धर्मशाला, 23 फरवरी: निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.(प्रो.) समदोंग रिम्पोछे ने आज धर्मशाला में आयोजित एक सादे किंतु गरिमापूर्ण समारोह में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में उपनिदेशक पद पर कार्यरत प्रसिद्ध साहित्यकार अजय पाराशर के कविता संग्रह ‘मौन की अभिव्यक्ति’ का विमोचन किया। स्वयंसेवी संस्थाओं रैंमप्स और नवप्रभात के सहयोग से सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के धर्मशाला कार्यालय के प्रेस कक्ष में आयोजित इस समारोह में साहित्य एवं मीडिया जगत के अनेक गणमान्य लोग शामिल रहेे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ.(प्रो.) समदोंग रिम्पोछे ने मौन को संपूर्णता की अभिव्यक्ति का माध्यम बताते हुए कविता संग्रह को बेहद उत्कृष्ट रचना बताया। उन्होंने कहा कि संग्रह में शामिल कविताओं की आध्यात्मिक पृष्ठभमि इसे नया एवं अदभुत आयाम देती है।
डॉ. रिम्पोछे ने रचनाओं में विविध विषयों पर अपने भावों को सरलता एवं सहजता से प्रकट करने की सिद्धस्ता के लिए कवि की सराहना की। 
इस अवसर पर जाने माने साहित्यकार डॉ. ओम अवस्थी ने अध्यक्षीय भाषण में संग्रह की कविताओं में ‘अच्छी कविता’ का भविष्य देखने की बात कहते हुए रचनाओं में शब्द और अर्थ की सहधर्मिता होने का उल्लेख किया । उन्होंने कहा कि कवि ने भारतीय चिंतन में व्याप्त अध्यात्म की धारा को पूर्णता से निभाया है। उन्होंने कहा कि कविताएं पाठकों को छूती भी हैं और झकझोरती भी हैैं। उन्होंने कवि की दूसरों से जुड़कर विस्तार पाने की भावना की सराहना की।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार फुल्ल ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने पूरे खंड में भावनाओं की निरंतरता कायम रखने के लिए कवि की सराहना करते हुए कहा कि कविताओं में गाहे बगाहे आने वाले सूक्त वाक्य भावविभोर करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि कविताओं में जीवन, जगत और ‘इस ओर’ एवं ‘उस ओर’ के सभी मुद्दे समाहित हैं जो पाठकों को झकझोरते हैं। 
इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार और प्रख्यात कवि नवनीत शर्मा ने पुस्तक समीक्षा करते हुए कहा कि संग्रह की रचनाओं में सत्य की सात्विकता स्पष्ट प्रकट होती है।उन्होंने कहा कि रचनाओं के भाव प्रधान होने के कारण कहीं कहीं कला पक्ष से कवि का ध्यान हटा हुआ प्रतीत होता है।उन्होंने कहा कि पुस्तक में शामिल दोहे और छोटी कविताएं, लम्बी कविताओं की तुलना में अधिक पैनी दीख पड़ते हैं।
 
इस अवसर पर स्वयंसेवी संस्थाओं रैंमप्स और नवप्रभात के प्रतिनिधि एवं साहित्यकर्मी पी.पी.रैणा ने अपने संबोधन में कहा कि आध्यात्मिकता का आधार होने पर ही कोई रचना चिरंजीवी बन सकती है। उन्होंने शानदार कविता संग्रह के लिए अजय पाराशर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी रैंमप्स और नवप्रभात मिलकर साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में इस प्रकार के आयोजन करती रहेंगी। 
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवियित्री सरोज परमार ने मौन की अभिव्यक्ति संग्रह में से अपनी पसंदीदा कविताओं के अंश पढ़े।
 आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकरी सुमित ने कार्यक्रम का संचालन किया। अजय पाराशर ने सभी मेहमानों का आभार जताया।
कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार वेद प्रकाश अग्नि, पीयूष गुलेरी, प्रत्यूष गुलेरी, ललित शर्मा, नरेंद्र अवस्थी, रेखा डढवाल सहित साहित्य एवं मीडिया जगत के अनेक गणमान्य लोग शामिल थे।