चंडीगढ़, 20 अप्रैल- भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने इनेलो के बसपा के साथ गठबंधन पर प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोडा की टिप्पणी को इनेलो के चरित्र के अनुरूप अहंकार और घमंड से परिपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इसी मानसिकता की बदौलत इनेलो को जनता ने बीते 15 साल से सत्ता से बाहर बिठा रखा है। यही नहीं जब-जब इनेलो सत्ता में रहती है , तब-तब दलित समुदाय के हितों पर कुठाराघात करने और उन्हें हतोत्साहित किया गया है। 
दरअसल गत दिवस इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोडा द्वारा गठबंधन पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर कहा गया था कि हाथी मस्ती में चलते हैं और कुत्ते भौंकते हैं। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा कि इनेलो नेताओं की भद्दी जबान और सोच की वजह से जनता ने उन्हें बीते 15 साल से कुर्सी से उतार रखा है। 
उन्होंने कहा कि इनेलो ने हमेशा दलित वर्ग को दबाने का काम किया है। गांवों में उनके कार्यकत्र्ता न केवल दलित बस्तियों में भय का माहौल बनाते थे, अपितु विकास में भी अवरोध उत्पन्न करते थे। उन्होंने कहा कि 1990 में तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की तो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के इशारे पर पूरे प्रदेश में मंडल आयोग के खिलाफ रास्ते जाम करते हुए सैंकड़ों बसों को आग के हवाले कर दिया गया, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि मंडल आयोग की सिफारिशों के लाभ पिछड़ा वर्ग को मिले।
टोहाना विधायक बराला ने कहा कि वर्ष 1982 में तत्कालीन राज्यपाल जीडी तपासे को अपमानित कराने वाली इनेलो ने उनके मुंह पर कालिख पोतने वाले अपने समर्थक को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया और 1987 में आम चुनाव में डॉ कृपाराम पूनिया के बहाने सत्ता की हिस्सेदारी करने वाले चौटाला परिवार ने उन्हें चीन में अपमानित करवाते हुए दलित समाज को अपनी संकीर्ण विचारधारा से दबाने की कोशिश की। 
उन्होंने कहा कि दलित समाज को लेकर इनेलो की कुटिल नीति के उदाहरणों से इतिहास भरा है। आज इनेलो नेताओं का अहंकार ऊंचाई पर है, इसी वजह से आज इनेलो रसातल में पहुंच गई है।