर उनका कोलाज बनाकर बेचने का काम भी किया है. 25 साल से अधिक अध्यापन के क्षेत्र से जुड़े रविंदर जी शिव को कुदरत से अलग नहीं समझते और मानते है की यदि पूरी इमानदारी और समर्पण से अपना काम किया जाए तो प्रकृति खुद आपकी सहायता करती है.

पेंटिंग्स और कला की विभिन्न विधाओं की जानकारी रखने वाले रविंदर शर्मा जी नाट्यशास्त्र पर भी पूरी पकड़ रखते है. उन्होंने युवा कलाकारों को नाट्यशास्त्र की बारीकियों से भी अवगत करवाते हुए कहा की हर पेंटिंग अपने में एक कहानी कहती है और कभी कभी पेंटिंग खुद ही उसे पूरा करने का सन्देश देती है. इस मौके परगुरुबानी में अत्यंत श्रद्धा रखने वाले रविन्द्र जी ने प्रसिद्ध फिलॉसफर जॉन डीवी का हवाला देते हुए कहा कि “संघर्ष के बिना मिला हर्ष अधूरा है”.