सोलन-दिनांक 06.12.2018-शिक्षा, संसदीय मामले एवं विधि मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा को समग्र विकास का पर्याय बनाने के लिए हमें अपनी शिक्षा पद्धति में संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों का समावेश करना होगा। सुरेश भारद्वाज आज सोलन जिला के नालागढ़ उपमण्डल के बद्दी स्थित वीआर सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
शिक्षा मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
उन्होंने इस अवसर पर देश के संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेदकर को उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह छात्र को न केवल ज्ञानवान अपितु संस्कारवान भी बनाए। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति छात्रों को अपने परिवेश की जानकारी के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों को आत्मसात करने पर बल देती है। पराधीनता के लंबे समय ने जहां हमारी शिक्षा पद्धति को नष्ट किया वहीं भारतीय संस्कृति और मूल्यों का क्षरण भी किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय में लॉर्ड मेकाले द्वारा स्थापित शिक्षा पद्धति ने ऐसे लिपिकों को जन्म दिया जो तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य के हितों का संवर्धन करने के लिए ही शिक्षित किए गए थे। उन्हांेने कहा कि पराधीनता की इस शिक्षा प्रणाली को हमें अपनी संस्कृति की प्रणाली से बदलना होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्रों को भारत की परंपरा, रीति-रिवाजों के साथ-साथ पारिवारिक मूल्यांे एवं नैतिक मूल्यों की शिक्षा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छात्र भविष्य में न केवल देश के उत्तरदायी नागरिक बनने चाहिए अपितु वे अपने वृद्ध माता-पिता एवं परिवार का पूर्ण पालन एवं पोषण करने में भी सक्षम होने चाहिएं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए युवाओं को आधुनिक ज्ञान के साथ-साथ संस्कृति एवं संस्कारों की गहन जानकारी दी जानी आवश्यक है। प्रदेश सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध कार्य कर रही है।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार में सरकार के साथ-साथ निजी शिक्षण संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों को नैतिक एवं संस्कारित शिक्षा देने तथा उनका समग्र विकास सुनिश्चित बनाने के लिए भी प्रदेश सरकार को निजी शिक्षण संस्थानों का सहयोग चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में नालंदा तथा तक्षशिला विश्वविद्यालय भारतीय शिक्षा प्रणाली के ध्वजवाहक रहे हैं और हमें इस प्रणाली की श्रेष्ठता को ग्रहण करना होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमें मात्र शिक्षा प्रदान करने के स्थान पर गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान देना होगा। हमें यह सुनिश्चित बनाना होगा कि वृद्ध आश्रमों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगे और हमारे छात्र भारत को पुनः विश्व गुरू का स्थान दिलाने में सफल हों। उन्होंने संस्कृत की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति गुरू को सर्वोच्च स्थान प्रदान करती है और अपने आचरण तथा छात्रों को समग्र शिक्षा प्रदान कर अध्यापकों को इस उच्च स्थान की पवित्रता एवं परंपरा को बनाए रखना होगा।
सुरेश भारद्वाज ने निजी शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे स्वेच्छा से अपने संस्थानों में निर्धन बच्चों को भी प्रवेश दें। उन्होंने छात्रों, अध्यापकों तथा अभिभावकों से आग्रह किया कि वे नशे को जड़ से समाप्त करने में अपन सहयोग दें।
उन्होंने कहा कि विद्यालय का वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह सभी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्हांेने आशा जताई कि इस अवसर पर पुरस्कृत किए गए छात्र अन्य को भी लक्ष्य को ओर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा देंगे।
सुरेश भारद्वाज ने इस अवसर पर मेधावी छात्रों को पुरस्कृत किया।
विद्यालय के छात्रों ने इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
दून के विधायक परमजीत सिंह पम्मी, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष दर्शन सिंह सैणी, भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकरी एवं झारखण्ड के पूर्व राज्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसडी शर्मा, भाजपा राज्य कार्यकारिणी सदस्य डॉ. श्रीकांत शर्मा, नगर परिषद बद्दी के अध्यक्ष नरेंद्र दीपा, पार्षद, भाषा कला एवं संस्कृति विभाग की सेवानिवृत अतिरिक्त निदेशक डॉ. मधु कौशिक, उपनिदेशक उच्च शिक्षा पूनम सूद, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा भागचंद चौहान, तहसीलदार नालागढ़ केशव राम, विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. वीपी शर्मा, विद्यालय की सीनियर विंग की प्रधानाचार्य अंशी भनोट पट्टा, जूनियर विंग की प्रधानाचार्य जसभिन्द्र कौर, अन्य गणमान्य व्यक्ति, अध्यापक, अभिभावक तथा छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।
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